BRABU: गलत रजिस्ट्रेशन नंबर से जारी हो गया स्नातक का अंकपत्र, सुधार के लिए भटक रहे विद्यार्थी
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 20 Dec 2022 8:50 AM
BRABU: बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में स्नातक सत्र 2018-21 के तृतीय वर्ष के एक हजार से अधिक विद्यार्थियों का अंकपत्र गलत रजिस्ट्रेशन नंबर पर जारी हो गया है. अब वे सुधार के लिए कॉलेज से विश्वविद्यालय तक चक्कर लगा रहे हैं.
BRABU: बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में स्नातक सत्र 2018-21 के तृतीय वर्ष के एक हजार से अधिक विद्यार्थियों का अंकपत्र गलत रजिस्ट्रेशन नंबर पर जारी हो गया है. अब वे सुधार के लिए कॉलेज से विश्वविद्यालय तक चक्कर लगा रहे हैं. इसमें पांच सौ से अधिक छात्राएं हैं, जिनका नाम रजिस्ट्रेशन नंबर में गड़बड़ी के कारण मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के पोर्टल पर अपलोड नहीं हो सका है. विश्वविद्यालय की ओर से इसी सत्र से यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर लागू किया है. इसमें वर्ष, विषय व कॉलेज की पहचान के लिए अलग-अलग न्यूमेरिकल व अल्फाबेटिकल कोड बनाया गया है. कई छात्र-छात्राओं के मार्कशीट पर रजिस्ट्रेशन नंबर में अल्फाबेटिकल कोड गायब हो गया है.
विवि पहुंचे सैकड़ों छात्र
सोमवार को सैंकड़ों छात्राएं पोर्टल पर अपना नाम नहीं होने के बाद विश्वविद्यालय पहुंची थीं. परीक्षा विभाग से लेकर डीएसडब्ल्यू कार्यालय तक वे सुधार के लिए दौड़ते रहे. विद्यार्थियों ने बताया कि उनके पंजीयन में अल्फा न्यूमेरिक नंबर दिया गया था. जब परिणाम आया, तो उसमें से न्यूमेरिक संख्या को रखा गया और अल्फाबेटिकल वर्ड गायब कर दिया गया. छात्राओं का कहना था कि इसी के कारण कन्या उत्थान के लाभ के लिए पोर्टल पर नाम अपलोड नहीं हो सका है. प्रथम और द्वितीय वर्ष के अंकपत्र में भी यही गड़बड़ी है. प्रथम वर्ष में भी सुधार के लिए आवेदन दिया थे, लेकिन सुधार नहीं हुआ. इसके बाद द्वितीय और तृतीय वर्ष में भी यही गलती सामने आयी, जबकि परीक्षा फॉर्म में सही रजिस्ट्रेशन नंबर ही भरा था.
डुप्लीकेट अंकपत्र के कारण 100 छात्राओं का नाम हटा
विश्वविद्यालय में सत्र 2018-21 में उत्तीर्ण छात्राओं का नाम मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के लिए अपलोड किया जा रहा है. डीएसडब्ल्यू कार्यालय के अनुसार 500 से अधिक छात्राओं के पंजीयन और अंकपत्र में रजिस्ट्रेशन नंबर में अंतर है. वहीं, सौ से अधिक छात्राओं के नाम से दो या दो से अधिक अंकपत्र जारी हो गया है. इसके चलते इनका नाम पोर्टल पर अपलोड नहीं किया गया है. सभी अंकपत्र का सीरियल नंबर तो अलग है, जबकि उनमें रजिस्ट्रेशन नंबर, काॅलेज का नाम और कोर्स की जानकारी एक ही है. विश्वविद्यालय को इसकी जानकारी ही नहीं है कि छात्रा के पास वर्तमान में किस नंबर पर जारी अंकपत्र उपलब्ध है. परीक्षा विभाग से कहा जा रहा है कि अंकपत्र भेजने में विलंब होने पर छात्रा ने दोबारा आवेदन कर दिया होगा.
कॉलेज में करें आवेदनः परीक्षा नियंत्रक
मामले में परीक्षा नियंत्रकडॉ संजय कुमार ने कहा कि अंकपत्र और पंजीयन संख्या में अलग-अलग संख्या दर्ज होने के संबंध में शिकायत मिली है. परीक्षा विभाग से इस तरह की शिकायतों का निस्तारण प्राथमिकता से किया जायेगा, ताकि विद्यार्थियों को परेशानी न हो. इसके लिए उन्हें विश्वविद्यालय का चक्कर नहीं लगाना होगा. वे सीधे अपने काॅलेज के माध्यम से आवेदन करें. एक साथ सभी की समस्याओं का निष्पादन किया जायेगा.
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