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भागलपुर में कहीं चालू नहीं हुआ कैथलैब, हार्ट अटैक के मरीजों के लिए सरकारी इलाज का अभाव

Updated at : 23 Jan 2025 11:44 AM (IST)
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भागलपुर में कहीं चालू नहीं हुआ कैथलैब, हार्ट अटैक के मरीजों के लिए सरकारी इलाज का अभाव

- सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में अब तक चालू नहीं हुआ हार्ट के इलाज के लिए एडवांस कैथलैब

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प्रभात खबर पड़ताल : कैसे सुधरे सेहत – सीरीज पार्ट 2

– सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में अब तक चालू नहीं हुआ हार्ट के इलाज के लिए एडवांस कैथलैब

गौतम वेदपाणि, भागलपुर

ठंड के मौसम में लोगों को तेजी से हार्ट अटैक आ रहे हैं. हार्ट अटैक आने के बाद मरीजों का जेएलएनएमसीएच समेत जिले के सरकारी अस्पतालों में सिर्फ प्राथमिक उपचार हो पाता है. एंजाइना पेन जैसे केस में मायागंज अस्पताल से सिर्फ इसीजी, इको कार्डियोग्राफी टेस्ट व पेसमेकर की नि:शुल्क सुविधा मिलती है. लेकिन हार्ट ब्लॉकेज जैसे केस की पहचान के लिए यहां एंजियोग्राफी जांच की व्यवस्था नहीं है. वहीं ब्लॉकेज से निजात के लिए नसों में स्टेंट या स्प्रिंग लगाने के लिए एंजियोप्लास्टी की व्यवस्था नहीं है. हृदय रोगियों का इलाज के लिए जेएलएनएमसीएच से संबद्ध सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में सिर्फ ओपीडी का संचालन हो रहा है. जबकि इसी अत्याधुनिक परिसर में हृदय रोगियों के पूर्ण उपचार के लिए एडवांस कैथ लैब को चालू करना है. सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का उद्घाटन बीते वर्ष छह सितंबर को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने किया था. उद्घाटन हुए साढ़े चार माह बीतने के बावजूद यहां कैथलैब की शुरुआत नहीं हुई है.

निजी क्लीनिकों के भरोसे हार्ट के मरीज :

सरकारी स्तर पर हृदयरोग के इलाज में संसाधन की कमी से शहर में निजी हार्ट क्लीनिकों का धंधा फल फूल रहा है. कई क्लीनिकों में आयुष्मान भारत योजना से गरीब व 70 वर्ष से अधिक उम्र के मरीजों का इलाज हो जाता है. लेकिन मध्यम वर्गीय परिवार व 70 वर्ष से कम उम्र के लोगों को हार्ट अटैक आने के बाद यह सोचकर चिंता होने लगती है कि इलाज के लिए पैसे कहां से आयेंगे. मजबूरी में जब मरीज मायागंज अस्पताल जाते हैं तो मरीज की स्थिति को गंभीर बताकर रेफर कर दिया जाता है.

इलाज में विलंब से मरीज की हुई थी मौत :

बांका के अमरपुर निवासी रमाकांत पांडेय को हार्ट अटैक आया था. उन्हें इलाज के लिए मायागंज अस्पताल लगाया गया था. लेकिन 10 जनवरी को उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर कर दिया गया. पैसे के अभाव में इनका इलाज निजी क्लीनिक में नहीं हो पाया. इलाज में विलंब के कारण मरीज की मौत 13 जनवरी हो गयी थी. उनके बेटे रमाकांत ने सरकार से मांग की कि मायागंज अस्पताल में हार्ट अटैक के मरीजों के इलाज की बेहतर व्यवस्था हो. ऐसे कई उदाहरण हैं, जब इलाज के अभाव में हार्ट अटैक के मरीज जान गंवा रहे हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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