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पियर लर्निंग पद्धति से बच्चों को पढ़ाने की तैयारी

Updated at : 25 Oct 2024 12:45 AM (IST)
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पियर लर्निंग पद्धति से बच्चों को पढ़ाने की तैयारी

सुलतानगंज प्राइमरी व मीडिल स्कूल में पियर लर्निंग पद्धति से बच्चों को पढ़ाने की तैयारी चल रही है

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सुलतानगंज प्राइमरी व मीडिल स्कूल में पियर लर्निंग पद्धति से बच्चों को पढ़ाने की तैयारी चल रही है. गुरुवार को बीइओ रेखा भारती की अध्यक्षता में बीआरसी में हुई बैठक में कई बिंदु पर विस्तार से चर्चा की गयी. बैठक में बीपीएम पुष्कर कुमार के अलावा इंवॉल्व लर्निंग सॉल्यूशन फाउंडेशन के ऑपरेशन लीड मौजूद थे.

निपुण भारत के तहत ग्रुप में बच्चों को पढ़ाने को लेकर इंवॉल्व लर्निंग सॉल्यूशन फाउंडेशन के ऑपरेशन लीड राहुल दा ने बताया कि सुलतानगंज के सभी प्राइमरी व मीडिल स्कूल के बच्चों को पियर लर्निंग अप्रोच से झिझक दूर कर पढ़ाई करायी जा रही है. भाषा और गणित विषय में निपुण कर लर्निंग समूह में पढ़या जा रहा है. 40 मिनट के कक्षा का विवरण सभी को बताया गया है. सभी स्वर व व्यंजन वर्ण का सही उच्चारण, पहचान और लेखन सीखना भाषा में मुख्य उद्देश्य है. भाषा के प्रति रुचि और आत्मविश्वास पैदा करना है. स्कूल प्रधान का पूर्व में उन्मुखीकरण किया गया था.

उन्मुखीकरण कार्यक्रम आज

पियर लर्निंग प्रोग्राम के तहत बीआरसी में सभी प्राथमिक व मध्य विद्यालय के चयनित मेंटर का शुक्रवार को एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम हुआ. बीइओ ने बताया कि सभी मेंटर शिक्षक को बीआरसी कार्यालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है. विद्यालय के सभी बच्चों में आयरन की गोली का वितरण करना है. वैसे विद्यालय जिनका सूची में नाम अंकित नहीं है. स्कूल प्रधान चयनित कर उन्मुखीकरण के लिए एक दिवसीय कार्यक्रम में भेजना सुनिश्चित करेंगे. लगभग 40 विद्यालयों में अभी तक मेंटर का चयन नहीं किया गया है. स्कूल प्रधान अविलंब चयन कर पियर लर्निंग प्रोग्राम का सफल संचालन करेंगे.

शीतला मंदिर में जगद्गुरुकुलम् का शुभारंभ

कहलगांव शीतला मंदिर परिसर पकड़तल्ला में ज्योतिर्मठ के वर्तमान जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती जी महाराज ने अपने ब्रह्मलीन सद्गुरुदेव की इच्छा से बिहार भागलपुर के कहलगांव में माता शीतला देवी मंदिर परिसर में जगद्गुरुकुलम् का शुभारंभ किया. काशी से काण्व शाखा के आचार्य पं शिवाकांत मिश्र, पं आशुतोष की उपस्थिति में शंकराचार्य के शिष्य रामानंद सिंह व उनकी पत्नी मंजूबाला सिंह ने दीप प्रज्वलित कर गुरुकुलम् का उद्घाटन किया. अथर्ववेद के विद्धान आचार्य पंडित अरुण ओझा के संचालन में 12 छात्रों से गुरुकुल का शुभारंभ हुआ. संचालक ने बताया कि 8-12 वर्ष के बच्चों का इसमें नामांकन होता है. गुरुकुलम् का उद्देश्य सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार करना है. वेद अनादि है और इसी में संसार का समस्त ज्ञान है. व्यक्ति वेद का सांगोपांग अध्ययन कर ले, तो इससे उसका सर्वांगीण अध्ययन हो जाता है. गुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती जी का सपना है कि सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार कर बच्चों में संस्कार के साथ भारतीय भेष-भूषा को एक बार पुन: प्रचारित करना है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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