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कांच ही बांस के बहंगिया बहंगी लचकत जाय...

Updated at : 25 Oct 2025 9:52 PM (IST)
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कांच ही बांस के बहंगिया बहंगी लचकत जाय...

सूर्योपासना का महापर्व छठ व्रत की शुरुआत शनिवार को नहाय-खाय की रस्म के साथ हो गया है.

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बिहारशरीफ. सूर्योपासना का महापर्व छठ व्रत की शुरुआत शनिवार को नहाय-खाय की रस्म के साथ हो गया है. इसी के साथ घर परिवार में व्रत को लेकर उत्साह बढ़ गया है. घरों में छठ व्रत के धार्मिक गीतों से वातावरण धार्मिकता के रंग में रंग गया है. नहाय- खाय के अवसर पर छठ व्रतियों के द्वारा पूरी श्रद्धा, निष्ठा, आस्था और पवित्रता के साथ नहाय-खाय का प्रसाद तैयार किया गया. छठ व्रत की नहाय-खाय की प्रसाद में अरवा चावल की भात, चने की दाल, कद्दू की सब्जी,आलू- गोभी की सब्जी आदि पकाई गई. छठ व्रतियों के द्वारा भगवान भास्कर तथा छठी मैया को यह प्रसाद अर्पित कर स्वयं भी ग्रहण किया गया तथा अपने घर- परिवार एवं आस- पड़ोस के लोगों को भी परोसा गया. सभी ने पूरी आस्था के साथ प्रसाद ग्रहण किया. सनातन धर्मावलंबियों में सूर्योपासना तथा छठ व्रत का काफी महत्व है. विशेष रूप से नालंदा जिले में प्राचीन काल से ही बड़गांव तथा औंगारीधाम जैसे सूर्यपीठ मौजूद हैं. जिले में अधिकांश परिवारों में छठ व्रत किए जाने की परंपरा रही है. ऐसी मान्यता है कि महापावन छठ पर्व करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. इस संबंध में पंडित श्रीकांत शर्मा आचार्य ने बताया कि छठ व्रत के दौरान सूर्य देव और छठी मैया को निश्छल भक्ति भाव के साथ पूजा- अर्चना की जाती है. छठ व्रत की शुरुआत नहाय-खाय के दिन से ही हो जाता है. अगले दिन रविवार को छठ व्रतियों के द्वारा लोहंडा (खरना) पूजन किया जायेगा. छठव्रतियों के द्वारा प्रसाद के रूप में पूरी पवित्रता के साथ गन्ने की रस से रसिया, शुद्ध गेंहू के आटे से रोटी, अरवा चावल, चने की दाल, घी, रबा आदि का उपयोग किया जाता है. सोमवार को अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को तथा मंगलवार को उदीयमान भगवान भास्कर को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जायेगा.

छठ व्रत की खरीदारी से गुलजार हुआ बाजार:-

छठ व्रत का पर्व पूरी तरह से पारंपरिक ढंग से मनाया जाता है. इस व्रत में शुद्धता तथा पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है. इसलिए छठव्रतियों के द्वारा छठ व्रत के अवसर पर कई विशेष प्रकार की वस्तुओं की खरीदारी की जाती है. इनमें मिट्टी के बर्तन तथा चुल्हे की काफी डिमांड है. आम की सुखी लकड़ियों, बांस की सूप , डाला- दौरा आदि की भी खूब खरीदारी की जा रही है. इसी प्रकार अरवा चावल, चने की दाल, घी, गुड़, रबा, तेल आदि की भी खूब खरीदारी की जा रही है.इससे बाजारों में रौनक बढ़ी हुई है.

छठ व्रत की गीतों से धार्मिक हुआ वातावरण:-

छठ व्रत के अवसर पर महिलाओं के द्वारा स्थानीय तथा धार्मिक लोकगीत गाकर छठ के पारंपरिक त्यौहार को और अधिक भक्तिमय बना रहे हैं. कई दिनों पूर्व से ही घर-घर में छठ व्रत से जुड़े लोकगीत गाए और बजाये जा रहे हैं. सडकों पर चलने वाले कई वाहनों पर भी छठ गीत बजाए जा रहे हैं. इससे पूरा वातावरण धार्मिकता के रंग में रंग गया है. कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाय …तथा मारबौ रे सुगबा धनुष से, सुगा गिरे मुरझाय…आदि कर्णप्रिय गीतों से पूरा वातावरण गुंजायमान हो रहा है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SANTOSH KUMAR SINGH

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By SANTOSH KUMAR SINGH

SANTOSH KUMAR SINGH is a contributor at Prabhat Khabar.

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