Bihar: मरीज के इलाज में अब डॉक्टर नहीं कर पाएंगे कोताही, बताना होगा कारण, जानें पूरी बात

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मरीजों को इलाज देने के बजाय दूसरे अस्पताल रेफर करने पर स्वास्थ्य विभाग ने अब सख्ती की है. स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों की मनमानी रोकने के लिए मरीजों को रेफर करने का कारण और पूरा ब्योरा लिखना अनिवार्य कर दिया है. यह पूरा ब्योरा डॉक्टरों को राज्य स्वास्थ्य समिति के बुकलेट में लिखना होगा.

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कुमार दीपू, मुजफ्फरपुर

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मरीजों को इलाज देने के बजाय दूसरे अस्पताल रेफर करने पर स्वास्थ्य विभाग ने अब सख्ती की है. स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों की मनमानी रोकने के लिए मरीजों को रेफर करने का कारण और पूरा ब्योरा लिखना अनिवार्य कर दिया है. यह पूरा ब्योरा डॉक्टरों को राज्य स्वास्थ्य समिति के बुकलेट में लिखना होगा. इसके लिए राज्य स्वास्थ्य समिति ने सभी अस्पतालों काे बुकलेट उपलब्ध करा दिया है. ऐसा नहीं करने और वाजिब कारण नहीं होने पर रेफर करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी. सिविल सर्जन डॉ उमेश चंद्र शर्मा ने कहा कि मरीजों को जहां से रेफर किया जायेगा, उनके कागज व राज्य स्वास्थ्य समिति के बुकलेट में पूरा ब्योरा होना चाहिए.

ये ब्योरा होना चाहिए

मरीज को अटेंड करने वाले डॉक्टर को लिखना होगा कि मरीज उनके पास कितने बजे आया, ���से क्या समस्या थी, क्या ट्रीटमेंट दिया और नहीं दिया, तो इसकी वजह क्या थी. यह भी बताना होगा कि किस सुविधा के कमी के कारण मरीज का इलाज नहीं कर सकते और रेफर कर रहे हैं. अगर इस ब्योरे के बिना मरीजों को रेफर किया, तो संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी. सरकारी अस्पतालों में मरीजों को इलाज के बजाय फुटबॉल बनाये जाने की खबरें आती हैं. पीएचसी, सीएचसी व सदर अस्पताल स्तर पर ही जिन मरीजों का इलाज हो सकता है, उन्हें भी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है. जिलों के अस्पताल रेफरल सेंटर बन गये हैं. इस कारण यह फैसला लिया गया है.

मिल रही थीं ये शिकायतें

जुकाम, बुखार और मामूली बीमारी के मरीजों को भी रेफर कर दिया जाता है और इन्हें इलाज के लिए दूर-दराज जाना पड़ता है. रात में भर्ती करने से बचने के लिए ज्यादातर मरीज रेफर कर दिये जाते हैं. मरीजों को भटकना पड़ता है और वे थक-हारकर प्राइवेट अस्पताल चले जाते हैं.

मरीजों को होंगे फायदे

एसकेएमसीए पर मरीजों का बोझ कम होगा. इसके साथ ही मरीजों को दूर जाना नहीं पडगा. मरीजों को जल्दी और सही इलाज अपने नजदीकी अस्पताल में ही मिल सकेगा. पीएचसी और सीएचसी पर न पहुंचने वाले डॉक्टरों को मौजूद रहना पड़ेगा.

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