bhagalpur news. हिंदी आलोचना की चमकती आंख हैं नामवर सिंह : प्रो रविभूषण

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bhagalpur news. हिंदी आलोचना की चमकती आंख हैं नामवर सिंह : प्रो रविभूषण

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में शुक्रवार को हिंदी के प्रख्यात आलोचक नामवर सिंह की जन्मशती पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ.

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तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में शुक्रवार को हिंदी के प्रख्यात आलोचक नामवर सिंह की जन्मशती पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ. संगोष्ठी का विषय ‘नामवर सिंह : आलोचना के नये प्रतिमान’ रखा गया है. रांची से आये वरिष्ठ आलोचक प्रो रविभूषण ने कहा कि नामवर सिंह हिंदी आलोचना की चमकती आंख हैं. उन्होंने कहा कि पराधीन भारत में रामचंद्र शुक्ल, प्रेमचंद, प्रसाद और निराला को वैसी ख्याति नहीं मिली, जैसी स्वतंत्र भारत में नामवर सिंह को मिली. दिनकर और नामवर की प्रतिमा पर हुआ माल्यार्पण कार्यक्रम की शुरुआत दिनकर परिसर स्थित राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण और नामवर सिंह के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गयी. पहले सत्र की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के वरिष्ठ संकायाध्यक्ष प्रो सुदामा यादव ने की. स्वागत भाषण में हिंदी विभाग एवं मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो शिव शंकर मंडल ने कहा कि नामवर सिंह की आलोचनात्मक दृष्टि में ऐसा प्रभाव था कि यदि वे किसी रचना के महत्व को उजागर कर देते थे, तो वह रचना रातों-रात प्रसिद्ध हो जाती थी. विद्यार्थियों के बीच बेहद लोकप्रिय थे नामवर दूसरे सत्र में सुंदरवती महिला महाविद्यालय की सहायक प्राध्यापक डॉ सबा रईस ने कहा कि शिक्षक के रूप में नामवर सिंह विद्यार्थियों के बीच बेहद लोकप्रिय थे. उन्होंने नामवर सिंह के उस कथन का उल्लेख किया, जिसमें वे कहते थे कि लोगों का मानना है कि उन्होंने छात्रों को बनाया, जबकि उन्हें लगता था कि उनके छात्रों ने उन्हें बनाया है. स्कॉटिश चर्च कॉलेज, कोलकाता की प्रो गीता दूबे ने ‘नामवर सिंह की स्त्री-दृष्टि’ विषय पर विचार रखे. वहीं काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी से आये प्रो आशीष त्रिपाठी ने ‘दूसरी परंपरा की खोज’ पुस्तक के संदर्भ में नामवर सिंह की आलोचना की ऐतिहासिकता पर चर्चा की. किशन कालजयी ने की दूसरे सत्र की अध्यक्षता दूसरे सत्र की अध्यक्षता ‘संवेद’ और ‘सबलोग’ पत्रिका के संपादक किशन कालजयी ने की. प्रश्नकाल में शोधार्थियों और शिक्षकों ने प्रो आशीष त्रिपाठी से सवाल किये. कार्यक्रम में कुलगीत एवं स्वागत गान की प्रस्तुति पूजा, शुभ्रा, शिखा और मनीषा ने दी. संचालन डॉ दिव्यानंद ने किया. धन्यवाद ज्ञापन प्रो नीलू कुमारी और डॉ मनजीत कुमार सिंह ने किया. कार्यक्रम में पीजी हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्क्ष डॉ योगेंद्र, डॉ पवन कुमार सिंह आदि गण्यमान्य उपस्थित थे. जबकि मंचीय व्यवस्था डॉ अनूप श्री विजयिनी ने संभाली. शनिवार को संगोष्ठी का दूसरा दिन सुबह 10:30 बजे से शुरू होगा.

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निशिरंजन ठाकुर

लेखक के बारे में

By निशिरंजन ठाकुर

निशिरंजन ठाकुर मुख्यधारा की पत्रकारिता में 25 वर्षों से अधिक समय से सक्रिय. साहित्यिक विषयों में भी गहरी रूचि. खबरों में तथ्य के साथ मानवीय संवेदना और भाषा की सादगी को अहम मानते हैं.

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