मजूदरों के प्रति संवेदनहीन हुआ विभाग, नन्हें हाथ थामने लगे ठेला
Author : Prabhat Khabar News Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 17 May 2020 11:03 PM
जरूरतमंदों के पेट भरने का समुचित खाका तैयार किये बिना लागू लंबी लॉकडाउन का अब खौफनाक चेहरा समाज के सामने आने लगा है. शहर से लेकर गांव की गलियों में भुख से व्याकुल सैकड़ों लोग भीख मांगकर पेट भरने का नकाम प्रयास करने लगे हैं.
बिहारशरीफ : जरूरतमंदों के पेट भरने का समुचित खाका तैयार किये बिना लागू लंबी लॉकडाउन का अब खौफनाक चेहरा समाज के सामने आने लगा है. शहर से लेकर गांव की गलियों में भुख से व्याकुल सैकड़ों लोग भीख मांगकर पेट भरने का नकाम प्रयास करने लगे हैं. कोरोना काल से हजारों परिवार के जीवनयापन की बुनियाद हिलने लगी है. शनिवार को भी-टू मॉल के पीछे सड़क पर नन्हें हाथों से ठेला पर सब्जी बेचते देखे गये. इतना ही नहीं प्रतिदिन शहर के विभिन्न मोहल्लों में लॉकडाउन लागू होने के बाद से सैकड़ों लाचार व भुखे प्यासे लोग भीख मांगते देखे जा रहे हैं. वहीं बाल विकास, श्रम विभाग, जिला बाल संरक्षण जैसे आधे दर्जन से अधिक प्रशासनिक विभाग बच्चों के उत्थान और भरण पोषण का लाभ वास्तिक लाभुकों तक नहीं पहुंचा रहे हैं.
मजदूरों के प्रति श्रम विभाग संवेदनहीन बना हुआ है, जिसका परिणाम यह है कि एक साल से जिले के 42212 मजदूर के परिवारों से जुड़े असंगठित कार्यक्षेत्र के कामगारों को बिहार सरकार की योजना के लाभ से वंचित होना पड़ रहा है. इनमें 31 हजार 774 चालू वित्तीय वर्ष के मजदूर हैं और 10 हजार 438 मजदूर वर्ष 2016 के निबंधित हैं. प्रत्येक वर्ष इन निबंधित गैर संस्थागत मजदूरों को कुल पांच हजार रुपये दिये जाने का प्रावधान है, लेकिन वित्तीय वर्ष समापत होने के डेढ़ माह बाद भी इन निबंधित मजदूरों को योजना का लाभ नहीं मिल पाया है. शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में निबंधित मजदूरों के अलावा लाखों लोग हैं, जो ठेला, रिक्शा, मोर्ची, गोलगप्पा, कूड़ा चुनने वाला, होटलों-ढावा, मंडी, दुकानों आदि में छोटे-मोटे काम कर अपना परिवार का पेट भरते हैं. इन गरीबों के घरों में समय रहते चूल्हे जलाने की योजना नहीं बनाई गई तो समाज के एक वर्ग का भुखा मरना पड़ेगा. इन्हें देखने वाला कोई नहीं है.
आम लोगों की बात तो दूर प्रशासन की पंजी में निबंधित मजदूरों को भी योजना के लाभ से महरूम होना पड़ रहा है. दूसरी ओर खाली हाथ बाहर से आ रहे प्रवासियों को लाभ दिलाने में प्रशासन पूरी तरह फोकस किये हुए है. ऐसे प्रवासियों को घर-घर सर्वे कर उन्हें 500-500 रुपये उपलब्ध करा रही है. मजदूरों की नई मुश्किलें:-कोरोना काल में श्रम विभाग का काम ठप है. नये मजदूरों का निबंधन नहीं हो रहा हैं. इससे जिले के मजदूरों के बीच नई मुश्किलें उत्पन्न हो गई है. श्रम विभाग की पूरी फौज बाहर से आये प्रवासियों के सर्वे कार्य में जुटी है, लेकिन चौंकाने वाली बात है कि आपदा और ग्रामीण विकास विभाग के पंजी में करीब आठ हजार प्रवासी मजदूरों के सूची अंकित हैं. वहीं श्रम विभाग शनिवार तक महज 13 सौ प्रवासियों के घरों तक पहुंच पाया है.
फर्जी आवेदन करने वाले पर विभाग का नजर:-जिले के कई कॉमन सर्विस सेंटर फर्जी तरीके से मजदूरों को योजना का लाभ दिलाने के उद्देश्य से ऑनलाइन कर रहे हैं. बिना विभागीय अधिकारियों द्वारा सत्यापित किये ही मजदूरों का आवेदन ऑन लाइन किया जा रहा है. बिना सत्यापन के कारण 77 ऑनलाइन आवेदन रिजेक्ट किये जा चुके हैं. आधार, बैंक खाता, फोटो, मजदूरी कार्य का प्रमाण के साथ संबंधित क्षेत्र के एलईओ से अग्रसारित करने के बाद ही ऑन लाइन आवेदन किया जाना है, परंतु सिलाव से 54, रहुई से 8, हरनौत समेत आठ क्षेत्रों से बिना विभागीय अनुमति के मजदूरों की आवेदन ऑनलाइन की शिकायतें मिली हैं. ऐसे कॉमन सर्विस सेंटर के खिलाफ विभाग कार्रवाई करने का मन बना रहा है.
कोरोना काल ने बढ़ा दी मजदूरों की संख्या:-कोरोना काल ने मजदूरों की संख्या में काफी तेरी से वृद्धि की है. कोरोना कहर के बाद से गैर संस्थागत मजदूरों के लिए तैयार पंजी में लगातार मजदूरों की संख्या बढ़ने लगी है. चालू वित्तीय वर्ष में 31 हजार 774 निबंधित मजदूर हैं. वर्ष 2016 में पंजी मजूदरों की संख्या 10हजार 438 थीं. वहीं 2016 से पूर्व में करीब चार हजार मजदूरों की संख्या थीं. क्या कहते हैं अधिकारी:-मजदूरों का निबंधन कार्य सिर्फ जिला स्तर से होता है.
इसके बाद योजना की राशि देने का काम पटना द्वारा किया जाता है. अब तक 42 हजार 212 मजदूरों को निबंधन कर सत्यापन किया गया है. इसके अतिरिक्त 144 आवेदन का सत्यापन कार्य चल रहा है. 506 मजदूरों का आवेदन अधूरा पाया है. 77 मजदूरों का आवेदन बिना अधिकारियों के अग्रसारित के ऑनलाइन किये गये हैं, जिसे रद्द कर दिया गया है.-फिरोज अहमद, श्रम अधीक्षक, श्रम विभाग, नालंदा
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