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bhagalpur news. जेएलएनएमसीएच के डॉक्टरों का बनेगा फेस अटेंडेंस

Updated at : 28 Jul 2025 10:49 PM (IST)
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bhagalpur news. जेएलएनएमसीएच के डॉक्टरों का बनेगा फेस अटेंडेंस

मायागंज अस्पताल में अब डाॅक्टर का फेस अटेंडेंस बनेगा. दैनिक हाजिरी बनाने के लिए एप में चेहरा स्कैन करना होगा.

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मायागंज अस्पताल में अब डाॅक्टर का फेस अटेंडेंस बनेगा. दैनिक हाजिरी बनाने के लिए एप में चेहरा स्कैन करना होगा. आधार बेस्ड एप में लोकेशन के आधार पर अस्पताल परिसर में हाजिरी बनेगी. पहले से प्रोफेसर व एसोशियेट प्रोफेसर की आधार बेस्ड एप के माध्यम से हाजिरी बनती थी. लेकिन ताजा निर्णय में सभी मेडिकल ऑफिसर, सीनियर रेजिडेंट व जूनियर रेजिडेंट को इसमें शामिल किया गया. पहले फिंगरप्रिंट से हाजिरी बनाना होता था. लेकिन उसमें कई बार धांधली की शिकायत मिली थी. अस्पताल अधीक्षक डाॅ अविलेश कुमार ने बताया कि अब आधार बेस्ड एप पर चेहरा दिखाने के बाद ही हाजिरी बनेगी.

बच्चों में सबसे अधिक हेपेटाइटिस ए की बीमारी हो रही : डॉ अंकुर

जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (जेएलएनएमसीएच) के शिशु रोग विभाग में सोमवार को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया गया. वहीं एक जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ अंकुर प्रियदर्शी ने की. संगोष्ठी में स्नातकोत्तर छात्र डॉ आकाश देशमुख ने हेपेटाइटिस की विभिन्न किस्मों ए, बी, सी, डी व इ के बारे में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने कहा कि बच्चों में हेपेटाइटिस के संक्रमण के कई कारण हो सकते हैं. इनमें दूषित खाद्य एवं पेय पदार्थ, संक्रमित रक्त, सुई, शरीर के द्रव व मां से नवजात को संक्रमण शामिल है. उन्होंने हेपेटाइटिस लक्षणों, उपचार और रोकथाम के उपायों पर भी प्रकाश डाला. विभागाध्यक्ष डॉ अंकुर प्रियदर्शी ने कहा कि बच्चों में सबसे अधिक हेपेटाइटिस ए देखने को मिलता है, जो दूषित खानपान के कारण होता है. यह रोग सामान्य रूप से स्वयं ठीक हो सकता है. लेकिन स्वच्छता एवं सुरक्षित पेयजल की भूमिका अत्यंत अहम है. उन्होंने कहा कि हेपेटाइटिस ए व बी दोनों के लिए प्रभावी टीके उपलब्ध हैं, जिन्हें समय पर लगवाकर बच्चों को इस संक्रमण से सुरक्षित किया जा सकता है. उन्होंने हेपेटाइटिस बी के गंभीर परिणामों के बारे में जानकारी दी. यह संक्रमण जन्म के समय मां से शिशु में, संक्रमित रक्त, सुई तथा अन्य शरीर के द्रवों के माध्यम से फैल सकता है. इसके चलते लीवर फेल्योर, सिरोसिस, क्रॉनिक लीवर डिजीज और लीवर कैंसर जैसी जानलेवा स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं. कार्यक्रम में डॉ राजीव कुमार, डॉ राकेश कुमार, डॉ ब्रजेश, डॉ सीएस चौधरी, डॉ पवन, डॉ अनिल समेत अनेक वरिष्ठ चिकित्सक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थी उपस्थित थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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NISHI RANJAN THAKUR

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