bhagalpur news. पुरानी रंजिश में खंती और गड़ासे से हमला कर युवक की हत्या

Author Atul kumar
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bhagalpur news. पुरानी रंजिश में खंती और गड़ासे से हमला कर युवक की हत्या

लोदीपुर थाना क्षेत्र के श्रीरामपुर डीह गांव में शनिवार अहले सुबह पुरानी रंजिश में भैरो मंडल (30) की हत्या कर दी गयी है

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लोदीपुर थाना क्षेत्र के श्रीरामपुर डीह गांव में शनिवार अहले सुबह पुरानी रंजिश में भैरो मंडल (30) की हत्या कर दी गयी है. युवक के चेहरे व सिर पर भोथड़े खंती और गड़ासे से 25 बार प्रहार, तो उसके बांए हाथ पर भी तीन जगहों पर गहरे जख्म के निशान हैं. पिटाई के बाद सभी हमलावर, मरा समझ कर भाग गये. जिसके बाद स्थानीय लोगों ने परिजनों और पुलिस को सूचना दी. जब लोग युवक के करीब पहुंचे तो देखा कि वह जीवित है. फिर 112 नंबर की पुलिस के वाहन से युवक को जेएलएनएमसीएच मायागंज अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के क्रम में मौत हो गयी. परिजनों का आरोप है कि युवक का समुचित इलाज नहीं किया गया. वे लोग सुबह सात बजे अस्पताल पहुंच गये थे, लेकिन विलंब से इलाज प्रारंभ किया गया. जख्मों पर बिना स्टीच लगाये ही उसे वार्ड भेज दिया गया. 10.30 बजे से उसकी मौत हो गयी. इधर, अस्पताल पहुंची लोदीपुर पुलिस ने युवक के शव का पोस्टमार्टम करवा कर परिजनों को सुपुर्द कर दिया है. मृतक के मौसरे सह सौतेले भाई महावीर मंडल ने गांव के ही कुल छह लोग सिरू मंडल, शुकर मंडल, बंधु मंडल, बबलू मंडल, प्रिंस मंडल व मुगद मंडल को नामजद करते हुए प्राथमिकी दर्ज करायी है. लोदीपुर पुलिस मामले क�� जांच करने के साथ आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है. डीएसपी विधि व्यवस्था नवनीत कुमार ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गयी है. घायल अवस्था में भैरो ने दो हमलावरों का बताया नाम

घायल का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें ग्रामीणों द्वारा गंभीर रूप से घायल खून से लथपथ भैरो मंडल से पूछा जा रहा था कि किसने मारा है. युवक ने कराहते हुए बंधु मंडल, बबलू मंडल का नाम लिया और कहा कि और लोग भी थे, लेकिन मुझे जल्दी से अस्पताल ले चलो.

युवक के पिता को मारी गयी थी सात गोली

परिजनों ने बताया कि रंजिश की जड़े 40 साल पुरानी है. लगभग 40 साल पहले गांव में एक प्रेम-प्रसंग का मामला सामने आया था. जिसके बाद सिरू मंडल और मृतक के पिता हरिचंद मंडल एक दूसरे के दुश्मन बन गये थे. इसी दुश्मनी में 40 वर्ष पहले हरिचंद मंडल को सात गोली मारी गयी थी, लेकिन लंबे इलाज के बाद उनकी जान बच गयी. इसके बाद दुश्मनी बढ़ती गयी और अगली पीढ़ी ने इस दुश्मनी को स्वीकार किया. तीन वर्ष पहले हरिचंद मंडल की मृत्यु हो चुकी है. ग्रामीणों ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच अक्सर मारपीट होती है. चार माह पहले ही मृतक के छोटे भाई सिंटू मंडल की विरोधियों ने पिटाई कर दी थी. लंबे इलाज के बाद उसकी जान बची. परिजनों ने बताया कि इन दिनों अक्सर भैरो मंडल से विरोधियों का विवाद होता था.

परिवार पर टूटा विपत्तियों का पहाड़

भैरो मंडल मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था. वह अपने पीछे पत्नी उमा देवी, पांच वर्षीय ओम शंकर और दो वर्ष की अंशु को छोड़ गया है. परिजनों ने बताया कि वह अपने परिवार का इकलौता कमाऊ सदस्य था.

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