bhagalpur news. 200 बच्चों में से 161 को ऑपरेशन की आवश्यकता

161 बच्चों को ऑपरेशन की जरुरत.
-निःशुल्क बाल हृदय रोग जांच शिविर का आयोजन, आठ जिलों के पीड़ित बच्चों की हुई जांच जय प्रभा मेदांता सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, पटना ने जीवन जागृति सोसायटी, इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक (भागलपुर), रोटरी भागलपुर, बाल हृदय योजना, स्टेट हेल्थ सोसाइटी बिहार सरकार तथा आरबीएसके के सहयोग से आईएमए हॉल, भागलपुर में रविवार को निःशुल्क बाल हृदय रोग जांच शिविर का आयोजन किया. 200 से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग हुई. जन्मजात हृदय रोग के 161 बच्चे चिन्हित हुए. जिसमें करीब 40 बच्चों के लिए ऑपरेशन की जरूरत बतायी गयी.100 बच्चों को 6 माह के अंदर ह्रदय के सर्जरी की जरूरत है. वहीं 15 से 20 को जल्द से जल्द ऑपरेशन की जरूरत है. उनके स्थायी निदान की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी. ये बच्चे अपने अभिभावक के साथ भागलपुर के अलावा खगड़िया, बांका, मुंगेर, मधेपुरा, कटिहार, पूर्णिया एवं गोड्डा से जांच के लिए पहुंचे थे. जांच के दौरान कई बच्चों में जन्मजात एवं अन्य हृदय संबंधी समस्याओं की पहचान की गयी, जिन्हें आगे की जांच एवं उपचार के लिए मेदांता पटना में रेफर किया गया. इससे पहले कार्यक्रम का उद्घाटन जीवन जागृति सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह आईएपी अध्यक्ष शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ अजय सिंह, स्वास्थ्य विभाग के पूर्व मुख्य निदेशक एवं स्वतंत्र पैनलिस्ट मेदांता चयन समिति डॉ सुनील झा, आईएपी के भागलपुर के पूर्व अध्यक्ष डॉ विनय मिश्रा, डॉ राकेश मिश्रा, मेदांता के पीडियाट्रिक्स कार्डियोलॉजी डायरेक्टर डॉ आशीष सप्रै, सीनियर कंसल्टेंट डॉ सुप्रीत बल्लूर, एसोसिएट कंसल्टेंटडॉ कुमारी सोनी, पुरुषोत्तम प्रसाद सिंह ने संयुक्त रूप से किया. शिशु अकादमी भागलपुर के अध्यक्ष डॉ अजय कुमार सिंह ने कहा कि इस शिविर का आयोजन बाल हृदय योजना एवं पीपीपी रेफरल मॉडल के तहत हुआ. इसका उद्देश्य जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों की समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित करना रहा. बताया कि प्रत्येक 1000 बच्चों में नौ बच्चों को जन्मजात हृदय रोग होता है और भारत में प्रत्येक वर्ष करीब 2 लाख बच्चे हृदय रोग से ग्रसित जन्म लेते हैं. इसमें से कुछ छिद्र जैसे एएसडी, वीएसडी कई बार स्वतः बंद हो जाते हैं, लेकिन जरूरी नहीं की बंद हो ही जाये.नहीं बंद होने पर भविष्य में इसको भी ऑपरेशन करने की जरूरत पड़ती है. 20 प्रतिशत जन्मजात हृदय काफी क्रिटिकल होता है और इसका जल्द से जल्द ऑपरेशन करना पड़ता है. नहीं करने से बच्चे की मौत भी हो जाती है. डॉ सुनील झा, डॉ आरके मिश्रा, डॉ विनय कुमार मिश्रा, डॉ शंभु शंकर सिंह, डॉ अनिल कुमार यादव, डॉ खलील अहमद एवं डॉ एमके यादव, जीवन जागृति सोसाइटी के सोमेश यादव, संबित कुमार, राकेश माही, विनीता साह, रूपा सा, मृत्युंजय, अखलेश, मेदांता के कॉर्डिनेटर अक्षय कुमार आदि का योगदान रहा.
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