सपने में भी नहीं सोचा था कि बेटा मंत्री होगा

Published at :21 Nov 2015 3:22 AM (IST)
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सपने में भी नहीं सोचा था कि बेटा मंत्री होगा

बक्सर : अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री संतोष निराला की प्राथमिक शिक्षा प्राथमिक मध्य विद्यालय, मिल्की जिसके शिक्षा समिति के अध्यक्ष भी संतोष निराला रह चुके हैं, वहां भी काफी उत्साह देखा गया. उनके मंत्री बनने पर विद्यालय के शिक्षकों व छात्रों ने जम कर अबीर-गुलाल और मिठाइयां बांट कर खुशियां मनायी. स्कूल की प्रधानाध्यापिका कुमारी […]

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बक्सर : अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री संतोष निराला की प्राथमिक शिक्षा प्राथमिक मध्य विद्यालय, मिल्की जिसके शिक्षा समिति के अध्यक्ष भी संतोष निराला रह चुके हैं, वहां भी काफी उत्साह देखा गया. उनके मंत्री बनने पर विद्यालय के शिक्षकों व छात्रों ने जम कर अबीर-गुलाल और मिठाइयां बांट कर खुशियां मनायी.

स्कूल की प्रधानाध्यापिका कुमारी रीता चौबे समेत स्कूल के शिक्षक मनोज कुमार सिंह, डॉ सुरेंद्र कुमार, राजकुमार रमन,रेणू कुमारी, प्रीति सिंह व शिक्षिका मीरा सिंह ने स्कूल में मिल कर उत्सवी माहौल बना दिया. स्कूल के शिक्षक सह प्राथमिक शिक्षक संघ गोपगुट के जिलाध्यक्ष डॉ सुरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि संतोष निराला को विरासत में सामाजिक और राजनीतिक चेतना मिली है. इनके पिता की भूमिका राजनीति में पहले से रही है.

विद्यालय की स्थापना में भी इनके पिता का योगदान रहा है. इनके मंत्री बनने से स्कूल के शिक्षकों के साथ-साथ बच्चों की भी बड़ी जिम्मेदारी बन आयी है. बता दें कि मध्य विद्यालय मिल्की से शुरुआती शिक्षा लेने के बाद चौसा के महर्षि च्यवन कॉलेज से स्नातक और फिर बक्सर के केटी लॉ कॉलेज से एलएलबी की परीक्षा पास करने के बाद संतोष निराला सक्रिय राजनीतिक में आये. इनके पिता रामलाल राम जो आज सेवानिवृत्त शिक्षक हैं, जो विधायक का चुनाव भी लड़े हैं.

तीन भाइयों में मंत्री संतोष कुमार निराला सबसे बड़े हैं. इनके दो भाई आनंद राम और अशोक राम मिल्की गांव में ही रह कर खेतीबारी का काम देखते हैं. इन दोनों भाइयों को हालांकि दूर-दूर तक राजनीति से ज्यादा लगाव नहीं रहा] मगर किसानी से इन दोनों भाइयों को लगाव रहा.

संतोष निराला के मंत्री बनने के बाद सबसे ज्यादा खुशी इनके पिता व सेवानिवृत्त शिक्षक रामलाल राम को हुई है. कहते हैं जो मुकाम मेरे बेटे ने पा लिया है उसका सपना मैंने कभी नहीं देखा था. उन्होंने कहा कि जनता की सेवा को सर्वोपरि मान कर क्षेत्र के विकास में काम करना उनके बेटे को पसंद है.

जानकारी हो कि भाजपा के निकटतम प्रतिद्वंदी विश्वनाथ राम को 32 हजार 539 वोटों के बड़े अंतर से पराजित कर निराला विधायक बने हैं़ संतोष कुमार निराला जदयू में जाने से पहले बहुजन समाज पार्टी में वर्षों से सक्रिय रहे और एक बार बसपा से चुनावी मैदान में भी दांव आजमाया था, मगर जदयू की श्याम प्यारी देवी से पराजय झेलनी पड़ी थी.

दूसरी बार बसपा ने प्रत्याशी बदल दिया, जिससे संतोष निराला को झटका लगा और निर्दलीय प्रत्याशी बनकर मैदान में कूद गये. इस चुनाव में बसपा से उम्मीदवार बने छेदीलाल राम के हाथों उन्हें पराजय झेलनी पड़ी. इस पराजय के बाद संतोष निराला ने बसपा का साथ छोड़ दिया और जदयू का दामन थाम लिया और फिर 2010 में जदयू के टिकट पर पहली बार विधायक बन गये.

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