मेलों को नजरअंदाज करने पर बढ़ा आक्रोश

राज्य सरकार द्वारा केवल पांच जिलों के धार्मिक आयोजनों और मेलों के बेहतर संचालन के लिए राशि आवंटित किए जाने के निर्णय पर नालंदा में असंतोष उभर कर सामने आया है.
राजगीर. राज्य सरकार द्वारा केवल पांच जिलों के धार्मिक आयोजनों और मेलों के बेहतर संचालन के लिए राशि आवंटित किए जाने के निर्णय पर नालंदा में असंतोष उभर कर सामने आया है. खासकर राजगीर का ऐतिहासिक धार्मिक मलमास मेला, बड़गांव-औंगारी छठ मेला तथा मकर मेला को इस सूची से बाहर रखने पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और बुद्धिजीवियों ने नाराजगी जताई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि राजगीर का राजकीय मलमास मेला देश का इकलौता पुरुषोत्तम मास मेला है. इसकी धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता अत्यंत व्यापक है. मान्यता है कि इस दौरान एक महीने तक 33 कोटि देवी-देवताओं का प्रवास होता है. इसमें देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं. इसके बावजूद इस महत्वपूर्ण मेले को सरकार के उस सूची से अलग रखना समझ से परे जैसा है. इसी प्रकार बड़गांव-औंगारी छठ मेला भी देश के 12 प्रमुख सूर्यपीठों में शामिल माना जाता है. इसे राजकीय छठ मेला का दर्जा प्राप्त है. यहां प्रतिवर्ष सूर्य महोत्सव का आयोजन होता है. उसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं. इसके अलावा राजकीय मकर मेला भी क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक आयोजन है. लेकिन इसके लिए भी किसी प्रकार का आवंटन स्वीकृत नहीं किया गया है. इस मुद्दे पर नगर परिषद की मुख्य पार्षद जीरो देवी, पूर्व प्रखंड प्रमुख सुधीर कुमार पटेल, वार्ड पार्षद डॉ. अनिल कुमार, महेंद्र यादव, केंद्रीय पर्यटन सलाहकार डॉ. कौलेश कुमार तथा जदयू के जिला उपाध्यक्ष सुवेन्द्र राजवंशी सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि नालंदा जिले के इन ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले मेलों की अनदेखी उचित नहीं है. जनप्रतिनिधियों ने सरकार से मांग की है कि राजगीर के मलमास मेला, बड़गांव-औंगारी राजकीय छठ मेला और राजकीय मकर मेला के भव्य और सुव्यवस्थित आयोजन के लिए पर्याप्त राशि का आवंटन सुनिश्चित किया जाय. उनका कहना है कि इन मेलों का न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण से भी विशेष महत्व है. फिलहाल इस मुद्दे को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज है. लोगों को उम्मीद है कि सरकार इस पर पुनर्विचार कर उचित निर्णय लेगी.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




