बिहार की इस भाषा को मिलेगा शास्त्रीय भाषा का दर्जा ! JDU ने मोदी सरकार को लिखा पत्र

Published by :Prashant Tiwari
Published at :07 Oct 2024 4:26 PM (IST)
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बिहार की इस भाषा को मिलेगा शास्त्रीय भाषा का दर्जा ! JDU ने मोदी सरकार को लिखा पत्र

Bihar : जद (यू) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने कहा कि वह मैथिली भाषा को ,शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिलाने के लिए जल्द ही केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मिलेंगे.

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केंद्र की सत्ता पर काबिज (राजग) की सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड) ने सोमवार को मैथिली को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिए जाने की मांग की है. यह मांग भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा मराठी, बांग्ला, पाली, प्राकृत और असमिया को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने के फैसले के कुछ दिनों बाद आई है. 

धर्मेंद्र प्रधान से मिलेंगे संजय झा

जद (यू) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने कहा कि वह इस मांग को लेकर दबाव बनाने के लिए जल्द केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मिलेंगे. सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में झा ने लिखा, ‘‘मैथिली को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिलाने के लिए मैं जल्द केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात करूंगा. मैथिली भाषा का संरक्षण एवं संवर्धन शुरू से मेरी शीर्ष प्राथमिकता रही है. इसे शास्त्रीय भाषा की श्रेणी में शामिल करने का आधार मैंने वर्ष 2018 में ही तैयार करवा दिया था.’’ जद (यू) नेता ने दावा किया कि उनके प्रयासों से केंद्र सरकार द्वारा गठित मैथिली के विद्वानों की विशेषज्ञ समिति ने 31 अगस्त 2018 को पूर्ण की गई अपनी रिपोर्ट में 11 सिफारिशें की थीं. 

 लगभग 1300 साल पुरानी है मैथिली भाषा

उन्होंने कहा, ‘‘उनमें पहली सिफारिश थी- ‘मैथिली भाषा लगभग 1300 वर्ष पुरानी है और इसके साहित्य का विकास स्वतंत्र रूप से अनवरत होता रहा है. अत: इसे शास्त्रीय भाषा की श्रेणी में रखा जाये. पिछले छह वर्षों में समिति की कुछ सिफारिशों पर काम हुआ है, लेकिन इसे (मैथिली को) शास्त्रीय भाषा का दर्जा नहीं मिल पाया है.’’ बता दें कि कुछ दिन पहले ही 

मराठी, बांग्ला, पाली, प्राकृत और असमिया को  शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया था. इनके  अलावा छह भाषाओं – तमिल, संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम और उड़िया को पहले ही शास्त्रीय भाषाओं की सूची में शामिल किया जा चुका है. 

 वाजपेयी ने मैथिली को दी आठवीं अनुसूची में जगह

झा ने अपने पोस्ट में लिखा, ‘‘माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी की पहल पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने हम मिथिलावासियों की दशकों से लंबित मांग को पूरा करते हुए मैथिली भाषा को संविधान की अष्टम अनुसूची में शामिल किया था.’’ झा ने कहा, ‘‘बिहार में वर्ष 2005 में जब नीतीश कुमार जी के नेतृत्व में सरकार बनी, तब उन्होंने मैथिली को पुन: बीपीएससी (बिहार लोक सेवा आयोग) के पाठ्यक्रम में शामिल किया, जिसे पूर्व की कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) गठबंधन की सरकार ने पाठ्यक्रम से हटा दिया था.’’

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लेखक के बारे में

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प्रशांत तिवारी डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत पंजाब केसरी से करके राजस्थान पत्रिका होते हुए फिलहाल प्रभात खबर डिजिटल के बिहार टीम तक पहुंचे हैं, देश और राज्य की राजनीति में गहरी दिलचस्पी रखते हैं. साथ ही अभी पत्रकारिता की बारीकियों को सीखने में जुटे हुए हैं.

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