ये हैं बिहार के अजब गजब थाने : कहीं लटका है ताला तो कहीं शौचालय में आरोपित होते हैं बंद

Updated at : 21 Feb 2020 11:01 AM (IST)
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ये हैं बिहार के अजब गजब थाने : कहीं लटका है ताला तो कहीं शौचालय में आरोपित होते हैं बंद

अंकित आनंदभागलपुर : देश में शुमार अजीबोगरीब थानों में कुछ थाने भागलपुर में मौजूद हैं. कहीं दो कमरे में पूरा थाना चल रहा है, तो किसी थाने में केवल महिला पुलिस कर्मी ही प्रतिनियुक्त हैं. कहीं नौ वर्ष पूर्व खुले थाना में मात्र एक एफआइआर ही दर्ज किया गया है, तो छह माह पूर्व खुले […]

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अंकित आनंद
भागलपुर :
देश में शुमार अजीबोगरीब थानों में कुछ थाने भागलपुर में मौजूद हैं. कहीं दो कमरे में पूरा थाना चल रहा है, तो किसी थाने में केवल महिला पुलिस कर्मी ही प्रतिनियुक्त हैं. कहीं नौ वर्ष पूर्व खुले थाना में मात्र एक एफआइआर ही दर्ज किया गया है, तो छह माह पूर्व खुले एक थाना में उद्घाटन के बाद से ताला लटक गया.

ट्रैफिक थाना: नौ वर्ष में एक एफआइआर
जाम से जूझ रहे भागलपुर को वर्ष 2011 में ट्रैफिक थाना दिया गया. उक्त थाना में डीएसपी रैंक के पदाधिकारी सहित एक इंस्पेक्टर, एक सार्जेंट, एक सार्जेंट मेजर, छह सब इंस्पेक्टर, छह एसिस्टेंट सब इंस्पेक्टर के पद का भी सृजन किया गया. साथ ही 12 हवलदार, 30 सिपाही, चार चालक सिपाही और वायरलेस ऑपरेटर का पद भी स्वीकृत है. नौ वर्ष पूर्व खोले गये इस थाना में अबतक केवल एक ही एफआइआर दर्ज किया गया. जिसकी संख्या 01/19 है. वहीं उक्त थाना के भवन में एक ही कमरा है. जिसमें लगे टेबल-कुर्सी पर बारी बारी से पदाधिकारी बैठ अपना कार्य करते हैं.

औद्योगिक थाना: शौचालयों में बंद किया जाता है आरोपियों को
जीरोमाइल चौक पर मौजूद औद्योगिक थाना महज दो छोटे-छोटे कमरों और एक बरामदे में सिमटा है. एक कमरे में थानाध्यक्ष का चेंबर है, तो दूसरे कमरे में सिरिस्ता का काम चलता है. जगह के आभाव में सड़क किनारे थाना के बरामदे पर ही पदाधिकारियों को कार्य करने के लिये टेबल और कुर्सी लगा दी गयी है. वहीं हाजत नहीं होने की वजह से गिरफ्तार किये जाने वाले अभियुक्तों को थाना के बगल में शौचालय में बंद कर दिया जाता है. सालों से उक्त थाना को नया भवन दिये जाने का प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा जा रहा है.

बाल मित्र थाना: बाल मित्र में लटका है ताला
15 अगस्त 2019 को कोतवाली परिसर में कोतवाली थाना भवन के ठीक पीछे बाल मित्र थाना स्थापित किया गया. उद्घाटन किये जाने के बाद उक्त थाना में पदाधिकारियों और कर्मियों की प्रतिनियुक्ति की गयी. पर प्रतिनियुक्त महिला पदाधिकारी के तबादले के बाद से ही ताला लटक गया. बच्चों और नाबालिगों के लिये बनाये गये इस थाना का उद्देश्य था कि अपराध की तरफ विमुख रहे बच्चों को सुधार कर उन्हें मुख्य धारा से जोड़ा जाये.

एससी/एसटी थाना: पुरुष अधिकारी, महिला जवान सशक्तीकरण का नया उदाहरण
भागलपुर के पुलिस अधिकारियों ने महिला जवानों पर भरोसा दिखाते हुए जिला के एक थाने में केवल महिला पुलिसकर्मियों की ही प्रतिनियुक्ति की है. पूर्व में अश्वारोही बल के परिसर में चल रहे इस थाने को वर्ष 2017 में पुलिस लाइन के ठीक पीछे स्थापित किया गया. उक्त थाने में पदाधिकारी तो पुरुष हैं पर थान में प्रतिनियुक्त सभी जवान महिला हैं और बखूबी में अपने कर्तव्यों का निर्वहण कर रही हैं. शहर के अन्य थाने का हाल कमोबेश ऐसा ही है. कहीं दो कमरे में थाना चल रहा है तो कहीं थाने की भवन ही जर्जर है. पुलिस कर्मियों के रहने का बैरक भी जर्जर है.

गजब का सीमांकन गौशाला थाने का गौशाला रोड
यह थाना नहीं बल्कि शहर के प्रमुख सड़कों में से एक है. कोतवाली थाना का गेट भले ही इस सड़क पर खुलता हो पर सीमांकन की बात की जाये तो उक्त सड़क के दूसरी तरफ का हिस्सा कोतवाली थाना से दो किलोमीटर दूर मौजूद तातारपुर थाना का सीमा क्षेत्र है. हालांकि उक्त क्षेत्र में होने वाली घटनाओं के दौरान तत्काल कोतवाली पुलिस भी मौके पर मौजूद तातारपुर थाना का सहयोग करती है. कई वर्षों से थानों के सीमांकन में सुधार के लिये कई बार मौखिक बयान दिये गये, पर आज तक सीमांकन में सुधार नहीं किया गया. इसके अलावा भी कई थाना क्षेत्र सीमांकन को लेकर परेशानी से जूझ रहे हैं.

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