मुंशी ने नगर आयुक्त से कहा,30 महीने से नहीं मिला वेतन,खाने-पीने पर आफत

Updated at : 18 May 2024 2:40 PM (IST)
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मुंशी ने नगर आयुक्त से कहा,30 महीने से नहीं मिला वेतन,खाने-पीने पर आफत

लगातार 30 महीने से वेतन नहीं मिलने की सजा भुगत रहे विधि शाखा प्रभारी के अधीनस्थ मुंशी भरत कुमार को खाने-पीने पर आफत आ गयी है.

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वरीय संवाददाता, भागलपुरलगातार 30 महीने से वेतन नहीं मिलने की सजा भुगत रहे विधि शाखा प्रभारी के अधीनस्थ मुंशी भरत कुमार को खाने-पीने पर आफत आ गयी है. उन्होंने नगर आयुक्त नितिन कुमार सिंह से गुहार लगायी है. परिवार का भरण-पोषण करने के लिए वेतन चालू करने की मांग की है. उन्होंने अवगत कराया है कि विधि शाखा में न्यायालय संबंधित कार्य का प्रतिदिन आदेशानुसार कर रहे हैं. सामान्य बोर्ड और सशक्त स्थायी समिति की बैठक की चिट्ठी बांटने का भी काम दिया जाता है और 30 महीने से वेतन रोक दिया गया है. वेतन के बारे में स्थापना सह लेखा प्रभारी को बाेलते हैं तो मुझे आश्वासन दिया जाता है कि एक बार जोड़ कर सारा वेतन भेज देंगे. जब बार-बार वेतन के बारे में बोलते हैं तो कहा जाता है कि नगर आयुक्त द्वारा रोका गया है. जबकि, हमारी उपस्थिति हर दिन हो रही है. वेतन नहीं मिलने के कारण आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गयी है. वेतन किस आधार पर किसके आदेश से रोका गया है, इसकी जांच नियम पूर्वक करायी जाये. पैसे के अभाव में हम अपने परिवार का सही ढंग से भरण-पोषण एवं इलाज नहीं करवा पा रहे हैं.

कर संग्राहक ने भी की वेतन चालू करने की मांग

इधर, कर संग्राहक एवं पर्यवेक्षक मनोज कुमार ने भी नगर आयुक्त से लिखित रूप में स्थानांतरण से मुक्त करने और वेतन पर रोक हटाकर चालू करने करने का आदेश जारी करने की मांग की है. उन्होंने भी कहा है कि मेरे बच्चे की पढ़ाई, पत्नी का इलाज नहीं करा पा रहे हैं. उन्होंने वेतन रोकने पर आरोप लगाया है कि कर शाखा प्रभारी प्रदीप कुमार झा ने सरकारी ऑडिट जांच कराने के लिए मुझसे सात हजार रुपये की मांग की थी. मैंने पांच हजार रुपये दिए थे. दो हजार रुपये आर्थिक तंगी के कारण नहीं दे पाया. इस पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर एक साजिश के तहत स्थानांतरण पंप खलासी के पद पर किया गया है. इस साजिश में कई लोगों का हाथ है. प्रदीप झा जब तक नहीं लिखेंगे तबतक वेतन भुगतान नहीं होगा. मेरा तीन माह का वेतन बिना वजह रोका गया है. जानबूझकर आर्थिक दंड दिया गया है. मेरे साथ यह अन्याय है.

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