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दरगाह पर चादरपोशी कर मांगी तरक्की व शांति की दुआ

Updated at : 22 Aug 2024 9:52 PM (IST)
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दरगाह पर चादरपोशी कर मांगी तरक्की व शांति की दुआ

खानकाह-ए-शहबाजिया मौलानाचक में हजरत मकदूम शहबाज मोहम्मद रहमतुल्लाह अलैह के उर्स-ए-पाक के दूसरे दिन यानी गुरुवार को कई कार्यक्रम हुए

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खानकाह-ए-शहबाजिया मौलानाचक में हजरत मकदूम शहबाज मोहम्मद रहमतुल्लाह अलैह के उर्स-ए-पाक के दूसरे दिन यानी गुरुवार को कई कार्यक्रम हुए. रात 10 बजे हजरत मकदूम शहबाज मो रहमतुल्लाह अलैह के दरगाह शरीफ पर सज्जादानशीं सैयद शाह इंतेखाब आलम शहबाजी ने चादरपोशी व गुलपोशी पेश की. इसके बाद सज्जादानशीं ने अमन, शांति, भाईचारा व तरक्की की विशेष दुआ मांगी. उर्स-ए-पाक के दूसरे दिन भी दरगाह शरीफ की जियारत के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी. सभी कार्यक्रम उप सज्जादानशीं सैयद शाह शानदार आलम शहबाजी की देखरेख में हुई. इससे पहले दिन में शाहजहानी मस्जिद में कुरानख्वानी व खत्म बुखारी शरीफ पढ़ी गयी. इस अवसर पर खानकाह के तमाम शहजादगान, मुफ्ती फारूक आलम अशरफी, हाफिज अबूलकलाम अशरफी सहित बड़ी संख्या में अकिदतमंद आदि मौजूद थे. नौ हाफिज व चार फाजिल की हुई दस्तारबंदी इस अवसर पर मदरसा जामिया शहबाजिया से कुरान-ए-पाक हिफ्ज कर चुके नौ हाफिज व चार फाजिल की दस्तारबंदी की गयी. इसमें सुलतानगंज के मो शहरेयार, खड़हारा बांका के मो नवेद रजा, मोअज्जमचक के मो ओवैस हसन, महगामा के मो दिलशाद रजा, राजनगर मधुबनी के मो आशिक हुसैन, माछीपुर के मो अहमद शहबाज व मो अबुतालिब अशरफी, बंसीटिकर के मो मानिक हसन व कबीरपुर के मो आरिफ शहबाजी है. इसके अलावा फाजिल की पढ़ाई पूरा कर चुके पूर्णिया के मो हसनैन शहबाजी, बांका के मो फैजान शहबाजी, मो दानिश शहबाजी व मो इजराईल शहबाजी की भी दस्तारबंदी की गयी. शहबाजी मोहम्मद के दर बिखरे हुए लाल व गोहर… शहबाज मोहम्मद के दर पर किया खूब है नूरानी मंजर, शहबाजी मोहम्मद के दर पर, जब बिखरे हुए हैं, लाल व गोहर शहबाज मोहम्मद के दर पर, किया काम तेरा पारस पत्थर, शहबाज मोहम्मद के दर पर… हजरत की शान में उक्त नातिया कलाम कोलकाता से आये शोयरा इश्तियाक रहबर ने उर्स-ए-पाक के मौके पर पढ़ी. हजरत मकदूम शहबाज मोहम्मद के शान में एक से बढ़कर एक नातिया कलाम अब्बास रजा नूरी, मोइनउद्दीन बुलबुले, जुनैद अशरफ व हाफिज गुलजार अहमद ने पढ़ी. देर रात तक चले जलसा में नातिया कलाम सुन लोग झूम उठते थे. कार्यक्रम के अंत में तकरीर किछौछा शरीफ से आये मौलाना कमर आमल कादरी ने दीन-ए-इस्लाम से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि बुजुर्गों ने हमेशा से लोगों नेकी व अच्छा के लिए काम किया है. अल्लाह के बताये रास्ते पर अपनी पूरी जिंदगी गुजार दी. बुजुर्गों से निसबत रखने वालों को दीन के साथ-साथ दुनिया में भी कामयाबी मिलती है. राजस्थान से आये मौलाना मुफ्ती अशरफ जीलानी अजहरी ने लोगों को हजरत पैगंबर साहेब के जीवनी पर प्रकाश डाला. मंच संचालन मोहम्मद आरिफ सिद्दिकी ने किया. महफिल-ए-शमा का आज होगा आयोजन मुफ्ती फारूक आलम अशरफी ने बताया कि उर्स-ए-पाक के अंतिम दिन यानी शुक्रवार को मगरिब की नमाज के बाद शाहजहानी मस्जिद में कुरान व फातिहा खानी होगा. इशा की नमाज के बाद कुल शरीफ व दुआ का एहतमाम किया जायेगा. रात 10 बजे खानकाह गद्दी पर महफिल-ए-शमा का आयोजन किया जायेगा.

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