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Bhagalpur news रिंग बांध के कटे भाग को बनाने के लिए इस वर्ष भी राशि स्वीकृत नहीं

Updated at : 12 Jan 2026 1:21 AM (IST)
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Bhagalpur news रिंग बांध के कटे भाग को बनाने के लिए इस वर्ष भी राशि स्वीकृत नहीं

रिंग बांध के कटे भाग को बनाने के लिए इस वर्ष भी जल संसाधन विभाग के मुख्यालय से कटाव निरोधी कार्य के लिए राशि को स्वीकृत नहीं किया

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तीन पंचायतों को बचाने वाले रिंग बांध के कटे भाग को बनाने के लिए इस वर्ष भी जल संसाधन विभाग के मुख्यालय से कटाव निरोधी कार्य के लिए राशि को स्वीकृत नहीं किया. प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी बाढ़ की विभिषिका लोगों को झेलनी होगी. रंगरा प्रखंड के मदरौनी के पास कटे रिंग बांध को जलसंसाधन विभाग 10 वर्ष बीतने के पश्चात भी नहीं बना पाया है. वर्ष 2025 में गोपालपुर में कटे हुए बांध को बनाने के लिए राशि स्वीकृत हो गयी, किंतु मदरौनी के पास रिंग बनाने के लिए राशि स्वीकृत नहीं की गयी. मदरौनी गांव के एमएलसी डाॅ संजीव कुमार सिंह लगातार चार बार से जीतते आ रहे हैं. संजीव सिंह पहले उनके पिता शारादा प्रसाद सिंह एमएलसी हुआ करते थे. शारदा प्रसाद सिंह के निधन के पश्चात उनके पुत्र लगातार एमएलसी बन रहे हैं. बाढ़ प्रभावित मनोज सिंह कहते हैं कि एमएलसी अपने घर को कटाव से बचाने के लिए बोल्डर पिंचिग करवा दिया. बोल्डर पिचिंग के रख रखाव के लिए प्रत्येक वर्ष राशि स्वीक़ृत होती रहती हैं, किंतु तीन पंचायतों को बाढ़ से बचाने के लिए रिंग बांध के कटे भाग को नहीं बनवा पा रहे हैं. कटे रिंग बांध से बाढ़ का पानी से प्रत्येक वर्ष सधुआ चापर पंचायत के सधुआ, चापर, कोसकीपुर सहोड़ा पंचायत व मदरौनी पंचायत के मदरौनी गांव पूरी तरह जलमग्न हो जाता है. बाढ़ प्रभावित परिवार को जुलाई, अगस्त, सितंबर, अक्टूबर तक काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. आवागमन , रहने की समस्या, खाने की समस्या सहित कई अन्य तरह की परेशानियां होती है.

बाढ़ के समय प्रत्येक वर्ष सरकार बढ़ प्रभावितों को 30 से 40 करोड़ रुपये बांट देती है. प्रत्येक पीड़ित परिवार को सरकार सात हजार रुपये देती है. यदि जल संसाधन विभाग रिंग बांध कटे भाग को बनाए, तो इससे आधी कीमत में बन जायेगी. किंतु रिंग बांध बनाने के बजाय सरकार प्रत्येक वर्ष रुपये बांटती है.

रिंग बांध कुरसेला से त्रिमुहान घाट तक बनाया जाना था. रिंग बांध का कार्य आरंभ हुआ तो मदरौनी के पास रिंग बांध बना ही नहीं. मदरौनी के पास रिंग बांध को पुरानी रेलवे बांध में मिला दिया. संवेदक की दलील यह थी कि रिंग बांध के लिए प्रस्तावित जमीन पर कोर्ट में मुकदमा चल रहा है. जमीन पर मुकदमा लंबित होने से जमीन का अधिग्रहण नहीं हो पाया. पुराना बांध कोसी नदी में कट गया.

रिंग बांध को बनाने में जमीन अधीग्रहण की समस्या है. रिंग बांध जहां पर कटा है वहां पर अभी नदी बह रही है. रिंग बांध बनाने के लिए अतिरिक्त जमीन के अधिग्रहण की अवश्यकता है. प्रशासन को पिछले 10 वर्षों से रिंग बांध बनाने के लिए जमीन ही नहीं मिल रही है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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JITENDRA TOMAR

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By JITENDRA TOMAR

JITENDRA TOMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

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