पिस्टल, फेसबुक लाइव और ताबड़तोड़ फायरिंग, जानिए भरत तिवारी एनकाउंटर की पूरी कहानी
भरत तिवारी एनकाउंटर की कहानी
Bharat Tiwari Encounter Inside Story: भोजपुर में पुलिस और पिस्टलधारी युवक भरत भूषण तिवारी के बीच हुई मुठभेड़ के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. पुलिस का दावा है कि युवक लगातार फायरिंग कर रहा था, जबकि परिवार का आरोप है कि आत्मसमर्पण के बाद उसे गोली मारी गई.
Bharat Tiwari Encounter Inside Story: बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में बुधवार पुलिस और एक पिस्टलधारी युवक के बीच सीधी मुठभेड़ हो गई. इस गोलीबारी में युवक को गोलियां लगीं, जिसके बाद इलाज के दौरान पटना के पीएमसीएच (PMCH) अस्पताल में उसकी मौत हो गई. मृतक की पहचान बिलौटी गांव के रहने वाले 30 साल के भरत भूषण तिवारी के रूप में हुई है. भरत के पिता काशीनाथ तिवारी पुलिस विभाग से बतौर चालक सिपाही रिटायर हो चुके हैं.
फेसबुक लाइव आकर पुलिस को दी चुनौती
मुठभेड़ से ठीक पहले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. इस वीडियो में भरत भूषण तिवारी एक हाथ में लोडेड पिस्टल और दूसरे हाथ में मोबाइल लेकर फेसबुक पर लाइव था. वह घर की छत पर खड़े होकर लगातार पुलिस को ललकार रहा था और हथियार लहरा रहा था.
पुलिस की घेराबंदी के बीच उसने फेसबुक पर दो-तीन वीडियो लाइव ब्रॉडकास्ट किए. इसके बाद वह किसी तरह घर से निकलकर गांव के बाहर खेतों की तरफ भाग गया.
15 से ज्यादा राउंड चलीं गोलियां
एसपी राज ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि बुधवार सुबह करीब 9 बजे पुलिस को सूचना मिली थी कि भरत भूषण तिवारी हथियार लहराकर हवाई फायरिंग कर रहा है. इसके बाद स्थानीय थाना पुलिस और एसटीएफ (STF) की टीम मौके पर पहुंची. पुलिस ने उसे बार-बार सरेंडर करने के लिए कहा, लेकिन वह रुक-रुक कर पुलिस पर गोलियां चलाता रहा.
हालात बिगड़ते देख बुलेटप्रूफ जैकेट पहने एसटीएफ के जवानों ने उसे चारों तरफ से घेरा. जब वह नहीं माना तो पुलिस ने आत्मरक्षा में गोलियां चलाईं, जो भरत के दोनों पैरों के घुटने और जांघ में लगीं. इस दौरान आरोपी की तरफ से 8-10 राउंड और पुलिस की तरफ से 4-5 राउंड फायरिंग की बात सामने आई है. पुलिस ने मौके से एक पिस्टल, दो कारतूस, एक मैगजीन और दो खोखा बरामद किया है.
अस्पताल ले जाते समय तोड़ा दम
गोली लगने से घायल भरत भूषण को पुलिस तुरंत इलाज के लिए सदर अस्पताल, आरा लेकर गई. वहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे पीएमसीएच पटना रेफर कर दिया. पटना में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.
पुलिस ने घटना से एक दिन पहले बयान दिया था कि युवक की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और उसे गिरफ्तार कर उसका इलाज कराया जाएगा. भरत एक साल पहले भी पुलिस अफसर से उलझने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में जेल जा चुका था.
दोबारा पिस्टल उठाने की कोशिश
मौके पर मौजूद अधिकारियों के मुताबिक, पुलिस लगातार भरत को समझा रही थी. भरत ने शर्त रखी कि अगर उसकी मांगें मान ली जाएं तो वह हथियार फेंक देगा. पुलिस के भरोसा देने पर उसने पिस्टल जमीन पर फेंक भी दी थी. लेकिन पुलिस का दावा है कि जैसे ही जवान उसे पकड़ने के लिए आगे बढ़े, उसने दोबारा जमीन से पिस्टल उठाने की कोशिश की. इसी वजह से पुलिस को मजबूरन जवाबी फायरिंग करनी पड़ी.
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परिवार ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
इस एनकाउंटर के बाद भरत के घर में कोहराम मच गया है. वह चार भाई-बहनों में मंझले नंबर पर था. उसका बड़ा भाई वसंत तिवारी और छोटा भाई चंदन तिवारी है. भरत की मां का कहना है कि उनके बेटे की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी.
मां का आरोप है कि भरत ने सरेंडर कर दिया था, इसके बावजूद पुलिस ने उसे पांच गोलियां मार दीं. घटना के बाद परिवार को भरत से मिलने तक नहीं दिया गया. पिता ने बताया कि भरत गांव में ही एक इलेक्ट्रिक बाइक का शोरूम खोलने की तैयारी में था और इसके लाइसेंस के लिए आवेदन भी किया था.
परिजनों का कहना है कि भरत समाज के मुद्दों पर आवाज उठाता था, लेकिन उसके पास पिस्टल कहां से आई, उन्हें नहीं पता. अब परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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