सेविकाओं को दिया गया रोटा वायरस का प्रशिक्षण
Updated at : 03 Jul 2019 6:19 AM (IST)
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डुमरांव : रोटा वायरस वैक्सीन को तीन जुलाई से नियमित प्रतिरक्षण अभियान में शामिल कर लिया जायेगा. यह वैक्सीन रोटा वायरस के कारण बच्चों में होनेवाले गंभीर दस्त से सुरक्षा प्रदान करेगा. बच्चों को यह टीका जन्म के 6वें सप्ताह से देना शुरू किया जायेगा. इससे बच्चों में रोटा वायरस की वजह से होनेवाली दस्त […]
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डुमरांव : रोटा वायरस वैक्सीन को तीन जुलाई से नियमित प्रतिरक्षण अभियान में शामिल कर लिया जायेगा. यह वैक्सीन रोटा वायरस के कारण बच्चों में होनेवाले गंभीर दस्त से सुरक्षा प्रदान करेगा. बच्चों को यह टीका जन्म के 6वें सप्ताह से देना शुरू किया जायेगा. इससे बच्चों में रोटा वायरस की वजह से होनेवाली दस्त में कमी लायी जा सकेगी.
मंगलवार को रोटा वायरस वैक्सीन का प्रशिक्षण आंगनबाड़ी सेविकाओं को दिया गया. प्रशिक्षण दे रहे पीएचसी प्रभारी डॉ आरबी प्रसाद ने बताया कि रोटा वायरस एक अत्यंत संक्रामक वायरस है, जो बच्चों में होनेवाले 40 फीसद डायरिया के लिए जिम्मेदार है.
रोटा वायरस संक्रमण की शुरुआत हल्के दस्त से होती है, जो आगे जाकर गंभीर रूप ले सकती है. पर्याप्त इलाज न मिलने के कारण शरीर में पानी व नमक की कमी हो सकती है तथा कुछ मामलों में बच्चे की मृत्यु भी हो सकती है. रोटा वायरस संक्रमण में गंभीर दस्त के साथ-साथ बुखार और उल्टियां भी होती हैं और कभी-कभी पेट में दर्द भी होता है.
दस्त एवं अन्य लक्षण लगभग तीन से सात दिनों तक रहते हैं. इस गंभीर रोग की रोकथाम में जिंक और ओआरएस के साथ ही रोटा वायरस वैक्सीन काफी प्रभावी होगा. शिशुओं को यह वैक्सीन तीन चरणों में दिया जायेगा. पहला टीका जन्म के छठे सप्ताह पर, दूसरा टीका 10वें सप्ताह पर एवं आखिरी टीका 14वें सप्ताह पर दिया जायेगा.
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