रिमांड की अवधि हुई खत्म पूछताछ के बाद भेजे गये जेल
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :19 Apr 2016 1:00 AM (IST)
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मामला बड़हरा विधायक की बहन की हत्या का आरा : बड़हरा के राजद विधायक सरोज यादव की बहन शैल देवी की हत्या की गुत्थी सुलझाने को लेकर रिमांड पर लिये गये मिथिलेश कुमार और संतोष कुमार को पूछताछ के बाद मंडल कारा भेज दिया गया. मंडल कारा भेजे जाने के पूर्व दोनों का सदर अस्पताल […]
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मामला बड़हरा विधायक की बहन की हत्या का
आरा : बड़हरा के राजद विधायक सरोज यादव की बहन शैल देवी की हत्या की गुत्थी सुलझाने को लेकर रिमांड पर लिये गये मिथिलेश कुमार और संतोष कुमार को पूछताछ के बाद मंडल कारा भेज दिया गया. मंडल कारा भेजे जाने के पूर्व दोनों का सदर अस्पताल में स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया. गत 9 अप्रैल को विधायक की बहन शैल देवी दवा लाने के लिए चांदी थाना क्षेत्र के नरवीरपुर जा रही थी. इसी दौरान उनके साथ मारपीट की गयी थी.
जिसमें वह गंभीर रूप से जख्मी हो गयी थी. जिनका इलाज के दौरान पटना में मौत हो गयी थी. मौत के बाद पुलिस की बढ़ती दबिश के कारण दोनों ने न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया था. जहां से रिमांड पर लेने के लिए कोर्ट में आवेदन दिया गया था. कोर्ट से आदेश मिलने के बाद दोनों को तीन दिन के रिमांड पर लिया गया था.
जहां पुलिस ने घटना से जुड़ी कई बिंदुओं पर पूछताछ की. इस दौरान पुलिस को कई अहम सुराग भी हाथ लगे हैं. जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है.
पीओ का दो बार एफएसएल की टीम ने किया मुआयना : विधायक की बहन शैल देवी की मामले को सुलझाने को लेकर अबतक दो बार घटनास्थल पर एफएसएल की टीम आ चुकी है. जहां से कई सामान को जब्त कर जांच के लिए पटना ले गयी हैं. इसके पहले डीआईजी मो. रहमान भी घटनास्थल का मुआयना कर चुके हैं. जांच और पुलिस अनुसंधान के पूरा होने के बाद ही स्पष्ट हो पायेगा कि शैल देवी के साथ मारपीट हुई थी या एक हादसा हुआ था. फिलहाल अनुसंधान बाधित न हो, इसको लेकर पुलिस कुछ भी बताने से परहेज कर रही है.
घटना से खौफजदा हुए आरा के लोग
आरा़ जैसे ही छपरा में न्याय के मंदिर में बम बलास्ट की घटना की खबर टीवी व सोशल मीडिया पर ब्रेक हुई, तो आरा नगरवासियों को आरा कोर्ट में हुए बलास्ट की याद ताजा हो गयी. सुरक्षा को लेकर तैनात जवान पूरी तरह सक्रिय हो गये. वहीं बार-बार बिहार के कई जगहों पर न्याय के मंदिर में हो रही बम बलास्ट की घटना से कोर्ट की सुरक्षा पर प्रश्न चिह्न खड़े हो गये हैं.
ब्लास्ट के बाद आरा कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था हुई अभेद
आरा कोर्ट परिसर में हुए बम बलास्ट के बाद तत्कालीन चीफ जस्टिस एल नरसिंह रेड्डी आरा पहुंचे थे. उन्होंने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद कोर्ट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था त्रिस्तरीय कर दी गयी थी.
इसके साथ ही कई जगहों पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाये गये हैं. कोर्ट परिसर में जाने के पहले मुख्य द्वार पर लगी मेटल डिटेक्टर डोर में प्रवेश कर जाना होता है. जैसे ही मेटल डिटेक्टर डोर से प्रवेश करते हैं, वैसे ही सुरक्षा में तैनात जवान लोगों की चेकिंग करते हैं.
महिलाओं की जांच के लिए बगल में सुरक्षा में तैनात महिला पुलिस कर्मियों द्वारा जांच की जाती है. जब पूरी तरह सुरक्षाकर्मी संतुष्ट हो जाते हैं, तो ही कोर्ट परिसर में जाने देते हैं.
कोर्ट परिसर में बंदियों से नहीं होती है मुलाकात
मंडलकारा से आनेवाले बंदियों को सीधे कोर्ट परिसर में स्थित बंदी हाजत में रखा जाता है. इसके बाद जिस कोर्ट के बंदी है, उन्हें सुरक्षा व्यवस्था के बीच उस कोर्ट में उपस्थापित किया जाता है. इस दौरान किसी भी बंदी की कोर्ट परिसर में उनसे मिलने आये लोगों से मुलाकात नहीं होती है. कोर्ट में उपस्थापित होने के बाद सीधे वाहन द्वारा मंडलकारा भेज दिया जाता है.
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