नालंदा में 7 करोड़ का CHC 10 माह से बंद, बिजली कनेक्शन के अभाव में शुरू नहीं हुई स्वास्थ्य सेवाएं
Published by : Vikas Jha Updated At : 07 Jun 2026 2:35 PM
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिंद
Nalanda News: नालंदा जिले के बिंद में करोड़ों रुपये की लागत से बना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) उद्घाटन के 10 महीने बाद भी मरीजों के लिए नहीं खुल सका है. बिजली आपूर्ति न होने के कारण अस्पताल की सभी आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप पड़ी हैं.
Nalanda News (मुकुल नाथ सिन्हा की रिपोर्ट): नालंदा जिला के बिंद में क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बिंद उद्घाटन के करीब 10 माह बाद भी आम लोगों के लिए शुरू नहीं हो सका है. आधुनिक सुख-सुविधाओं से लैस यह भव्य अस्पताल भवन स्वास्थ्य सेवाओं की प्रतीक्षा में बिल्कुल वीरान पड़ा है. जबकि स्थानीय गरीब मरीजों को समुचित इलाज के लिए आज भी दूसरे दूरदराज के शहरों का सहारा लेना पड़ रहा है.
अस्पताल में हैं आधुनिक सुविधाएं
पूरी तरह से आधुनिक तकनीकी से निर्मित करीब सात करोड़ रुपये की भारी लागत से बने इस 30 शैय्या (बेड) वाले बड़े अस्पताल में ओपीडी, इमरजेंसी, आईसीयू, एक्स-रे, पैथोलॉजी लैब, अल्ट्रासाउंड, दवा वितरण केंद्र और भर्ती मरीजों के लिए अलग-अलग सुसज्जित वार्ड जैसी बेहतरीन सुविधाएं विकसित की गई हैं. इसके साथ ही यहाँ शुद्ध पेयजल के लिए आरओ (RO) सिस्टम भी लगाया गया है. बावजूद इसके अस्पताल का नियमित संचालन शुरू नहीं होने से सारी व्यवस्थाएं पूरी तरह बेकार साबित हो रही हैं.
कमरों में जमने लगी धूल
वर्तमान में हालत यह है कि अस्पताल परिसर का मुख्य प्रवेश द्वार अधिकांश समय पूरी तरह बंद रहता है. भवन के अंदर डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए विशेष रूप से बनाए गए सभी कक्ष खाली पड़े हैं. उचित उपयोग के अभाव में यहाँ लगे महंगे एयर कंडीशनर (AC) बंद हैं तथा कई कमरों में अब धूल जम चुकी है. अस्पताल के पंजीयन काउंटर पर मकड़ियों के जाले और बंद पड़े दवा काउंटर इसकी बदहाली को बयां कर रहे हैं. दवाओं के सुरक्षित भंडारण के लिए लगाए गए रैक भी जंग खाने लगे हैं.
इलाज को दूसरे शहर जाने की मजबूरी
स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि अस्पताल का नया भवन और आवश्यक संसाधन पूरी तरह तैयार होने के बावजूद स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं होने से क्षेत्र की हजारों आबादी को कोई अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है. गंभीर मरीजों को आपात स्थिति में अब भी बिहारशरीफ समेत अन्य दूरस्थ शहरों के अस्पतालों का रुख करना पड़ता है. जानकारी के अनुसार इस नवनिर्मित अस्पताल के सुचारू संचालन में सबसे बड़ी व्यावहारिक बाधा अब तक स्थायी बिजली कनेक्शन का नहीं मिलना है.
बिजली कनेक्शन मिलने पर शुरू होगी सेवा
विद्युत आपूर्ति के घोर अभाव में अस्पताल की अधिकांश स्वचालित व्यवस्थाएं चालू नहीं हो पा रही हैं. स्थानीय ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से शीघ्र बिजली व्यवस्था सुनिश्चित कर अस्पताल को जनहित में चालू कराने की पुरजोर मांग की है. इस गंभीर संबंध में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ उमाकांत प्रसाद ने बताया कि बिजली कनेक्शन नहीं मिलने के कारण ही अस्पताल का संचालन शुरू नहीं हो सका है. बिजली आपूर्ति बहाल होते ही सभी स्वास्थ्य सेवाएं तुरंत शुरू करने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी.
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