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bhagalpur news. शब-ए-बारात गुनाहों से निजात की रात

Updated at : 02 Feb 2026 1:02 AM (IST)
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bhagalpur news. शब-ए-बारात गुनाहों से निजात की रात

शब-ए-बारात उर्दू इस्लामिक कैलेंडर के शाबान माह के 15वीं तारीख को मनाया जाता है

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शब-ए-बारात उर्दू इस्लामिक कैलेंडर के शाबान माह के 15वीं तारीख को मनाया जाता है. इस रात को लैलेतुल-ए-बरात की रात भी कहा जाता है. इस रात में इबादत करने वालों को एक हजार महीनों के बराबर सवाब मिलता है. शब-ए-बारात तीन फरवरी को मनाया जायेगा. इसे लेकर घरों, मस्जिदों व कब्रिस्तानों की साफ-सफाई जोरों पर की जा रही है. शब-ए-बारात में पकने वाले पकवान को लेकर सामग्री की बाजार में खरीदारी शुरू हो गयी है. मदरसा जामिया शहबाजिया के हेड शिक्षक मुफ्ती फारूक आलम अशरफी ने बताया कि शब-ए-बारात हर ईमानवालों के लिए खास महत्व रखता है. यह रात गुनाहों से निजात की रात है. इस रात में अल्लाह आसामान-ए-दुनिया की तरफ होते है. हजरत जिब्रिल फरिश्तों की टीम के साथ जमीन पर उतरते हैं. इबादत करने वालों की दुआ सीधे-सीधे अल्लाह तक पहुंचती है. मगरिब की नमाज के बाद लोग अपने-अपने रिश्तेदारों के कब्र पर जा कर दुआ-ए-मगफिरत करते हैं और इबादत में गुजारते हैं. यह सिलसिला सुबह की नमाज तक चलता रहता है. शब-ए-बरात के दूसरे दिन लोग नफील का रोजा रखते हैं. लोगों को इस रात मिलती है रोजी शब-ए-बरात की रात कई मायनों में महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस रात में फरिश्ते साल भर का लेखा-जोखा अल्लाह के समक्ष पेश करते हैं. किसे रोजी देना है, किसे दुनिया में भेजना है, दुनिया से कौन लोग परदा फरमायेंगे. तमाम चीजों पर अल्लाह की मुहर लगती है. इन लोगों की कबूल नहीं होती है दुआ इस रात में मुशरिक, मां-पिता से झगड़ा करने वाले, शराब पीने वाले, कमजोर व असहाय पर अत्याचार करने वाले और असहाय पर अत्याचार करने वाले और मन में दुश्मनी या बदला का भाव रखने वालों की अल्लाह दुआ कबूल नहीं फरमाते हैं. रिश्तेदारों से दूरी रखने वाले की भी दुआ कबूल नहीं होती है. ज्यादा से ज्यादा करें इबादत ईमानवालों को चाहिये कि घरों में जाग कर ज्यादा से ज्यादा इबादत करें. गुनाहों से तोबा करें. नफील की नमाज कसरत से पढ़ें. तस्बीहात पढ़ें, कुरान-ए-पाक की इबादत करें. त्योहार का उद्देश्य शब-ए-बारात आपस में मिल कर रहने का पैगाम देता है. कमजोर व असहायों लोगों की मदद नि:स्वार्थ भाव से करें. एक-दूसरे के लिए काम आये. किसी पर अत्याचार नहीं करें, समाज की भलाई के लिए काम करें. उलेमाओं ने पटाखा नहीं छोड़ने की अपील की भीखनपुर जामा मस्जिद के इमाम कारी नसीम अशरफी ने अपील की है कि शब-ए-बरात के मौके पर पटाखा छोड़ने से बचे. दूसरों को भी समझा-बुझाकर पटाखा नहीं छोड़ने के लिए जागरूक करें. शब-ए-बारात की रात ज्यादा से ज्यादा इबादत करें. बरहपुरा जामा मस्जिद के इमाम हाफिज कुदरत उल्लाह ने कहा कि पटाखा नहीं छोड़ें. पटाखा नहीं बल्कि पैसे में आग लगा रहे हैं. इस रात में अल्लाह को राजी करने के लिए कसरत से इबादत करें.

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ATUL KUMAR

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By ATUL KUMAR

ATUL KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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