bhagalpur news. पांच नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा, सिल्क सिटी के गंगा तटों पर उमड़ेगा श्रद्धालुओं का सैलाब

Author Atul kumar
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bhagalpur news. पांच नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा, सिल्क सिटी के गंगा तटों पर उमड़ेगा श्रद्धालुओं का सैलाब

इस बार कार्तिक पूर्णिमा पांच नवंबर बुधवार को है. कहीं भगवान सत्यनारायण की पूजा होगी, तो कहीं देव दीपावली पर दीपोत्सव, तो कहीं भजन संध्या का आयोजन होगा.

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इस बार कार्तिक पूर्णिमा पांच नवंबर बुधवार को है. कहीं भगवान सत्यनारायण की पूजा होगी, तो कहीं देव दीपावली पर दीपोत्सव, तो कहीं भजन संध्या का आयोजन होगा. शहर के सभी गंगा तटों बूढ़ानाथ, एसएम कॉलेज सीढ़ी घाट, खिरनी घाट, मुसहरी घाट, बरारी लंच घाट, बरारी सीढ़ी घाट व पुल घाट पर गंगा स्नान करने वालों की भीड़ उमड़ेगी. गंगा स्नान करने के लिए शहर के आसपास गांव के ही लोग नहीं, बल्कि बांका, गोड्डा, दुमका व जमुई के लोग भी आते हैं.

राणी सती मंदिर में देव दीपावली पर दीपोत्सव मनाया जायेगा. संयोजक मनोज चुड़ीवाला ने बताया कि राणी सती दादी जी का गेंदा, गुलाब और रजनीगंधा फूल से भव्य शृंगार हाेगा. इस दौरान महाआरती होगी. इसी दिन आदमपुर शिव शक्ति मंदिर का स्थापना दिवस मनाया जायेगा. महंत अरुण बाबा के संचालन में स्थापना दिवस पर सैकड़ों लोगों को खीर प्रसाद का वितरण किया जायेगा. तिलकामांझी की सरिता सिन्हा ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान सत्यनारयण की पूजा धूमधाम से होती है. इस पूजा में पड़ोसी परिवार भी शामिल होते हैं और भगवान सत्य नारायण की कथा सुनते हैं. वहीं गुरुद्वारा में प्रकाशोत्सव सह दीपोत्सव भी मनाया जायेगा. अलग-अलग धार्मिक स्थल पर भजन संध्या की तैयारी चल रही है.

उदया तिथि के कारण पांच को होगी कार्तिक पूर्णिमा

पंडित शंकर मिश्रा ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा का प्रवेश चार नवंबर को रात्रि 10:36 बजे होगा. समापन पांच नवंबर को संध्या 6:48 बजे होगा. उदया तिथि के कारण पांच नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा का मान होगा. कार्तिक पूर्णिमा अत्यंत शुभ माना जाता है, मोक्ष की प्राप्ति होने की मान्यता है. जीवन की परेशानी दूर हो जाती है. शांति-समृद्धि आती है. इसलिए स्नान के बाद भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की विशेष रूप से पूजा की जाती है. स्नान करने के बाद दान करने से समृद्धि आती है. जब भगवान विष्णु और चंद्र देवता की विशेष पूजा का विधान है. इस दिन स्नान, दान और दीपदान का विशेष महत्व है और इसे देव दीपावली के रूप में भी मनाया जाता है. इसी दिन देवताओं की दीपावली, यानी देव दीपावली का उत्सव मनाया जाता है. जब समस्त देवता काशी में गंगा तट पर दीप जलाकर भगवान विष्णु और महादेव की आराधना करते हैं. इस बार देव दीपावली का सबसे शुभ समय या प्रदोषकाल शाम 5:15 बजे से लेकर 7:50 बजे तक रहेगा. इस अवधि में लगभग ढाई घंटे तक विधिपूर्वक पूजा-अर्चना और दीपदान का आयोजन किया जा सकता है. कार्तिक पूर्णिमा पर चंद्र देवता की पूजा और उन्हें अर्घ देने का भी विशेष महत्व है. इस वर्ष चंद्रोदय शाम 5:11 बजे होगा.

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