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तिलकामांझी मुर्मू आदिवासी सुसार बैसी ने शहीद तिलकामांझी को दी श्रद्धांजलि

Updated at : 13 Jan 2025 9:22 PM (IST)
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तिलकामांझी मुर्मू आदिवासी सुसार बैसी ने शहीद तिलकामांझी को दी श्रद्धांजलि

तिलकामांझी मुर्मू आदिवासी सुसार बैसी की ओर से सोमवार

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तिलकामांझी मुर्मू आदिवासी सुसार बैसी की ओर से सोमवार को तिलकामांझी चौक स्थित तिलकामांझी स्मारक के समक्ष शहीद तिलकामांझी के शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया. वक्ताओं ने कहा कि प्रथम स्वतंत्रता सेनानी तिलकामांझी का 240 वां शहादत दिवस मनाया गया. इनका जन्म 11 फरवरी 1750 को भागलपुर के सुलतानगंज तिलकपुर गांव में हुआ था. उन्होंने अंग्रजों के विरुद्ध संघर्ष किया. उन्हें 13 जनवरी 1784 को तिलकामांझी चौक स्थित बरगद के पेड़ से लटका कर फांसी दे दी गयी. इस मौके पर पालटन हेम्ब्राम, राजेश हेम्ब्राम, देव नारायण मरांडी, महेंद्र प्रकाश सोरेन, संतोष हेम्ब्राम, प्रदीप मुर्मू, रविंद्र कुसवाहा, श्रेयासी हेम्ब्राम, सोफी सोरेन, अनामिका किस्कू, अस्वानी किस्कू आदि उपस्थित थे. भाकपा-माले ने शहीद तिलकामांझी का शहादत दिवस मनाया भाकपा माले व एक्टू कार्यकर्ताओं ने सोमवार को सुरखीकल यूनियन कार्यालय में अमर शहीद तिलकामांझी का शहादत दिवस मनाया गया. कार्यकर्ताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए आजादी, संविधान व लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प लिया. एक्टू के राज्य सचिव व भाकपा-माले के नगर प्रभारी मुकेश मुक्त ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की. उन्होंने कहा कि शहीद तिलकामांझी भागलपुर प्रक्षेत्र के वास्तविक हीरो हैं. किसानों-मजदूरों के अधिकारों की रक्षा एवं देश की आजादी के लिए उन्होंने लड़ाई लड़ी. अदम्य साहसी योद्धा आजादी आंदोलन के प्रथम शहीद नायक थे. तिलकामांझी ब्रांच सचिव अमर कुमार, नगर कमेटी सदस्य अमित गुप्ता, एक्टू के प्रमोद ठाकुर, सुनील कुमार गुप्ता, करण कुमार, अंजली कुमारी, मृत्युंजय कुमार, मो रंजू, राजू साव, मनीष कुमार, पूनम देवी, बुधनी उरांव, बबलू कुमार, मो मुन्ना आदि कार्यक्रम में शामिल हुए. क्रांतिकारी तिलकामांझी की 240वीं शहादत दिवस पर संगोष्ठी आयोजित

फ्रेंड्स ऑफ तिलकामांझी सामाजिक मित्र मंडली भागलपुर की ओर से स्थानीय तिलकामांझी स्थित कार्यालय में वीर आदिवासी तिलकामांझी की 240वीं शहादत दिवस पर संगोष्ठी हुई. अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष इंदुभूषण झा ने की. प्रधान संरक्षक जगतराम साह कर्णपुरी ने कहा कि अमर शहीद तिलकामांझी का नाम आजादी आंदोलन के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है. इंदुभूषण झा ने कहा कि आदिवासी वीर योद्धाओं का महत्वपूर्ण योगदान है. राज कुमार झा, चंदन झा, सुमन भारती, राणा पोद्दार, पवन यादव अमीत कुमार सरस्वती ने भी संबोधित किया. संगोष्ठी का संचालन अमित प्रताप सिंह ने किया. संगोष्ठी के पूर्व सदस्यों ने सामूहिक रूप से तिलकामांझी चौक स्थित प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की.

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