आधार सिस्टम में सेंध, भोजपुर में हाई-टेक साइबर गैंग का भंडाफोड़, क्लोन फिंगरप्रिंट के साथ दो गिरफ्तार

Published by :Abhinandan Pandey
Published at :27 Apr 2026 9:57 PM (IST)
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सांकेतिक तस्वीर

Bihar Cyber Crime: बिहार के भोजपुर में पुलिस ने एक हाई-टेक साइबर गैंग का भंडाफोड़ किया है. जो आधार सिस्टम की सिक्योरिटी तोड़कर अवैध नामांकन और सुधार कर रहा था. इस मामले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है.

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Bihar Cyber Crime: भोजपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आधार सिस्टम की सुरक्षा भेदने वाले साइबर गैंग का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने गैंग में शामिल दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पकड़े गए आरोपियों के पास से क्लोन फिंगरप्रिंट, आईरिस स्कैनर और कई बायोमेट्रिक डिवाइस मिले हैं. जिससे साफ हो गया कि यह कोई साधारण धोखाधड़ी नहीं, बल्कि एक हाई-टेक साइबर ऑपरेशन था.

कैसे हुआ खुलासा ?

इस साइबर गैंग का भेद तब खुला, जब 25 अप्रैल को आरा के अधिकृत आधार केंद्र के संचालक धीरज कुमार महतो की आईडी और बायोमेट्रिक के दुरुपयोग की शिकायत मिली. जिसके बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कांड संख्या 30/26 केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी.

पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी ऑपरेटर की डिजिटल पहचान का इस्तेमाल कर बिहार में अवैध आधार नामांकन और संशोधन कर रहे थे. जांच और विशेषज्ञों के अनुसार अपराधियों ने तीन स्तरीय सुरक्षा को तोड़ते हुए (ऑपरेटर लॉगिन क्रेडेंशियल हासिल करना, क्लोन फिंगरप्रिंट बनाना और सॉफ्टवेयर प्रोटोकॉल को बाईपास करना) इस ऑपरेशन को अंजाम दिया. फॉरेंसिक विशेषज्ञों के मुताबिक यह एक ‘हाई-स्किल्ड ऑपरेशन’ था.

क्या है खतरा?

इस तरह की साइबर ठगी से फर्जी पहचान के जरिए बैंक फ्रॉड, सरकारी योजनाओं में घोटाला, सिम कार्ड व डिजिटल वॉलेट दुरुपयोग जैसे गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के साइबर फ्रॉड नेशनल सिक्योरिटी के लिए बड़ी चुनौती है.

दरभंगा और पीरो से हुई गिरफ्तारियों ने इस साइबर गिरोह का एक हिस्सा उजागर किया है, लेकिन पुलिस के सामने पूरे गैंग को पकड़ना चुनौती है.

विशेषज्ञों ने क्या कहा?

विशेषज्ञों ने इस तरह के साइबर क्राइम को रोकने के लिए, आधार सिस्टम में MFA अनिवार्य करने, बायोमेट्रिक में लाइवनेस डिटेक्शन जोड़ने, संदिग्ध लॉगिन पर तत्काल अलर्ट और आधार केंद्रों की नियमित ऑडिट करने की आवश्यकता बताई है.

भोजपुर का यह मामला, डिजिटल पहचान सुरक्षा के लिए गंभीर चेतावनी भी है. प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन इस तरह के साइबर अपराध और नहीं हो इसके लिए तकनीकी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर कड़े कदम उठाने की जरूरत है.

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लेखक के बारे में

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अभिनंदन पांडेय डिजिटल माध्यम में पिछले 2 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर तक का मुकाम तय किए हैं. अभी डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास करते हैं. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखते हैं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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