बिहार में चिलचिलाती धूप व गर्म हवाओं ने कराया लू का एहसास, जाने लू के लक्षण एवं सुरक्षा के उपाय

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बिहार में तापमान में निरंतर बढ़ोतरी परेशानी का सबब बनता जा रहा है. दिन में तेज धूप के साथ गर्म हवा मार्च के महीने में मई के मौसम का अहसास करा रही है. ऐसे में लू लगने का खतरा बढ़ गया है.

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बिहार में तापमान में निरंतर बढ़ोतरी परेशानी का सबब बनता जा रहा है. दिन में तेज धूप के साथ गर्म हवा मार्च के महीने में मई के मौसम का अहसास करा रही है. आगे अभी यही स्थिति अभी बनी रहेगी. ऐसे में सभी को सावधान रहने की जरुरत है. जिससे वे रोग ग्रस्त होने से बच सकें.

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जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार भारती ने बताया कि दोपहर में घर से निकलने से बचना चाहिए या अधिक धूप की स्थिति में छाता का उपयोग करना चाहिये. लू लगने की स्थिति में चिकित्सकीय परामर्श जरूरी है. ऐसे प्राथमिक उपचार के तौर पर लू लगने पर ओआरएस का घोल पीना चाहिए ताकि अतिसार से बचा जा सकें. इसके इलाज के लिए जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त सुविधा भी उपलब्ध करायी गयी है.

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइन के मुताबिक तेज धूप और लू का सबसे अधिक खतरा नवजात शिशुओं एवं 65 साल से अधिक बुजुर्गों में होता है. इसके अलावा गर्भवती महिलाएं व जटिल रोगों (मधुमेह, ह्रदय रोग, अतिसार जैसे अन्य रोग) से पीड़ित लोगों में भी लू का खतरा अधिक होता है एवं इससे अत्यधिक जटिल समस्याएं पैदा होने की संभावना बढ़ जाती है.

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लू के लक्षण

अधिक गर्मी और शुष्क हवाओं को लू कहा जाता है. इनका तापमान सामान्य से अधिक होता है.लू में तेज बुखार से शरीर का तापमान 104 डिग्री फारेनहाइट या इससे अधिक हो जाता है.थकान, कमजोरी, चक्कर आना, बेहोश होना, सिर में तेज दर्द होना, खूब पसीना आना, उल्टी होना. गाढे रंग का पेशाब, मांसपेशियों में ऐंठन एवं भ्रम पैदा होना.

अत्यधिक गर्मी एवं पसीना आने से शरीर से नमक एवं पानी का तेजी से ह्रास होता है. अपर्याप्त मात्रा में पानी एवं नमक सेवन से डिहाइड्रेशन एवं हाइपोनेट्रेमिया (नमक की कमी) हो जाती है जिससे शरीर में ऐंठन की शुरुआत होती है. शरीर का तापमान 40.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने यह कोशिका संरचना में क्षति करने लगता है. इससे किडनी एवं लीवर फेलियर के साथ श्वसन एवं स्नायु संबंधित समस्याएं शुरू होती है एवं सही समय पर इलाज के अभाव में यह जानलेवा हो जाता है.

सुरक्षा के उपाय

कड़ी धूप में बाहर ना निकलें

अधिक से अधिक बार पानी पीयें, प्यास नहीं भी लगे तो भी पानी पीयें

हल्का भोजन करें एवं तरबूज, खीरा, नींबू, संतरा आदि का सेवन करें

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