बिहारशरीफ के बाजारों में आलू 10 रुपए तो प्याज 20 रुपए किलो मिल रहा, हरी सब्जियों की कीमतें भी घटी
Published by : Vivek Singh Updated At : 19 May 2026 10:26 AM
Nalanda News: जिले के बाजारों में इन दिनों हरी साग- सब्जियों की कीमतें तेजी से गिरी है. इससे किसानों को काफी घाटा उठाना पड़ रहा है. आलू तथा प्याज की कीमतें तो महीनों से अपने न्यूनतम स्तर पर पहुंचा हुआ है.
Nalanda News🙁सुनील कुमार ) नालंदा जिले के बाजारों में इन दिनों हरी साग- सब्जियों की कीमतें तेजी से गिरी है. इससे किसानों को काफी घाटा उठाना पड़ रहा है. आलू तथा प्याज की कीमतें तो महीनों से अपने न्यूनतम स्तर पर पहुंचा हुआ है.
हरी साग- सब्जियों की कीमतों में भी भारी गिरावट आने से जिले के सब्जी उत्पादक परेशान हैं. कई किसानों ने बताया की इन दिनों हरी साग- सब्जियों का बाजार समिति में कोई खरीदार तक नहीं मिल रहा है.
किसान को औने- पौने भाव में हरी सब्जियों को मंडी में बेचना पड़ रहा है
इसके कारण औने- पौने भाव में हरी सब्जियों को बेचकर लौटना पड़ता है. यहां तक की सब्जियों का लागत मूल्य तो दूर की बात है, बाजार समिति पहुंचाने तक का किराया तक नहीं मिल पा रहा है.
शहर के सोहडीह मोहल्ले के किसान जनक पासवान तथा सौरभ कुमार ने बताया कि किसान सपरिवार तीन- साढे तीन बजे रात्रि में ही सब्जियां तोड़कर सुबह मुंह- अंधेरे बाजार समिति पहुंचते हैं तो वहां सब्जियों का खरीदार तक नहीं मिल पाता है. मजबूरी में उन्हें भिंडी, नेनुआ, बोड़ा आदि सब्जियां दो रुपए प्रति किलो की दर तक बेचकर भागना पड़ता है.
यदि यही रवैया रहता हो आने वाले दिनों में किसानों को अपनी सब्जियां खेतों में ही छोड़ देना पड़ेगा. उन्होंने बताया की इसी प्रकार अन्य सब्जियों की कीमतों में भी भारी गिरावट होने से जिले के सब्जी उत्पादकों को काफी परेशानी हो रही है. उन्हें मजदूरी तो दूर, सब्जियों का लागत मूल्य तक नहीं निकल पा रहा है.
किसान से लेकर 5 गुणा फायदा में बेच रहे सब्जी विक्रेता
हालांकि सब्जियों के मूल्य में गिरावट के बावजूद इसका लाभ सब्जी विक्रेता उठाने से नहीं चूक रहे हैं. सब्जी विक्रेताओं द्वारा वही भिंडी, नेनुआ तथा बोड़ा कम से कम 10 रू प्रति किलो की दर से बेची जाती है. अन्य सब्जियों की कीमतें भी किसानों से खरीदी गई सब्जियों की कीमतों से चार से पांच गुना तक अधिक देखा जा रहा है.
लोगों का मानना है कि सब्जियों के भाव इतने गिरने के बावजूद आम उपभोक्ताओं को इसका लाभ भी नहीं मिल पाता है. बल्कि इस गिरावट का लाभ सब्जी विक्रेता ही उठा रहे हैं.
हरी सब्जियों का भारी उत्पादन
इन दिनों जिले के बड़े भूभाग पर किसानों के द्वारा हरी साग- सब्जियां उपजाई जाती है. विशेष रूप से वर्तमान में गरमा सब्जियों के अनुकूल वातावरण होने के कारण खेतों में सब्जियों का काफी उत्पादन हो रहा है. ग्रामीण क्षेत्र से भी सब्जी उत्पादक किसान अपनी सब्जियां लेकर बाजार समिति पहुंचते हैं. बाजार समिति में काफी मात्रा में सब्जियां पहुंचने के कारण तथा कई सब्जी विक्रेताओं के द्वारा स्थानीय स्तर पर ही कम कीमत में सब्जियां खरीद लेने के कारण इन दिनों अच्छा भाव नहीं मिल पा रहा है.
आलू- प्याज की कीमत पहले से ही कम
जिले में आलू की कीमत उसके उत्पादन होने के बाद से ही काफी कम रहा है. वर्तमान में भी 50 किलो आलू पैकेट की कीमत किसानों को 300 रुपए के आसपास ही मिल रहा है. जबकि इसका बाजार मूल्य 10 रू किलो तक है. इसी प्रकार स्थानीय स्तर पर भी जिले में प्याज की अच्छी पैदावार हुई है. जबकि दूसरे प्रदेशों से आने वाले प्याज के कारण इसकी भी कीमत नहीं बढ़ सकी है. इससे स्थानीय स्तर पर आलू- प्याज की खेती करने वाले किसानों को लागत मूल्य तथा मजदूरी भी नहीं मिल पा रहा है. रही सही कमी हरी साग सब्जियों की कीमतें गिरने से और बढ़ गई है.
जिले में सब्जियां का खुदरा मूल्य
कद्दू –20 रू किलो, करैला -25 रू किलो, टमाटर -35 रू किलो, पत्ता गोभी -20 रू किलो, शिमला मिर्च- 40 रू किलो, कटहल -25 रू किलो , कच्चु- 40 रू किलो, परवल – 40 रू किलो, कच्चा आम -30 रू किलो, खीरा -30 रू किलो ,बैगन – 40 रू किलो, हरी मिर्च 50 रू किलो, गोभी 20 रू पीस, प्याज- 20 रू किलो
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