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जिले के शिक्षा विभाग में राजकीय बुनियादी विद्यालय में फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति के मामले में जल्द लेगा निर्णय

Updated at : 14 Oct 2025 10:34 PM (IST)
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जिले के शिक्षा विभाग में राजकीय बुनियादी विद्यालय में फर्जी शिक्षकों की नियुक्ति के मामले में जल्द लेगा निर्णय

जिला शिक्षा कार्यालय के भ्रष्टाचार की परतें धीरे-धीरे खुलते जा रही है. परंतु इसका अंत कहीं दिखाई नहीं दे रहा है.

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बक्सर. जिला शिक्षा कार्यालय के भ्रष्टाचार की परतें धीरे-धीरे खुलते जा रही है. परंतु इसका अंत कहीं दिखाई नहीं दे रहा है. इसके लिए अधिकारियों को भी दो चार होना पड़ता है. पिछले दिनों विक्रमादित्या उर्फ विक्रमा के मामले में शिक्षा विभाग को आए पत्र ने और कई नई मामलों को सामने रख दिया है. मामले में विक्रमादित्य को वेतन भुगतान का सख्त नोटिस जारी हुआ है. जिसके बाद बुनियादी विद्यालय सरेंजा व उनवांस में लगभग 27 फर्जी शिक्षकों की बहाली की मामले सामने आई है. जिसमें निगरानी विभाग ने मामले की जांच की थी. इसके बाद प्राथमिकी दर्ज हुई थी. फर्जी बहाली में से कुछ अभी भी शिक्षा कार्यालय में जमे हुए है. वहीं यह भी सामने आया है कि जिला शिक्षा कार्यालय में पदस्थापित प्रधान लिपिक अनिल राय की पत्नी सहित अन्य सगे संबंधी भी उक्त प्राथमिकी में नामजद है. जिससे मामले में विभाग के पक्ष को रखने में संदेह पैदा हो गया है. यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि हाइकोर्ट सहित अन्य जगहों पर चल रहे वादों में प्रधान लिपिक क्या विभाग के पक्षों को रखने में अपनी निष्पक्षता दिखायेंगे या अपने सगे संबंधियों के बचाव में अपनी भूमिका निभायेंगे. वहीं दूसरी ओर इस मामले में नया मोड़ तब आया है जब भोजपुर जिला के जगदीशपुर गांव निवासी मनोज कुमार पटेल ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव, निगरानी विभाग के एसपी, क्षेत्रिय शिक्षा उपनिदेशक को पत्र लिखकर इस पूरे मामले की जानकारी दी है. भेजे पत्र में प्रधान लिपिक पर जालसाजी गिरोह का संचालन करने का आरोप लगाया गया है. शिक्षा विभाग के सूत्रों की मानें तो प्रधान लिपिक अनिल राय का तथाकथिक शिक्षा विभाग में सक्रिय गिरोह से बेहतर संबंध है. जिसके कारण इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि बड़े पैमाने पर सूचनाओं का अदान प्रदान इनके माध्यम से होता होगा. इस संबंध में जिला शिक्षा पदाधिकारी संदीप रंजन ने बताया कि विभाग के पक्ष रखने में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी. इसको लेकर पूर्व में ही निगरानी की जांच कराई गई है. निगरानी के जांच रिपोर्ट के आधार पर कारवायी की जायेगी. जिसमें नियुक्ति को फर्जी करार दिया गया है. वेतन भुगतान नहीं किया जायेगा. वहीं मामले को लेकर उच्च न्यायालय में विभाग जल्द मामला फाइल करेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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AMLESH PRASAD

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By AMLESH PRASAD

AMLESH PRASAD is a contributor at Prabhat Khabar.

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