bhagalpur news. श्रीराम ने रावण वध कर अहंकार और अधर्म पर दिलायी धर्म की विजय

Published by : ATUL KUMAR Updated At : 29 Dec 2025 12:56 AM

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भगवान श्रीराम ने रावण वध कर अहंकार एवं अधर्म पर धर्म का विजय दिलायी

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भगवान श्रीराम ने रावण वध कर अहंकार एवं अधर्म पर धर्म का विजय दिलायी. रावण की मृत्यु उसके अहंका और ब्रह्माजी से मिले वरदान के कारण हुई. अंतिम क्षणों में रावण ने राम को गुरु मानकर सद्गति पायी. राम-रावण युद्ध के बाद विभीषण का राज्याभिषेक और सीताजी की अग्निपरीक्षा के साथ राम-राज्य की स्थापना हुई. उक्त बातें आमड़ापाड़ा झारखंड से आये पंडित रविशंकर ठाकुर ने भक्ति, विवेक और धर्म के महत्व पर प्रवचन करते हुए कही. रविवार को गोशाला परिसर में आठ दिवसीय श्रीराम कथा व रामलीला का समापन हो गया. गौशाला बन गयी अयोध्या, श्रद्धालुओं ने श्रीराम के स्वागत में खेली फूल की होली

समापन पर गौशाला को अयोध्या के रूप में प्रदर्शित किया. भगवान राम के स्वागत में फूल की होली खेली गयी. पंडित रविशंकर ठाकुर ने कहा कि श्रीलंका में पाप और पुण्य के बीच तथा धर्म और अधर्म के बीच युद्ध हुआ. रण में एक-एक कर रावण के सभी पुत्रों व भाइयों का नाश हुआ. अंतत: जब सेना कम पड़ी, तो रावण ने श्री राम प्रभु की सेना को नष्ट करने के लिए छह माह सोने वाले भाई कुंभकर्ण को असमय ही जगाया. यह प्रयास भी निरर्थक साबित हुआ और कुंभकर्ण को भी वीरगति प्राप्त हुई. आयोजन में संरक्षक विनोद अग्रवाल, विकाश बुधिया, राजेश खेतान, चिंटू अग्रवाल, बसंत जैन, हरि खेतान, अलका खेतान, मनीषा अग्रवाल, रजनी बुधिया, खुशबू खेतान और बबीता अग्रवाल शामिल हुए.

रामलीला में रावण समेत सभी पुत्रों व सेनाओं के वध के दृश्य को किया जीवंत

आखिरी दिन श्वेता सुमन निर्देशित रामलीला में पटना से आये कलाकारों रावण वध, भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन और रामराज्य स्थापित करने और फूल की होली के दृश्य को जीवंत कर दिया. इसमें दिखाया कि रावण ने फिर मेघनाद को युद्ध भूमि में भेजा. मेघनाथ के शक्तिबाण से लक्ष्मण बेहोश हो गये. उनका उपचार करने के लिए हनुमान विभीषण के कहने पर सुषेण वैद्य को भवन सहित उठा लाये. उन्होंने सूर्योदय से पहले हनुमान से संजीवनी लाने को कहा. इस पर हनुमान पूरा का पूरा पहाड़ ही उठा लाये. संजीवनी के उपचार से लक्ष्मण को होश आया. इसके बाद लक्ष्मण ने मेघनाद का वध कर दिया. आखिर में स्वयं रावण युद्ध भूमि में आया. राम का प्रताप देख वह आकाशमार्ग में पहुंच गया, जहां पहुंचकर प्रभु श्री राम ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर उसकी नाभि का अमृत सोख लिया और उसका वध कर दिया. इस दृश्य को देखकर भक्तजन भाव-विभोर हो उठे और पूरा आयोजन स्थल प्रभु श्री राम के जयकारों से गूंज उठा.

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