शहर में निकाली गयी प्रभातफेरी
Updated at : 14 Oct 2019 1:04 AM (IST)
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आरा : विश्व अर्थाराइटिस दिवस पर लोक जागृति आरा द्वारा संचालित लोक जागृति प्राकृतिक आरोग्य केंद्र पर एक दिवसीय मुफ्त जांच शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 150 मरीजों के विभिन्न रोगों का एक्यूप्रेशर, होमियोपैथ, आयुर्वेद एवं सुजोग पद्धति से मुफ्त उपचार किया गया. वहीं सदर अस्पताल लोक जागृति के बैनर तले प्रभातफेरी निकाली […]
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आरा : विश्व अर्थाराइटिस दिवस पर लोक जागृति आरा द्वारा संचालित लोक जागृति प्राकृतिक आरोग्य केंद्र पर एक दिवसीय मुफ्त जांच शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 150 मरीजों के विभिन्न रोगों का एक्यूप्रेशर, होमियोपैथ, आयुर्वेद एवं सुजोग पद्धति से मुफ्त उपचार किया गया.
वहीं सदर अस्पताल लोक जागृति के बैनर तले प्रभातफेरी निकाली गयी, जो शहर के विभिन्न मार्गों से होती हुई हरिजी के हाता स्थिति लोक जागृति के कार्यालय में आकर समाप्त हुई. इस दौरान लोगों को अर्थाराइटिस एवं उससे संबंधित अन्य बीमारियों के बारे में जागरूक किया गया.
इस अवसर पर विकास कुमार गुप्ता, आरती श्रीवास्तव, निर्मला सिन्हा एवं मनोज गुप्ता ने कहा कि गलत खान-पान, रहन-सहन, जलवायु एवं पर्यावरण प्रदूषण, पैरासाइट, व्यायाम की व्यापक कमी के कारण आज शरीर के विभिन्न जोड़ों में अर्थाराइटिस सिर्फ बढ़ती उम्र के लोगों एवं बुजुर्गों में ही नहीं, बल्कि बच्चो में भी देखने को मिल रही है.
यदि समय रहते इस पर ध्यान नही दिया गया, तो व्यक्ति विकलांग तक हो सकता है. इस बीमारी में कैल्सियम, विटामिन-डी, मिनरल्स और प्रोटीन की कमी की वजह से हड्डी कमजोर हो जाती है और जोडों के बीच में लिंगामेंट एवं कार्टिलेज खराब होने लगती है और मांसपेशियों में कमजोरी आ जाती है. हालांकि आरंभिक अवस्था में इसका इलाज किया जाए, तो इसे जड़ से ठीक किया जा सकता है.
वक्ताओं ने कहा कि अंग्रेजी दवा से दबाया तो जा सकता है, परंतु जड़ से ठीक नहीं किया जा सकता है. वहीं अंग्रेजी दवा के ज्यादा प्रयोग से हार्ट और किडनी खराब हो जाती है, जिससे मरीज असमय ही काल के गाल में समा जाता है. अर्थाराइटिस को जड़ से खत्म करने का एकमात्र उपाय एक्यूप्रेशर एवं व्यायाम है. जिसमें मरीज बिना दवा के बीमारी को जड़ से खत्म कर दर्दरहित जीवन यापन कर सकता है.
धन्यवाद ज्ञापन करते हुए लोक जागृति आरा के सचिव एवं वरिष्ठ पत्रकार राजीव नयन अग्रवाल ने कहा कि यदि अर्थाराइटिस से पीड़ित व्यक्ति अपने खाने में हरी साग-सब्जियों के साथ कैल्सियम, विटामिंस, मिनरल्स, दाल और सप्ताह में डेढ़ घंटे तक धूप में विटामिन डी ले और नियमित व्यायाम करें तथा इसके साथ एक्यूप्रेशर योग डिटॉक्स समय-समय पर करते रहें तो अर्थाराइटिस को शुरुआती दौर में ही रोका जा सकता है और गंभीर होने से बचाया जा सकता है.
इस अवसर पर योग प्रशिक्षक कुंती शर्मा, आयुर्वेदाचार्य उषा जी, प्रीति श्रीवास्तव, अधिवक्ता जयशंकर तिवारी, सुधा शंकर तिवारी, सोनल, श्रेया अग्रवाल, हर्षित, आनंद, मुदित, शिवानी अग्रवाल, अनुराधा अग्रवाल भी उपस्थित थे.
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