Bihar News: औरंगाबाद में बोले सीएम नीतीश- अब पूरी दुनिया में होती हैं बिहार की तरक्की की बातें
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 Jan 2022 7:53 PM
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को औरंगाबाद के पुलिस केंद्र मैदान में आयोजित समाज सुधार अभियान कार्यक्रम में कहा कि शराब पीने वाला इंसान नहीं, बल्कि हैवान हो जाता है. शराब के कारण बिहार के हर घर में कलह का माहौल था. झगड़ा-झंझट तो जैसे आम हो गया था.
Bihar News बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को औरंगाबाद के पुलिस केंद्र मैदान में आयोजित समाज सुधार अभियान कार्यक्रम में कहा कि शराब पीने वाला इंसान नहीं, बल्कि हैवान हो जाता है. उन्होंने कहा कि शराब के कारण बिहार के हर घर में कलह का माहौल था. झगड़ा-झंझट तो जैसे आम हो गया था. आपसी मनमुटाव हर गांव में बढ़ रहा था. आम लोगों की आर्थिक स्थिति चरमराने की वजह से बिहार लगातार पीछे जा रहा था, लेकिन जब शराबबंदी लागू हुई, तो 14 करोड़ बिहारियों में अमन-चैन व खुशियों का माहौल कायम हो गया.
सीएम नीतीश कुमार ने अपने संबोधन में आगे कहा कि शराबबंदी कानून लागू किए जाने के बाद से बिहार में शराब से होने वाली बीमारियों से मुक्ति मिली है. जिस घर में 2016 के पहले शाम के वक्त दारूबाज पति नशे में झूमता हुआ परिवार के साथ अभद्र व्यवहार व गाली-गलौज करता था, आज वह पति हर शाम तरकारी लेकर घर पहुंचता है और परिवार के साथ अपनी तरक्की की बात करता है. शराबबंदी के बाद यही सबकुछ बदला है. एक-एक घर तक समाज सुधार अभियान पहुंचाया जायेगा.
इससे पहले मुख्यमंत्री के साथ कृषि मंत्री अमरेंद्र प्रताप, औरंगाबाद प्रभारी मंत्री जनक राम, जहानाबाद प्रभारी मंत्री संतोष कुमार सुमन, गया प्रभारी मंत्री शाहनवाज हुसैन, मद्य निषेध उत्पाद मंत्री सुनील कुमार ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2016 से शराबबंदी लागू है. बाल विवाह व दहेज प्रथा के खिलाफ 2017 से अभियान शुरू है. 24 नवंबर, 2005 को बिहार की तरक्की के संकल्प के साथ विकास को ध्यान में रख कर शपथ ली गयी. उन दिनों की हालत किसी से छिपी नहीं है. शाम होने के बाद घर से कोई नहीं निकलता था.
सीएम नीतीश ने कहा कि गांव पहुंचने के लिए रास्ते नहीं थे. कुछ इलाकों में था भी, तो मुख्य केंद्र तक पैदल ही पहुंचना पड़ता था. शाम होते ही मुख्य रास्ता बंद हो जाता था. महिलाओं की स्थिति भयावह थी. बच्चियों को पढ़ने में दिक्कतें होती थीं. पांचवीं के बाद पढ़ाई संभव नहीं थी. महिलाओं को सम्मान के साथ आगे बढ़ाने के लिए वर्ष 2006 में पंचायत चुनाव के दौरान 50 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की गयी. अनुसूचित जाति-जनजाति को आबादी के अनुरूप आरक्षण दिया.
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