नालंदा में 18 से 59 साल के लोगों की मौत की संख्या में बढ़ोतरी ने बढ़ाई चिंता, एक्सपर्ट ने बताई ये वजह

Published by : Vivek Singh Updated At : 28 May 2026 10:39 AM

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सांकेतिक तस्वीर

Nalanda News : नालंदा जिले में अकाल मौतों के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी दर्ज की गई है. जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024-25 में जहां 299 मामले सामने आए थे. वहीं वर्ष 2025-26 में 20 अप्रैल तक यह आंकड़ा बढ़कर 460 पहुंच गया है. एक साल में 161 मामलों की वृद्धि के साथ यह करीब 54 प्रतिशत की उछाल मानी जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क दुर्घटनाएं, हृदय रोग, किडनी और लीवर की बीमारी, शुगर तथा हाई बीपी जैसी समस्याएं मौतों की बड़ी वजह बन रही हैं

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Nalanda News : (कंचन कुमार) नालंदा जिले में कमाऊ सदस्यों की अकाल मौतों के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी दर्ज की गई है. जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024-25 में जहां 299 मामले सामने आए थे, वहीं वर्ष 2025-26 में 20 अप्रैल तक यह आंकड़ा बढ़कर 460 पहुंच गया है. एक साल में 161 मामलों की वृद्धि के साथ यह करीब 54 प्रतिशत की उछाल मानी जा रही है.

18 से 59 वर्ष आयु वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित

रिपोर्ट के अनुसार सभी मृतक 18 से 59 वर्ष आयु वर्ग के थे, जिन्हें परिवार का मुख्य कमाऊ सदस्य माना जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क दुर्घटनाएं, हृदय रोग, किडनी और लीवर की बीमारी, शुगर तथा हाई बीपी जैसी समस्याएं मौतों की बड़ी वजह बन रही हैं. समाजसेवियों का कहना है कि तेज रफ्तार और स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही स्थिति को और गंभीर बना रही है.

बिहारशरीफ में सबसे ज्यादा बढ़े मामले

प्रखंडवार आंकड़ों में बिहारशरीफ सबसे आगे रहा, जहां मामलों की संख्या 17 से बढ़कर 50 हो गई. परवलपुर में 4 से 23 मामलों के साथ 475 प्रतिशत, सरमेरा में 6 से 25 के साथ 316 प्रतिशत और गिरियक में 7 से 27 के साथ 286 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. सिलाव, इस्लामपुर और नगरनौसा में भी अकाल मौतों के मामलों में तेज बढ़ोतरी सामने आई है.

कुछ प्रखंडों में राहत के संकेत

रिपोर्ट में कुछ प्रखंडों में मामलों में कमी भी दर्ज की गई है. चंडी में अकाल मौत के मामले 39 से घटकर 13 हो गए. अस्थावां में 47 से घटकर 37 और राजगीर में 24 से घटकर 19 मामले दर्ज किए गए हैं. वहीं एकंगसराय और कतरीसराय में भी पिछले वर्ष की तुलना में कम मामले सामने आए हैं.

20 हजार की सहायता राशि पर उठे सवाल

राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत बीपीएल परिवारों में कमाऊ सदस्य की मौत पर 20 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है. हालांकि सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि मौजूदा समय में यह राशि परिवार के भरण-पोषण और बच्चों के भविष्य के लिए पर्याप्त नहीं है. बढ़ती अकाल मौतों ने जिले में सामाजिक और आर्थिक चिंता दोनों को बढ़ा दिया है.

विधवा पेंशन के आंकड़े भी बढ़ती चिंता की ओर इशारा

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना के आंकड़ों के अनुसार जिले में पिछले 15 से 20 वर्षों के दौरान 16 हजार 593 महिलाओं के पति की मौत हो चुकी है. बिहारशरीफ में सबसे अधिक 2410 और इस्लामपुर में 1678 विधवा पेंशनधारी दर्ज किए गए हैं. वहीं कतरीसराय में सबसे कम 245 और थरथरी में 285 मामले सामने आए हैं.

विशेषज्ञों ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और समाजसेवियों ने लोगों से सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने, नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और जीवनशैली में सुधार लाने की अपील की है, ताकि समय से पहले होने वाली मौतों पर रोक लगाई जा सके.

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Vivek Singh

लेखक के बारे में

By Vivek Singh

विवेक सिंह माता सीता की धरती और मिथिला का द्वार कहे जाने वाले समस्तीपुर जिले से आते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. इससे पहले #The_Newsdharma के साथ डिजिटल मीडिया, ग्राउंड रिपोर्टिंग , और न्यूज़ लेखन के क्षेत्र में कार्य करने का अनुभव रहा है. सामाजिक, राजनीतिक, शिक्षा, युवा, महिला सुरक्षा और जनता से जुड़े मुद्दों पर विशेष रुचि रखते हैं. सरल, तथ्यात्मक और प्रभावी लेखन शैली के माध्यम से पाठकों तक महत्वपूर्ण खबरें और मुद्दे पहुंचाने का निरंतर प्रयास करते हैं. NGO अमर शहीद बिपिन सिंह फाउंडेशन के साथ जुड़कर सामाजिक, स्वास्थ्य, पर्यावरण ,रोजगार और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर भी कार्य करने का अनुभव हैं.

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