कुंडेश्वर शिवमंदिर का है पौराणिक महत्व

Published at :07 Mar 2016 2:37 AM (IST)
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कुंडेश्वर शिवमंदिर का है पौराणिक महत्व

शाहपुर/बिहिया : हिंदुओं की धार्मिक आस्था का केन्द्र प्रखंड का कुंडेश्वर शिवमंदिर पौराणिक एवं ऐतिहासिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण है़ मंदिर की बनावट हीं इसको पुरातन मंदिरों की श्रेणी में खड़ा करती है, फिर भी यह मंदिर स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा सरकारी उपेक्षा का दंश झेल रहा है़ शताब्दियों से प्रत्येक वर्ष सावन एवं फागुन माह […]

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शाहपुर/बिहिया : हिंदुओं की धार्मिक आस्था का केन्द्र प्रखंड का कुंडेश्वर शिवमंदिर पौराणिक एवं ऐतिहासिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण है़ मंदिर की बनावट हीं इसको पुरातन मंदिरों की श्रेणी में खड़ा करती है, फिर भी यह मंदिर स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा सरकारी उपेक्षा का दंश झेल रहा है़ शताब्दियों से प्रत्येक वर्ष सावन एवं फागुन माह की शिवरात्री के दिन यहां मेला लगता है, जिसकी स्थानीय प्रशासन द्वारा बंदोबस्ती की जाती है़

द्वापरयुग में बना है मंदिर : कुंड़वा शिव मंदिर भोजपुर जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर पश्चिम आरा-बक्सर मुख्य मार्ग एनएच 84 से बिलकुल सटे उतर दिशा में अवस्थित है़ शाहपुर प्रखंड मुख्यालय से लगभग तीन किलोमीटर पूरब दिशा में यह मंदिर है़ यह प्राचीन शिवमंदिर कब बना, इसका कोई स्पष्ट प्रमाण तो नहीं मिलता है, परन्तु लोक गाथायों एवं किवदंतियों के अनुसार यह महाभारत कालिन यानि द्वापरयुग का बताया जाता है़ मंदिर की बनावट एवं यहां स्थापित कलाकृतियों से यह अनुमान लगाया जाता है कि मंदिर महाभारत कालिन राजाओं द्वारा बनवाया गया है़
वाणासुर ने स्थापित किया है यह मंदिर : किदवंतियों के अनुसार यह मंदिर राजा वाणासुर द्वारा बनाया गया है़ वाणासुर इसी स्थान पर आकर गंगा नदी के किनारे तपस्या करता था़ ;छठवीं शताब्दी के आस पास महाकवि वाणभट्ट द्वारा रचित हर्षचरित में यहां गंगा नदी होने का प्रमाण मिलता है द्घ गंगा नदी के किनारे वाणासुर ने तपस्या के कुछ वर्षो बाद यहां महायज्ञ करने की ठानी़ यज्ञ के लिए हवन कुंड की खुदाई होने लगी़ इसी खुदाई के दौरान श्रमिकों का फावड़ा ;कुदालद्घ शिवलिंग के आकृति वाले पत्थर से टकराया और उस शिवलिंग से खुन बहने लगा़ खून से लथपथ शिवलिंग को बाहर रखा गया
और इसकी सूचना वाणासुर को दी गई़ वाणासुर द्वारा उस रक्तरंजित शिवलिंग की स्थापना की गई़ चुंकि यह शिवलिग हवनकुंड से मिली थी, इसलिए यह कुंडेश्वर शिव के नाम से जाना जाता है़ कहा जाता है कि भगवान शिव ने वाणासुर के स्वप्न में आकर उक्त शिवलिंग को स्थापित करने का आदेश दिया था़ ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक दृष्टिकोण से अत्यन्त हीं महत्वपूर्ण यह शिवमंदिर समुचित व्यवस्था और देखरेख के अभाव में अपना अस्तित्व खो रहा है़
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