बक्सर में विकास के नाम पर खेल! सरकारी योजना का काम फाइलों में पूरा, ज़मीनी हकीकत जान उड़े होश

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बक्सर -

Buxar News: बक्सर नगर परिषद के वार्ड 22 स्थित सिंगरही पोखरा की खुदाई में अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं. फाइलों में मार्च 2026 में काम पूरा दिखाया गया, जबकि जमीनी स्तर पर कार्य अधूरा पड़ा है. करीब 17 लाख रुपये खर्च होने के बावजूद पोखरे की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं दिखा. स्थानीय लोगों ने मामले की जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है.

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Buxar News: (आशुतोष कुमार सिंह) सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता के दावे अक्सर किए जाते हैं, ज़मीनी हकीकत कुछ और ही काहती है. बक्सर नगर परिषद का एक मामला इन दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है. यहां सिंगरही पोखरा की खुदाई का काम फाइलों में तो पूरा दिखा दिया गया, लेकिन हकीकत में आज भी अधूरा पड़ा है. नगर परिषद द्वारा मार्च 2026 में इस कार्य को पूर्ण घोषित कर दिया गया. जबकि मौके पर सिर्फ दो जगहों पर हल्की खुदाई कर काम खत्म मान लिया गया. इससे साफ है कि कागजी प्रक्रिया पूरी कर राशि निकासी कर ली गई, लेकिन वास्तविक काम अधूरा छोड़ दिया गया.

खर्च 17 लाख 12 हजार 181 रुपये, कार्य अधूरा

नगर परिषद से वार्ड नंबर 22 के सिंगरही पोखरा की मिट्टी खुदाई का कार्य कराने के लिए पूर्व कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा संतोष कुमार केशरी के नाम से 12 जनवरी 2026 को कार्यादेश जारी किया गया था. इसमें सिंगरही पोखरा की खुदाई के लिए प्राक्कलित राशि 9 लाख 1 हजार 70 रुपये दर्शाई गई है. वहीं कार्यस्थल पर इस पोखरे से पानी की निकासी के लिए 8 लाख 11 हजार 111 रुपये खर्च करने का शिलापट्ट लगाया गया है. इस कार्य योजना को निर्गत आदेश के अनुसार एक माह में पूरा कराने का निर्देश दिया गया था. जिसे विभाग ने मार्च में पूरा करा लिया बताया है, जो सवाल खड़े करता है. पोखरे की गहराई भी आसपास के इलाके से मात्र एक से डेढ़ फीट ही है. जिस पोखरे की खुदाई के लिए 9 लाख से अधिक की राशि खर्च की गई और जिसे मार्च में पूरा बताया गया, वह योजना अभी भी अधूरी पड़ी है.

अधिकारियों ने जिम्मेदारी से झाड़ा पल्ला

इस कार्य योजना से जुड़े अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बचते नजर आ रहे. काम कराने वाले जूनियर इंजीनियर भूलन यादव ने योजना से ही पल्ला झाड़ लिया है. उनसे कार्य योजना की जानकारी पूछे जाने पर वे यही कहते हैं कि विभाग जानकारी देगा. वहीं सहायक अभियंता वंदना कुमारी भी इस मामले में कुछ कहने से बचती नजर आईं. उन्होंने किसी भी प्रकार की जानकारी देने से इंकार करते हुए कहा कि इस बारे में वे कुछ नहीं कह सकती हैं. वहीं इस संबंध में कार्यपालक पदाधिकारी कुमार ऋत्विक ने केवल इतनी जानकारी दी कि यह कार्य उनके पूर्व अधिकारी द्वारा कराया गया है, जिसे मार्च में ही पूरा करा लिया गया है. कार्य क्या कराना था तथा क्या कराया गया है, इस सवाल को उन्होंने भी टाल दिया और स्थल पर कार्य के जिम्मेदार इंजीनियरों से जानकारी लेने की बात कही. जबकि कार्य योजना की फाइल नगर परिषद में ही सुरक्षित होती है.

शिलापट्ट और पत्र खोल रहे पोल

नगर परिषद से प्राप्त दस्तावेज और स्थल पर लगा शिलापट्ट खुद इस योजना की सच्चाई बयान कर रहे हैं.
एक ओर कागजों में काम पूरा दिखाया गया है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत अधूरी पड़ी है. योजना के तहत एक माह में काम पूरा करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन कई महीने बाद भी कार्य अधूरा रहना बड़े सवाल खड़े करता है.

जनता के पैसे का बंदरबांट का आरोप

स्थानीय लोगों का आरोप है कि विकास के नाम पर जनता के पैसे का बंदरबांट किया गया है. यह सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि नगर परिषद की कई योजनाओं में गुणवत्ता की अनदेखी और कागजी खानापूर्ति का मामला सामने आ रहा है.

जांच और कार्रवाई की उठी मांग

इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है. लोगों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषी अधिकारियों व कर्मियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके.

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रागिनी शर्मा

लेखक के बारे में

By रागिनी शर्मा

वर्तमान में मैं, रागिनी शर्मा पटना स्थित प्रभात खबर डिजिटल की टीम के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हूं. यहां मैं बिहार के विभिन्न जिलों से जुड़ी अहम खबरों, राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों और ट्रेंडिंग विषयों पर काम कर रही हूं. मेरा उद्देश्य हर खबर को सरल, सटीक और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक न सिर्फ जानकारी प्राप्त करें बल्कि उससे जुड़ाव भी महसूस करें और डिजिटल पत्रकारिता को और अधिक सार्थक बनाया जा सके.

पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही मैंने प्रिंट और डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. अपने कॉलेज के समय में हिंदुस्तान के साथ इंटर्नशिप के दौरान मुझे पहली बार वेब पोर्टल पर खबर लिखने और डिजिटल न्यूज राइटिंग का व्यावहारिक अनुभव मिला. इसी दौरान मैंने न्यूज़ लेखन, हेडलाइन स्ट्रक्चर और डिजिटल स्टोरी प्रेजेंटेशन की बुनियादी समझ विकसित की.

इसके बाद वर्ष 2025 में पत्रकारिता में ग्रेजुएशन पूरा करने के साथ ही मैंने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत की. डिजिटल मीडिया में मेरी पहली भूमिका फर्स्ट बिहार झारखंड के साथ रही, जहाँ मैंने एंकरिंग और ग्राउंड रिपोर्टिंग के माध्यम से बिहार के जमीनी मुद्दों को कवर किया. इस दौरान मैंने राज्य की राजनीति, सामाजिक सरोकारों और आम जनता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग की.

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