79 लाख की लागत से बने तीन पार्क देखरेख के अभाव में बन गये कबाड़

Published at :22 Jun 2015 8:24 AM (IST)
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79 लाख की लागत से बने तीन पार्क देखरेख के अभाव में बन गये कबाड़

अनदेखी. पार्क में बच्चों के लिए लगाये गये सामान एक साल में ही हो गये खराब बक्सर : नया बाजार के तीन वार्डो में तीन वर्षो में तीन पार्क बनें. इनमें से दो चिल्ड्रेन पार्क के नाम से हैं. जबकि तीसरा सामान्य लोगों के लिए बनाया गया है, लेकिन लाखों रुपये की लागत से बने […]

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अनदेखी. पार्क में बच्चों के लिए लगाये गये सामान एक साल में ही हो गये खराब
बक्सर : नया बाजार के तीन वार्डो में तीन वर्षो में तीन पार्क बनें. इनमें से दो चिल्ड्रेन पार्क के नाम से हैं. जबकि तीसरा सामान्य लोगों के लिए बनाया गया है, लेकिन लाखों रुपये की लागत से बने ये पार्क रख-रखाव के अभाव में अब बदहाली की स्थिति में हैं. कभी इन पार्को में लोग सुबह-शाम टहलने के लिए आते थे.
चारों तरफ हरियाली रहती थी. पार्क के बीच में वाटर फाउंटेन रहने से पार्क की सुंदरता और बढ़ जाती थी. शाम में लाइट रहने से आस-पास के लोग देर शाम तक गरमी के मौसम में पार्क में ही बैठे रहते थे, लेकिन आज यहां न तो हरियाली है और न ही पार्क सुंदरता बढ़ाने के लिए वाटर फाउंटेन काम करता है.
पार्को में लगे झूले, फिसलन समेत अन्य बच्चों के मस्ती करनेवाली वस्तुएं पूरी तरह टूट चुकी हैं. लोगों को बैठने के लिए बनी कुरसियां भी टूट-फूट चुकी हैं. अब लोग यहां नहीं आते हैं और न ही बच्चे कभी खेलने के लिए इन पार्को में पहुंचते हैं.
पार्क का झुला, कुरसी सब गायब
वार्ड नंबर सात में वर्ष 2011 में चिल्ड्रेन पार्क बनाया गया था. पार्क का उद्घाटन जल संसाधन विभाग के प्रभारी मंत्री विजय कुमार चौधरी ने किया था. तब तत्कालीन जिलाधिकारी अजय यादव और डीडीसी कौशलेंद्र पाठक थे. पार्क को 31 लाख 62 हजार 238 रुपये की लागत से बनाया गया था. पार्क में झूला, कुरसी, फिसलन समेत अन्य चीजों को बच्चों के खेल के लिए लगाया गया था. लोग रात में भी आकर पार्क में बैठ सके. इसके लिए पार्क में लाइट की व्यवस्था थी, लेकिन फिलहाल कुछ नहीं है. पार्क बनने के एक साल बाद ही सब कुछ खराब और नष्ट हो गया.
नहीं लगाया गया कोई गार्ड
चिल्ड्रेन पार्क की रखवाली के लिए गार्ड की नियुक्ति करना था, जिसके जिम्मे पार्क में लगे फूलों को पटवन करना और असामाजिक तत्वों से बचाना था, लेकिन दोनों पार्को में कोई भी गार्ड नहीं रखा गया. जबकि यहां गार्ड रूम बनाया गया है. फिलहाल, यहां गार्ड रूम भी टूट-फूट रहा है.
लोगों को भी करनी होगी पहल
जीवन को खुशहाल और स्वच्छ बनाने के लिए टहलना बहुत जरूरी है. इस लिए पार्को का होना जरूरी है. शहर में काफी सघन जगह होने के कारण पार्क जैसी व्यवस्था शहर के अंदर हो पाना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में यदि कहीं पार्क का निर्माण होता है, तो उसकी रख रखाव की जिम्मा केवल प्रशासन के लोगों पर ही नहीं रहना चाहिए, बल्कि स्थानीय आम लोगों को भी इसे बचाने में अपनी भूमिका निभानी चाहिए.
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