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स्पीडी ट्रायल से होता है दुष्कर्म के मामलों में निष्पादन, सख्त सजा का है प्रावधान

Updated at : 04 Dec 2019 7:59 AM (IST)
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स्पीडी ट्रायल से होता है दुष्कर्म के मामलों में निष्पादन, सख्त सजा का है प्रावधान

विष्णुदत्त द्विवेदी, बक्सर कोर्ट : हालिया दिनों में दुष्कर्म संबंधित अपराधों पर एक नजर डाली जाये तो होश उड़ा देने वाले आंकड़े नजर आते हैं. एडीजे प्रथम के न्यायालय में लगभग 200 मामले वर्तमान में लंबित हैं जो पूरी तरह से नाबालिगों के साथ छेड़छाड़ या दुष्कर्म संबंधित हैं. इसके अलावा अन्य न्यायालयों में भी […]

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विष्णुदत्त द्विवेदी, बक्सर कोर्ट : हालिया दिनों में दुष्कर्म संबंधित अपराधों पर एक नजर डाली जाये तो होश उड़ा देने वाले आंकड़े नजर आते हैं. एडीजे प्रथम के न्यायालय में लगभग 200 मामले वर्तमान में लंबित हैं जो पूरी तरह से नाबालिगों के साथ छेड़छाड़ या दुष्कर्म संबंधित हैं. इसके अलावा अन्य न्यायालयों में भी कई मामले सुनवाई में लंबित हैं .अपराधों की प्रकृति एवं पीड़ितों के उम्र पर नजर डालने पर दम तोड़ रहे समाज एवं गिरती मानसिकता का चित्र नजर आता है.

वर्ष 2014 में पति एवं सगे बहनोई को 7 वर्षों का कठोर कारावास की सजा सुनाई गयी, जहां सहार थाना के एक बारी गांव की रहने वाली पत्नी ने पति एवं उसके बहनोई पर बच्चा जनने के लिए किये बलपूर्वक संबंध स्थापित करने के लिए बाध्य किया था. राजपुर थाना कांड संख्या 238 सन 2013 में अभियुक्त अनुज पासवान को 10 वर्षों के कठोर कारावास की सजा सुनाई गयी, जिसने 9 वर्षीया बच्ची के साथ दुष्कर्म किया था .महिला थाना कांड संख्या 4 सन 2015 में विक्की वर्मा को 10 वर्षों की सजा सुनाई गयी .
बरहमपुर थाना कांड संख्या 232 सन 2016 के अभियुक्त अनूप सिंह को कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई गयी ,अभियुक्त ने कुआंवन गांव में लगभग 13 वर्षीय किशोरी को अपने हवस का शिकार बनाने के बाद पत्थर पर सर लड़ा कर तथा गला दबाकर मार डाला था. उक्त फैसला 6 नवंबर 2017 को सुनाया गया .लगभग 1 वर्ष के अंदर किए गए फैसले के बाद ऐसे अपराधों के रिकॉर्ड में कोई कमी देखने को नहीं मिला तथा लगातार दुष्कर्म के मामले दर्ज होते रहे .
आरोपितों को मिल चुकी है आजीवन कारावास की सजा
डुमराव निवासी अर्जुन कुमार उर्फ प्रिंस को थाना कांड संख्या 396 /2015 में 10 वर्षों के कारावास की सजा, महिला थाना कांड संख्या 35 /2016 में केशवपुर के रमेश यादव को 5 वर्षों के कारावास, सिमरी थाना कांड संख्या 228 /2014 में नचाप के मनीष केसरी को 10 वर्षों का कारावास ,सिकरौल थाना कांड संख्या 40/ 2017 में भदार का रहने वाला नादा सिंह को आजीवन कारावास की सजा 24 जनवरी 2019 को सुनाई गयी. सिकरौल थाना कांड संख्या तीन 03/2018 में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम ने 28 फरवरी 2019 को शामिल चार अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई .
उक्त मामला गैंगरेप से संबंधित था जिसमें बसंतपुर के रहने वाला मुनि पांडे, विजय पांडे, मंटू पांडे एवं श्याम बाबू पांडे को कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई. बरहमपुर थाना कांड संख्या 117 सन 2017 मैं अभियुक्त अजय यादव को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा 17 सितंबर 2019 को सुनाई गयी.
दिये गये फैसलों पर एक नजर डालने पर यह साफ-साफ दिखता है कि कई न्यायिक प्रक्रियाओं में आने वाली बाधाओं के बावजूद भी न्यायालय द्वारा अमूमन 1 वर्ष से डेढ़ वर्ष के भीतर ऐसे अपराधों के मामलों को स्पीडी ट्रायल के तहत निष्पादित कर दिया जाता है ,बावजूद इसके ऐसे अपराध रुकने के बजाय बढ़ते जा रहे हैं जिसका निदान खोजना समाज के लोगों का अब दायित्व बनता है.
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