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निकाह फरमान का वायरल सर्कुलर निकला फर्जी, मधुबनी मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने किया खंडन

Updated at : 27 Feb 2026 2:14 PM (IST)
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Bihar News

madhubani medical college circular

Bihar News: बिहार में एक मेडिकल कॉलेज से जुड़े कथित सर्कुलर ने सोशल मीडिया पर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है. दावा किया जा रहा है कि रमजान के दौरान युवक-युवती के साथ खड़े होने पर रोक और उल्लंघन पर निकाह कराने जैसी सख्त चेतावनी दी गई है, हालांकि कॉलेज प्रशासन ने इस सर्कुलरको पूरी तरह से फजी बताया है.

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Bihar News: बिहार के मधुबनी जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जो वायरल हो रहा है जिसमें दावा किया गया है कि अगर लड़का-लड़की साथ दिखे, तो कॉलेज ही उनकी शादी करा देगा. रमजान के पाक महीने के बीच आए इस ‘फरमान’ ने हर तरफ हड़कंप मचा दिया है. हालांकि कॉलेज प्रशासन ने इसका खंडन किया है.

वायरल सर्कुलर से बढ़ी हलचल

मामला बिहार के मधुबनी स्थित मधुबनी मेडिकल कॉलेज से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां से एक कथित पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस पत्र में रमजान के दौरान छात्र-छात्राओं को एक साथ खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है.

वायरल सर्कुलर

वायरल सामग्री में दावा किया गया है कि यदि कोई कपल साथ पाया गया तो उनका तुरंत निकाह करा दिया जाएगा और वलीमा की जिम्मेदारी भी उसी जोड़े की होगी. पत्र कॉलेज के लेटरहेड पर जारी बताया जा रहा है और उस पर हस्ताक्षर व मुहर होने का भी दावा किया गया है.

कॉलेज प्रशासन का खंडन

कॉलेज प्रशासन की ओर से इस पत्र का खंडन किया है और इस पत्र को पूर्णत: फर्जी बताया है. कॉलेज प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि उनके महाविद्यालय द्वारा इस तरह का कोई पत्र जारी नहीं किया गया है. यह पत्र दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य से प्रसारित किया जा रहा हैं.

कॉलेज प्रशासन इसकी शिकायत साइबर सेल में दर्ज करा दी है. इस तरह के फर्जी सामग्री वायरल करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी इसका आश्वासन दिया है.

इसके बावजूद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई है. कुछ लोग इसे शिक्षा संस्थानों में बढ़ती नैतिक निगरानी से जोड़ रहे हैं, जबकि अन्य इसे फर्जी पत्र बताकर अफवाह फैलाने की साजिश कह रहे हैं.

राजनीति में भी उठे सवाल

विवाद बढ़ने के साथ यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया है. विपक्षी दल इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं, जबकि कुछ लोग बिना पुष्टि के प्रतिक्रिया देने से बचने की सलाह दे रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया के दौर में किसी भी दस्तावेज के वायरल होने पर सत्यापन बेहद जरूरी है, क्योंकि कई बार फर्जी पत्र भी बड़े विवाद का कारण बन जाते हैं.

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह सर्कुलर वास्तव में जारी हुआ था या नहीं. जब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं होती, यह मामला अफवाह और वास्तविकता के बीच झूलता रहेगा. लेकिन इतना तय है कि इस घटना ने शिक्षा संस्थानों में अनुशासन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सोशल मीडिया की भूमिका जैसे मुद्दों पर नई बहस जरूर छेड़ दी है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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