सात माह में 57 यात्रियों की मौत

Published at :18 Aug 2013 1:05 AM (IST)
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सात माह में 57 यात्रियों की मौत

बक्सर : दानापुर रेल मंडल के रघुनाथपुर–बक्सर चौसा रेलखंड पिछले सात माह में 57 मौतों का गवाह बन चुका है. बड़ी बात इन शवों की शिनाख्त नहीं हो पाना है. रेलवे विभाग में असुविधाओं के कारण अधिकतर शवों की शिनाख्त नहीं हो पाती है. जनवरी से अगस्त 2013 के बीच रेल हादसों में कुल 57 […]

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बक्सर : दानापुर रेल मंडल के रघुनाथपुरबक्सर चौसा रेलखंड पिछले सात माह में 57 मौतों का गवाह बन चुका है. बड़ी बात इन शवों की शिनाख्त नहीं हो पाना है. रेलवे विभाग में असुविधाओं के कारण अधिकतर शवों की शिनाख्त नहीं हो पाती है.

जनवरी से अगस्त 2013 के बीच रेल हादसों में कुल 57 लोगों की मौतें हुई हैं, जिनमें अब तक मात्र 27 शवों की शिनाख्त हो पायी. वहीं, 30 शवों का अंतिम संस्कार लावारिस के रूप में की गयी, जिनमें तीन महिलाएं 27 पुरुषों के शव शामिल हैं. वहीं, इन हादसों में जख्मी हुए यात्रियों की जान बचाने के लिए असुविधाओं की मार ङोल रहे रेलवे अस्पताल के भरोसे रहना भी अपने आप से धोखा देने के बराबर है.

* शवों के लिए नहीं है एसी रूम

हादसों के शिकार हुए शवों को अक्सर रेलवे स्टेशन पर लावारिस रूप में पड़ा देखा जा सकता है. शवों की बदबू से प्लेटफॉर्म पर ठहर पाना यात्रियों के लिए मुश्किल हो जाता है. स्टेशन पर शवों को रखने के लिए एक भी वातानुकूलित कमरा नहीं है, जिससे पहचान के लिए शवों को सही ढंग से रखा जा सके.

* नहीं है पर्याप्त स्ट्रेचर

यदि रेल हादसे में यात्री जख्मी हो जाये, तो अस्पताल में पर्याप्त स्ट्रेचर तक नहीं है, जिससे कर्मियों को बचाव कार्य में काफी परेशानी होती है. इतने बड़े रेलखंड के मुख्यालय के अस्पताल में मात्र दो स्ट्रेचर हैं. पिछले दिनों हादसे में जख्मी युवक काबचाव कार्य करीब आधा घंटा विलंब से शुरू हुआ.

* रैंप की नहीं है व्यवस्था

जीआरपी थानाध्यक्ष हरेंद्र सिंह ने बताया कि जख्मी को एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म तक ले जाने के लिए रैंप की व्यवस्था नहीं होने के कारण मजबूरन खतरा मोल लेकर ट्रैक पार कर आवागमन करना पड़ता है. ऐसे में बचाव कार्य में विलंब तथा अप्रिय घटना होने की आशंका बनी रहती है.

* शवों के पोस्टमार्टम के बाद उनकी शिनाख्त के लिए 72 घंटे तक रखा जाता है. शिनाख्त नहीं होने की स्थिति में फोटो खींच कर शवों का अंतिम संस्कार कर दिया जाता है. साथ ही शव की एक तस्वीर पुलिस को भेज दी जाती है. उसके बाद उस तस्वीर को अखबार में प्रकाशित कर शवों की शिनाख्त कराने की कोशिश की जाती है.

हरेंद्र सिंह, जीआरपी थानाध्यक्ष

* चैरिटेबल की ओर से स्टेशन पर एक व्हील चेयर उपलब्ध करायी गयी है.

महेंद्र सिंह, स्टेशन मास्टर

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