बुडको तैयार करेगा बक्सर गंगा रिवर फ्रंट का मास्टर प्लान, बनाए जाएंगे पक्के घाट और कैफेटेरिया

सांकेतिक फोटो
Buxar Ganga River Front: बक्सर में गंगा किनारे बड़े बदलाव की तैयारी है. अब सिर्फ रामरेखा घाट ही नहीं, बल्कि अहिरौली के अहिल्या घाट से ठोरा नदी संगम तक पूरा तट रिवर फ्रंट की तरह विकसित होगा. पक्के घाट, पाथवे, सड़क और कैफेटेरिया बनेंगे. सरकार ने डीपीआर बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
Buxar Ganga River Front: बक्सर जिले में गंगा किनारे अब बड़ी तस्वीर बदलने वाली है. अभी तक लोग मुख्य रूप से रामरेखा घाट पर ही ज्यादा जुटते थे, लेकिन आने वाले समय में पूरे शहर का गंगा तट आकर्षक रिवर फ्रंट जैसा दिखेगा. अब अहिरौली के अहिल्या घाट से लेकर ठोरा नदी के संगम तक के इलाके को एक साथ विकसित किया जाए.
क्या है पूरी योजना?
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के तहत अहिरौली के अहिल्या घाट से लेकर ठोरा नदी के संगम तक के पूरे इलाके का कायाकल्प किया जाएगा. यहां केवल पक्के घाट ही नहीं बनेंगे, बल्कि लोगों के टहलने के लिए पाथवे, आवाजाही के लिए पीसीसी सड़कें और बैठने और नाश्ते के लिए आधुनिक कैफेटेरिया भी बनाए जाएंगे. अब तक ये बातें सिर्फ कागजों और चुनावी वादों तक सीमित थीं, लेकिन अब नगर विकास विभाग ने बुडको (BUIDCO) के जरिए इसे जमीन पर उतारने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
बुडको ने शुरू की तैयारी
बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम (BUIDCO) ने इस पूरी परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के लिए अनुभवी एजेंसियों से आवेदन मांगे हैं. जो भी एजेंसी चुनी जाएगी, उसे तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी. एक बार डीपीआर पास हो जाने के बाद फंड अलॉट होगा और निर्माण कार्य जोर-शोर से शुरू कर दिया जाएगा.
इन घाटों की बदलेगी किस्मत
फिलहाल बक्सर में रामरेखा घाट और सती घाट जैसे कुछ ही घाट विकसित हैं. लेकिन नई योजना में सिद्धनाथ घाट, गोला घाट, मठिया मुहल्ला घाट, रानी घाट और बंगला घाट जैसे प्रमुख स्थलों पर भी पक्की सीढ़ियां और सुंदर पाथवे बनाए जाएंगे. लगभग सवा किलोमीटर की लंबाई में फैला यह रिवर फ्रंट बक्सर नगर परिषद के पूरे गंगा तट को कवर करेगा.
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भीड़ से मिलेगी राहत
इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि त्योहारों और विशेष मौकों पर रामरेखा घाट पर होने वाली भारी भीड़ कम हो जाएगी. जब सभी घाट पाथवे के जरिए एक-दूसरे से जुड़ जाएंगे, तो श्रद्धालु जेल घाट से लेकर अहिरौली घाट तक कहीं भी आसानी से आ-जा सकेंगे. इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे.
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लेखक के बारे में
By Paritosh Shahi
परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.
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