प्रभारी कुलपति ने रिपोर्ट पर दिये सकारात्मक आदेश , विभाग में पड़ी है फाइल, मानदेय को तरस रहे कर्मी
Published by : ATUL KUMAR Updated At : 12 Jun 2026 11:55 AM
तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के एमबीए विभाग के मामले में प्रभारी कुलपति प्रो विमलेंदु शेखर झा ने जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सकारात्मक कार्रवाई करने का आदेश कर दिया है
एमबीए विभाग के फैकल्टी मेंबर को दस माह से मानदेय का भुगतान नहीं
भागलपुर से आरफीन जुबैर की रिपोर्ट
तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के एमबीए विभाग के मामले में प्रभारी कुलपति प्रो विमलेंदु शेखर झा ने जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सकारात्मक कार्रवाई करने का आदेश कर दिया है. बताया जा रहा कि फाइल एमबीए विभाग में ही पड़ा है. एमबीए विभाग से फाइल पर आगे की प्रक्रिया कर अबतक विवि को नहीं भेजी गयी है. ऐसे में विभाग के कार्यरत कर्मियों को मानदेय का भुगतान फंस गया है. विभाग के फैकल्टी मेंबर व कर्मचारियों का कहना है कि मानदेय का भुगतान नहीं होने से भुखमरी के कगार पर है. परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा है. विभाग के निदेशक से कई बार मानदेय भुगतान को लेकर आग्रह किया गया. इसके बाद कुछ नहीं हो रहा.तूफान में दरवाजा व खिड़की के शीशे टूटे
कुछ दिन पहले आये तूफान में विभाग के ऊपर मंजिला के एक कमरा का दरवाजा व खिड़की का शीशा टूट गया है. ऊपरी मंजिला पर बारिश का पानी जमाव है. भवन के आधा हिस्से की बिजली खराब है. ऊपर से टंकी नीचे गिरने से पानी का भी संकट है.
कर्मियों का दर्द, जीवन यापन के लिए घरवाले कर रहे सहयोग
विभाग के फैकल्टी मेंबर डॉ पंकज कुमार, डॉ मणिकांता, डॉ हारिश कुमार, ब्यूटी कुमारी, डॉ काजी मोहम्मद कमरान, कर्मचारी डॉ आशीष कुमार, राजेश चौधरी, जय नारायण पंडित व पंकज चौधरी ने दर्द बताते हुए कहा कि दस माह से मानदेय का भुगतान नहीं होने से बहुत सारे परेशानी से गुजर रहे है. यहां तक के परिवार का जेवर तक बेचने की स्थिति उत्पन्न हो गयी है. ताकि दो वक्त की रोटी मिल सके. उन्होंने कहा कि बच्चों की पढ़ाई, बीमार पड़ने पर दवा व जरूरी काम करने के लिए पैसे पास में नहीं है. उनलोगों का छह माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी सेवा अवधि विस्तार नहीं की गयी है.विभाग में आय व खर्च को लेकर कमेटी दे चुकी है रिपोर्ट
एमबीए विभाग में आय, खर्च व कर्मियों के मानदेय बढ़ाने को लेकर प्रभारी कुलपति के निदेश पर जांच कमेटी गठित की थी. इसमें सिंडिकेट सदस्य डॉ मृत्युंजय सिंह गंगा, डॉ गौरी शंकर डोकानिया व डॉ पवन कुमार सिन्हा थे. कमेटी ने पूरे मामले की जांच कर प्रभारी कुलपति को फरवरी में ही रिपोर्ट सौंप दी थी. रिपोर्ट के आधार पर प्रभारी कुलपति ने फाइन पर सकारात्मक पहल की है. इस बाबत विभाग के निदेशक को आगे की प्रक्रिया कर फाइल विवि में बढ़ाना है. ताकि उनलोगों का भुगतान व सेवा अवधि विस्तार की आगे की प्रक्रिया की जा सके.
विवि में फाइल बढ़ाये जाने पर समस्या का होगा निदान
एमबीए विभाग के एडवाइजरी कमेटी के सदस्य सह सिंडिकेट सदस्य डॉ मृत्युंजय सिंह गंगा ने कहा कि विभाग में कार्यरत कर्मियों का बकाया मानदेय का भुगतान होना चाहिए. विवि प्रशासन भुगतान करने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि मामले को लेकर विशेष रूप से प्रभारी कुलपति से उनकी बात हुई है. उनका बकाया मानदेय व सेवा अवधि विस्तार भी किया जायेगा.विभाग को ही भेजना है बिल व परफॉरमेंस रिपोर्ट
एमबीए विभाग से ही कर्मियों का बिल भेजना है. साथ ही उनका परफॉरमेंस रिपोर्ट विवि को भेजा जाना है. विभाग से अबतक दोनों ही दस्तावेज नहीं भेजा गया है. बताया जा रहा है कि परफॉरमेंस रिपोर्ट नहीं भेजे जाने से सेवा अवधि विस्तार की प्रक्रिया बीच में ही अटका है. ऐसे में उनलोगों की परेशानी बढ़ा दी है.
फैकल्टी का सेवा अवधि विस्तार नहीं, नामांकन को लेकर प्रक्रिया शुरू
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार एमबीए विभाग में नामांकन के लिए आवेदन मिलना शुरू हो गया है. इच्छुक विद्यार्थी पाठ्यक्रम में नामांकन कराने के लिए आवेदन ले रहे है. ऐसे में सवाल उठ रहा कि जब विवि के फैकल्ट मेंबर का सेवा अवधि विस्तार नहीं किया गया है. नामांकन लेने वाले विद्यार्थियों को पठन-पाठन कौन करायेगा.
विभाग के निदेशक ने कहाएमबीए विभाग की निदेशक डॉ निर्मला कुमारी ने कहा कि फाइल पर सारी प्रक्रिया पूरा करने के बाद विवि में भेज दी गयी है. इसमें मानदेय का भुगतान व फैकल्टी मेंबर का परफॉरमेंस रिपोर्ट भी शामिल है. फाइल नहीं भेजने की बात गलत है. फाइल बहुत पहले ही भेजी जा चुकी है. प्रयास किया जा रहा कि उनलोगों का मानदेय का भुगतान हो जाये. साथ ही सेवा अवधि विस्तार भी हो जाये. उन्होंने कहा कि जो भी आरोप लगाये जा रहे है. सरासर निराधार व गलत है.
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