कॉलेज एडमिशन से पहले क्यों देखनी चाहिए NIRF रैंकिंग? जानें 5 बड़े कारण

स्टूडेट्स की साकेतिक तस्वीर
NIRF Ranking Importance for Admission: 12वीं या ग्रेजुएशन के बाद सही कॉलेज का चुनाव करना हर स्टूडेंट के करियर का सबसे महत्वपूर्ण फैसला होता है. देश में हजारों कॉलेज और यूनिवर्सिटीज हैं, ऐसे में फर्जी संस्थानों से बचने और सही कॉलेज चुनने के लिए शिक्षा मंत्रालय की एनआईआरएफ (NIRF Ranking ) रैंकिंग सबसे भरोसेमंद जरिया है. आइए जानते हैं एडमिशन लेने से पहले NIRF Ranking चेक करना क्यों जरूरी है.
NIRF Ranking Importance for Admission: एडमिशन सीजन की शुरुआत होते ही टीवी, न्यूज पेपर और सोशल मीडिया पर कॉलेजों के बड़े-बड़े विज्ञापनों की बाढ़ सी आ जाती है. 100% प्लेसमेंट और शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर का दावा करने वाले इन विज्ञापनों के बीच स्टूडेंट अक्सर कंफ्यूज हो जाते हैं. किसी भी प्राइवेट या सरकारी संस्थान के दावों में आने के बजाय आपको केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी NIRF (National Institutional Ranking Framework) रैंकिंग पर भरोसा करना चाहिए.

क्या होती है NIRF रैंकिंग?
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय (MoE) हर साल देश भर के उच्च शिक्षण संस्थानों - जैसे इंजीनियरिंग, मेडिकल, मैनेजमेंट, लॉ और जनरल कॉलेजों का मूल्यांकन करके रैंकिंग जारी करता है. इस रैंकिंग को तय करने के लिए कॉलेजों को 5 मुख्य पैमानों पर परखा जाता है.
- टीचिंग, लर्निंग और रिसोर्सेज (TLR): यह पैमाना देखता है कि कॉलेज में पढ़ाई का स्तर और बुनियादी सुविधाएं कैसी हैं. इसमें देखा जाता है कि संस्थान में कुल कितने स्थायी और अनुभवी फैकल्टी हैं, उनमें से कितने PhD होल्डर हैं और कॉलेज के पास लैब्स, लाइब्रेरी व डिजिटल संसाधनों का कितना बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध है.
- रिसर्च एंड प्रोफेशनल प्रैक्टिस (RP): यह Point कॉलेज की अकादमिक साख और इनोवेशन को दिखाता है. इसमें इस बात की जांच होती है कि कॉलेज के प्रोफेसरों और स्टूडेंटों द्वारा साल भर में कितने रिसर्च पेपर अंतरराष्ट्रीय जनरल्स में पब्लिश हुए हैं, कितने पेटेंट (Patents) फाइल किए गए हैं और उन्हें रिसर्च के लिए कितनी फंडिंग मिली है.
- ग्रेजुएशन आउटकम (GO): किसी भी स्टूडेंट के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण पैमाना है, जो सीधे तौर पर प्लेसमेंट और रिजल्ट्स से जुड़ा है. इसमें देखा जाता है कि हर साल कितने प्रतिशत स्टूडेंट्स समय पर अपनी डिग्री पूरी कर पाते हैं, कैंपस सेलेक्शन में उन्हें औसतन कितना सैलरी पैकेज मिलता है और कितने स्टूडेंट्स उच्च शिक्षा (Higher Education) के लिए चुने जाते हैं.
- आउटरीच एंड इंक्लूसिविटी (OI): यह पैमाना कॉलेज के सामाजिक ताने-बाने और विविधता (Diversity) को मापता है. इसमें यह देखा जाता है कि कॉलेज में दूसरे राज्यों और विदेशों से कितने स्टूडेंट्स पढ़ने आते हैं, फीमेल स्टूडेंट व फीमेल प्रोफेसर्स की कितनी भागीदारी है. आर्थिक रूप से कमजोर या दिव्यांग (EWS/PWD) स्टूडेंट्स के लिए क्या विशेष सुविधाएं उपलब्ध हैं.
- पर्सप्शन (PR): यह पैमाना दिखाता है कि इंडस्ट्री और कॉर्पोरेट जगत में उस संस्थान की क्या रेप्यूटेशन है. इसके तहत देश-दुनिया के बड़े एम्प्लॉयर्स (कंपनियों के रिक्रूटर्स), शिक्षाविदों और आम जनता से फीडबैक लिया जाता है कि वे उस कॉलेज की डिग्री को कितनी वैल्यू देते हैं.
आप नीचे दिए लिंक पर क्लिक कर पैरामीटर्स के बारे में डिटेल्ड इंफार्मेशन ले सकते हैं.
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NIRF रैंकिंग देखना क्यों है बेहद ज़रूरी?
- असंगठित और फर्जी कॉलेजों से बचाव: एनआईआरएफ केवल मान्यता प्राप्त और प्रामाणिक संस्थानों को ही रैंकिंग सूची में शामिल करता है. इससे स्टूडेंट फर्जी या बिना मान्यता वाले संस्थानों के जाल में फंसने से बच जाते हैं.
- असली प्लेसमेंट रिकॉर्ड की जानकारी: अक्सर प्राइवेट कॉलेज प्लेसमेंट के झूठे आंकड़े दिखाते हैं, लेकिन NIRF में जमा किया गया प्लेसमेंट और पैकेज का डेटा पूरी तरह सत्यापित होता है.
- फैकल्टी और पढ़ाई का सही स्तर: यह रैंकिंग आपको बताती है कि जिस कॉलेज में आप प्रवेश ले रहे हैं, वहां पीएचडी (PhD) होल्डर और अनुभवी प्रोफेसर्स मौजूद हैं या नहीं.
- उच्च शिक्षा व एजुकेशन लोन में मदद: टॉप NIRF रैंक वाले कॉलेजों में पढ़ाई करने से भविष्य में स्कॉलरशिप, फॉरेन यूनिवर्सिटी एडमिशन और बैंकों से एजुकेशन लोन आसानी से मिल जाता है.
एडमिशन लेते समय स्टूडेंट क्या करें?
जब भी आप किसी BTech, MBA, BA या BSc प्रोग्राम में एडमिशन का मन बनाएं, तो सबसे पहले NIRF के ऑफिशियल वेबसाइट nirfindia.org पर जाकर संबंधित कॉलेज की ऑल इंडिया ओवरऑल और सब्जेक्ट-वाइज रैंक जरूर चेक कर लें.
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लेखक के बारे में
By ओम प्रकाश
ओम प्रकाश (OP) पिछले 2 वर्षों से अधिक समय से डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. इन्होंने जनसंचार एवं पत्रकारिता में मास्टर्स किया है. इनकी पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रभात खबर (प्रिंट) पटना से हुई. इसके बाद इन्होंने दूरदर्शन पटना और कशिश न्यूज के साथ जुड़ कर प्रैक्टिकल हैंड्स ऑन एक्सपीरियंस हासिल किया. ये आकाशवाणी पटना के युवाओं के लिए समर्पित कार्यक्रम 'युवा वाणी' में भी कार्य कर चुके हैं. वर्तमान में OP प्रभात खबर डिजिटल के एजुकेशन बीट में कंटेंट राइटिंग का काम कर रहे हैं. इन्हें एजुकेशन और करियर से संबंधित गाइडेंस और खबरें आसान भाषा में स्टूडेंट्स तक पहुंचाना पसंद है.
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