रहुई डेंटल अस्पताल में दांत बनाने का काम शुरू नहीं

Updated at : 04 May 2024 9:51 PM (IST)
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रहुई डेंटल अस्पताल में दांत बनाने का काम शुरू नहीं

राज्य सरकार की ओर से दंत रोगियों को सहज रूप से चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने के लिए जिले के रहुई के भागनबीघा स्थित डेंटल कॉलेज सह अस्पताल का संचालन किया जा रहा है.

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बिहारशरीफ. राज्य सरकार की ओर से दंत रोगियों को सहज रूप से चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने के लिए जिले के रहुई के भागनबीघा स्थित डेंटल कॉलेज सह अस्पताल का संचालन किया जा रहा है. इस अस्पताल में करीब डेढ़ साल से मरीजों को ओपीडी सेवा का लाभ उपलब्ध जरूर कराया जा रहा है. पर अभी तक इस अस्पताल में नये दांत बनाने का काम शुरू नहीं हो पाया है. लिहाजा दांत बनाने वाले लोगों को अभी भी निजी दंत विशेषज्ञ चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ रहा है.

बाहर जाकर दांत बनाने में उठाना पड़ रहा अधिक खर्च

रहुई डेंटल कॉलेज सह अस्पताल में अभी तक इसकी सुविधा उपलब्ध नहीं होने पर जरूरतमंद लोगों को उठाना पड़ रहा है अधिक खर्च. निजी डेंटिस्ट विशेषज्ञों के यहां जाकर नये सिरे से दांत बनाने में अधिक राशि खर्च करनी पड़ रही है. लोग बताते हैं कि दांत के पूरा सेट बनाने पर करीब 25 -30 हजार रुपये खर्च आते हैं. इतनी बड़ी रकम खर्च वहन करने में गरीब -असहाय लोग सक्षम नहीं हो पाते हैं. लोग कहते हैं कि यदि इस अस्पताल में दांत बनाने का कार्य शुरू हो जाता है तो बहुत राहत होती . मुफ्त में दांत बन जाता. पर यह कार्य कब शुरू होगा और स्वास्थ्य विभाग का लाभ कब मिल पायेेगा पता नहीं . इस अस्पताल में डेंटिस्ट के बारह से अधिक विशेषज्ञ तैनात हैं. हालांक़ि दंत चिकित्सक ओपीडी में आने वाले रोगियों को दांत से संबंधित रोगों का इलाज कर सेवा प्रदान कर रहे हैं.

कई मशीनें अभी तक इस्टॉल नहीं हो पायी

रहुई डेंटल कॉलेज सह अस्पताल में मरीजों को दांत बनाने की दिशा में विभागीय पहल जरूर की गयी है. बताया गया कि इसके लिए कई तरह की आवश्यक मशीनें लगायी गयी हैं,तो कई प्रकार की मशीनों का इस्टॉल होना बाकी है. साथ ही कई प्रकार के आवश्यक उपकरणों की आवश्यकता है उसके लिए क्रय होना शेष है. दांत बनाने की सभी तरह की मशीनें नहीं लग पाने के कारण यहां पर नये दांत बनाने के कार्य में विलंब हो रहा है. लिहाजा दांत बनाने वालों में निराशा हाथ लग रही है. रोगियों को दांत बनाने के कार्य शुरू होने की बेसब्री से प्रतीक्षा है. यह सुनहरा मौका कब मिलेगा यक्ष सवाल बना हुआ है. नये सिरे से दांत बनाने वाले इच्छुक लोगों को उम्मीद जगी थी की अब दांत बनाने में आसानी होगी. जहां-तहां भटकना नहीं पड़ेगा,लेकिन एेसे लोगों की अभी तक आस पूरी नहीं हो पायी है. अभी भी एेसे लोग बिहारशरीफ शहर या जिले से बाहर जाकर निजी डेंटिस्टों का सहारा लेने को विवश हो रहे हैं. जिले में एकमात्र सरकारी डेंटल कॉलेज सह अस्पताल है. कॉलेज सह अस्पताल के प्राचार्य डॉ. विकास वैभव कहते हैं कि इस दिशा में पहल की जा रही है.

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