यूजीसी के निर्देश के वर्षों बाद भी टीएमबीयू में डिजिटल लॉकर ठप, छात्रों को लगानी पड़ रही विवि की दौड़
Published by : SANJEEV KUMAR JHA Updated At : 25 May 2026 11:31 AM
टीएमबीयू प्रशासन छात्रों को डिजिटल फॉर्मेट में मार्कशीट और डिग्री उपलब्ध कराने में पूरी तरह नाकाम रहा है, जबकि यह सुविधा मिलने से छात्र घर बैठे ही दस्तावेजों को सुरक्षित रख सकते थे.
भागलपुर से आरफीन जुबैर की रिपोर्ट :
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) का निर्देश जारी होने के कई साल बीत जाने के बाद भी तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) के छात्रों को अब तक डिजिटल लॉकर (DigiLocker) की सुविधा नहीं मिल सकी है. स्थिति यह है कि विवि प्रशासन छात्रों को डिजिटल फॉर्मेट में मार्कशीट और डिग्री उपलब्ध कराने में पूरी तरह नाकाम रहा है. डिजिटल लॉकर की सुविधा मिलने से छात्र घर बैठे ही अपने दस्तावेजों को सुरक्षित रख सकते थे, लेकिन विवि की उदासीनता के कारण उन्हें आज भी अपने ही शैक्षणिक दस्तावेजों के लिए विवि के चक्कर काटने पड़ रहे हैं.सालों बाद भी चालू नहीं हुआ ”नेशनल एकेडमिक डिपोजिटरी सिस्टम”
विवि में नेशनल एकेडमिक डिपोजिटरी (NAD) सिस्टम लागू नहीं होने से छात्रों के शैक्षणिक दस्तावेजों को ऑनलाइन अपलोड नहीं किया जा सका है. इस व्यवस्था के तहत छात्रों के सर्टिफिकेट और मार्कशीट को ऑनलाइन स्टोरेज में सुरक्षित रखा जाना था, ताकि छात्र जब चाहें पोर्टल से इसे डाउनलोड कर सकें. इसके लिए सभी विश्वविद्यालयों को अपने छात्रों के प्रमाण पत्र ऑनलाइन अपलोड करने थे, लेकिन टीएमबीयू अब तक एनएडी (NAD) से अपना रजिस्ट्रेशन तक नहीं करा सका है. विवि प्रशासन की इस लापरवाही के कारण पिछले चार साल से यह योजना ठप पड़ी है.डिजिटल लॉकर और एनएडी से होने वाले मुख्य फायदे
यदि विवि इस सिस्टम से जुड़ जाता, तो छात्रों को प्रमाण पत्रों के खो जाने, चोरी होने या फटने का डर हमेशा के लिए खत्म हो जाता. छात्र दुनिया के किसी भी कोने से अपना प्रिंटआउट निकाल सकते थे. कोई भी कंपनी या अन्य शिक्षण संस्थान ऑनलाइन ही छात्रों के दस्तावेजों का सत्यापन (Verification) कर सकते थे. टीएमबीयू के जो छात्र दूसरे विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे हैं, उन्हें मार्कशीट, डिग्री और प्रोविजनल सर्टिफिकेट डिजिटल फॉर्मेट में तुरंत मिल जाते.
पंजीकरण के लिए पहचान पत्र अनिवार्य, बिहार की स्थिति बेहद खराब
विवि के एक अधिकारी ने बताया कि देश भर के 152 से अधिक विश्वविद्यालय और प्रमुख शिक्षण संस्थान एनएडी पर अपना रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं. लेकिन बिहार की स्थिति बेहद निराशाजनक है. पूरे राज्य से केवल दो शिक्षण संस्थान ही अब तक इससे जुड़ पाए हैं, जिनमें सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ बिहार (CUSB) और एनआईटी (NIT) पटना शामिल हैं. इन संस्थानों के छात्र अपने पहचान पत्र (जैसे रजिस्ट्रेशन नंबर/आईडी) के जरिए आसानी से दस्तावेज डाउनलोड कर रहे हैं.विवि प्रशासन का पक्ष : काम चल रहा है
विवि के परीक्षा नियंत्रक प्रो विनोद कुमार ओझा ने इस संबंध में कहा कि डिजिटल लॉकर को लेकर काम चल रहा है और कुछ विद्यार्थियों के दस्तावेज अपलोड भी किए जा चुके हैं. उन्होंने देरी का कारण बताते हुए कहा कि विवि में लगातार कुलपति बदलते रहे, जिस वजह से काम की गति आगे नहीं बढ़ पाई. विवि प्रशासन अब तेजी से प्रयास कर रहा है ताकि छात्र-छात्राओं को जल्द से जल्द डिजिटल लॉकर की सुविधा मिल सके.
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