biharsharif news. प्राचीन नालंदा महाविहार से जुड़े पुरास्थलों का अस्तित्व खतरे में

Updated:
विज्ञापन
biharsharif news. प्राचीन नालंदा महाविहार से जुड़े पुरास्थलों का अस्तित्व खतरे में

सड़क निर्माण के लिए मिट्टी कटाई से विलुप्त हो रहे प्राचीन पुरास्थल

विज्ञापन

राजगीर. विश्व विरासत प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के पश्चिम दिशा में कुछ ही दूरी पर नये सड़क निर्माण के लिए मिट्टी कटाई और भराव का कार्य तेज़ी से जारी है. लेकिन जिस क्षेत्र से सड़क निर्माण के लिए मिट्टी काटी जा रही है, वह सामान्य भू-भाग नहीं, बल्कि प्राचीन नालंदा के समकालिक मानव बसावट से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल हैं. इन ऊंचे टीलों और स्थानों को बिना किसी वैज्ञानिक सर्वेक्षण के जेसीबी मशीनों से काटा जा रहा है. इससे अनजाने में अमूल्य प्राचीन अवशेष ध्वस्त हो रहे हैं. नव नालंदा महाविहार सम विश्वविद्यालय, नालंदा के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के पीएचडी शोधछात्र शंकर शर्मा ने इस गंभीर स्थिति की ओर ध्यान आकृष्ट किया है. वे विगत एक दशक से नालंदा क्षेत्र में शोध कार्य कर रहे हैं. वे प्राचीन नालंदा के इर्द-गिर्द फैले पुरातात्विक स्थलों एवं पुरावशेषों की पहचान और दस्तावेजीकरण से जुड़े रहे हैं.

उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में उन्होंने स्वयं देखा कि नालंदा के समकालिक कई महत्वपूर्ण पुरास्थल सड़क निर्माण के नाम पर मिट्टी कटाई की भेंट चढ़ रहे हैं. यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो प्राचीन और गौरवशाली नालंदा के समकालिक अतीत से जुड़े महत्वपूर्ण भौतिक साक्ष्य हमेशा के लिए नष्ट हो जाएंगे. गौरतलब है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधीन संरक्षित विश्व धरोहर स्थल नालंदा महाविहार सुरक्षा घेरे में होने के कारण फिलहाल सुरक्षित है. किंतु इसके आसपास फैले वे सभी पुरास्थल, जिन्हें अभी तक पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित घोषित नहीं किया गया है. गंभीर खतरे की स्थिति में पहुंच चुके हैं. यह स्थिति बेहद चिंताजनक है. उन्होंने कहा कि नालंदा केवल एक सीमित परिसर नहीं, बल्कि एक विशाल शैक्षणिक और सांस्कृतिक नगर रहा है, जिसकी वास्तविक भौगोलिक और सांस्कृतिक व्यापकता का आज तक समुचित आकलन नहीं हो सका है.

बफर जोन आज तक निर्धारित नहीं

शंकर शर्मा का मानना है कि नालंदा की विशालता को सही अर्थों में समझना और संरक्षित करना वर्तमान पीढ़ी के लिए एक बड़ा शोध और संरक्षण संबंधी चैलेंज है. उन्होंने बताया कि विश्व विरासत सूची में शामिल प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के पास बफर जोन आजतक स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं किया गया है और न ही उसका सख्ती से अनुपालन हो रहा है. इसी कारण आसपास के महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल धीरे-धीरे मिटते जा रहे हैं. उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि जब वे पूर्व में नालंदा संग्रहालय के सहायक अधीक्षक थे, तब इस प्रकार की पुरातात्विक क्षति से जुड़े गंभीर विषयों पर कई बार संबंधित विभागों और प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया था. बावजूद इसके अबतक कोई ठोस पहल नहीं होने के कारण आज अनेक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल विलुप्तप्राय स्थिति में पहुंच गए हैं. ऐसे में राज्य सरकार और संबंधित विभागों से उन्होंने मांग की है कि सभी संभावित पुरास्थलों को तत्काल चिन्हित कर मिट्टी कटाई पर रोक लगाई जाय, ताकि नालंदा की अमूल्य विरासत को बचाया जा सके.

विज्ञापन
Shashi Kant Kumar

लेखक के बारे में

By Shashi Kant Kumar

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन