बक्सर में मॉडल स्कूल बना मवेशियों का चारागाह, टूटी बाउंड्री वॉल से छात्रों की सुरक्षा पर सवाल

Edited by Suryakant Kumar
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राजपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित प्लस टू उच्च विद्यालय

Buxar News: बक्सर के राजपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित प्लस टू मॉडल स्कूल की चाहरदीवारी (बाउंड्री वॉल) टूटने से स्कूल कैंपस मवेशियों का चारागाह बन गया है. सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त होने से स्कूल की संपत्ति समेत इसी परिसर में संचालित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की छात्राओं की सुरक्षा पर भी बड़ा खतरा मंडरा रहा है. स्थानीय लोगों द्वारा मना करने पर विवाद किया जाता है, जिससे शिक्षक और छात्र परेशान हैं.

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राजपुर से पंकज कमल की रिपोर्ट :
Buxar News:
बिहार के बक्सर जिले में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के दावों के बीच एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है. शिक्षा विभाग की पहल पर राजपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित प्लस टू उच्च विद्यालय को ‘मॉडल स्कूल’ का दर्जा तो मिल गया, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण अब यह विद्यालय बकरियों और मवेशियों का चारागाह बनता जा रहा है. स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है, जिससे छात्रों की पढ़ाई और स्कूल की सरकारी संपत्ति दोनों पर हर समय खतरा मंडरा रहा है.

बेहतरीन पढ़ाई के बीच असुरक्षित हुआ स्कूल का माहौल

बता दें कि इस मॉडल स्कूल में पहली बार प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से मेधावी छात्रों का चयन किया गया है. स्कूल में दूर-दराज के गांवों से बच्चे अपने उज्जवल भविष्य की उम्मीद लेकर पढ़ने आ रहे हैं. सरकार के तय मानक के अनुसार यहां विषयवार शिक्षक भी मौजूद हैं, जो समय-समय पर बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे रहे हैं. पढ़ाई के स्तर से छात्र और अभिभावक पूरी तरह संतुष्ट हैं, लेकिन स्कूल का बाहरी माहौल अब बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं रह गया है.

चाहरदीवारी टूटी, मना करने पर विवाद करने आते हैं लोग

स्कूल की सबसे बड़ी समस्या इसकी सुरक्षा को लेकर खड़ी हुई है. विद्यालय के पिछले हिस्से की चाहरदीवारी (बाउंड्री वॉल) लंबे समय से टूटी हुई है. इसका फायदा उठाकर आसपास के कुछ लोग अपने मवेशियों और बकरियों को स्कूल कैंपस में चराने के लिए खुला छोड़ देते हैं.

स्कूल के शिक्षकों ने अपनी परेशानी साझा करते हुए बताया कि जब वे स्थानीय लोगों को कैंपस में मवेशी बांधने या चराने से मना करते हैं, तो वे शिक्षकों से ही उलझ जाते हैं और विवाद करने पर उतारू हो जाते हैं. स्कूल की छुट्टी होने के बाद कैंपस की निगरानी करने वाला कोई नहीं होता, जिससे रात के समय स्थिति और ज्यादा खराब हो जाती है.

छात्राओं पर भी खतरा

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि इसी मॉडल स्कूल कैंपस के दूसरे हिस्से में ‘आवासीय कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय’ भी संचालित होता है. बाउंड्री वॉल नहीं होने के कारण असामाजिक तत्वों और लावारिस पशुओं का कस्तूरबा विद्यालय के आसपास हमेशा भटकना लगा रहता है. ऐसे में वहां हॉस्टल में रह कर पढ़ाई कर रही छात्राओं की सुरक्षा पर भी एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है.

प्रधानाध्यापक ने लगाई सुरक्षा की गुहार

इस गंभीर समस्या को लेकर विद्यालय के प्रधानाध्यापक अशोक पाण्डेय ने बताया की स्कूल में पठन-पाठन का माहौल बेहतरीन है और सभी शिक्षक पूरी लगन से बच्चों को पढ़ा रहे हैं. लेकिन चाहरदीवारी का टूटा होना हमारी सबसे बड़ी कमजोरी बन गया है. स्कूल की गरिमा बनाए रखने और बच्चों की सुरक्षा के लिए इस चाहरदीवारी का जल्द से जल्द निर्माण होना बेहद जरूरी है. इसके लिए स्कूल प्रबंधन लगातार उच्च अधिकारियों से मांग कर रहा है.

अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और स्थानीय जिला प्रशासन इस मॉडल स्कूल की सुध कब लेते हैं और यहां बाउंड्री वॉल का निर्माण कब शुरू कराया जाता है.

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Suryakant Kumar

लेखक के बारे में

By Suryakant Kumar

सूर्यकांत कुमार प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर हैं. डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों का अनुभव रखते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल चैनल न्यूज रील्स से की. इसके बाद नेशन दर्पण और खबरिया जंक्शन में कार्य किया, जहां कंटेंट राइटिंग, वीडियो एडिटिंग और वॉयस ओवर से जुड़े विभिन्न कार्यों का अनुभव हासिल किया. उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है. वर्तमान में वे स्थानीय (हाइपरलोकल) खबरों पर काम कर रहे हैं. इसके अलावा खेल और मनोरंजन से जुड़ी खबरों में भी विशेष रुचि रखते हैं.

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