ऐसे ही नहीं मिल गया नंबर वन का ताज : हार नहीं मानेंगे, रार नहीं ठानेंगे के सूत्र पर चले सभी

Updated at : 30 Mar 2019 7:25 AM (IST)
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ऐसे ही नहीं मिल गया नंबर वन का ताज : हार नहीं मानेंगे, रार नहीं ठानेंगे के सूत्र पर चले सभी

मिहिर, भागलपुर : प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, कटघर (हुसैनाबाद) को राज्य में नंबर वन पीएचसी का ताज यूं ही नहीं मिल गया. आसान बात नहीं कि राज्य के 533 पीएचसी को पछाड़ते हुए कटघर पीएचसी पहले स्थान को काबिज कर लिया. स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर नियमित रूप से मोहल्ले के लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक […]

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मिहिर, भागलपुर : प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, कटघर (हुसैनाबाद) को राज्य में नंबर वन पीएचसी का ताज यूं ही नहीं मिल गया. आसान बात नहीं कि राज्य के 533 पीएचसी को पछाड़ते हुए कटघर पीएचसी पहले स्थान को काबिज कर लिया. स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर नियमित रूप से मोहल्ले के लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिये जाते रहे हैं.

सिर्फ जागरूकता के लिये जाने पर लोगों का जुटान मुमकिन नहीं होता. लिहाजा साथ में दवा भी ले जाते थे. लोग इलाज के लिये जुटते, तो चिकित्सक-नर्स उनका इलाज तो करते ही, साथ ही बातों-बातों में उन्हें यह बताते कि तबीयत बिगड़े, तो पीएचसी आओ.
वहां मुफ्त में इलाज होगा. बढ़िया दवाई भी मिलेगी. दूसरी ओर आशा ने गर्भवती महिलाओं को पीएचसी तक लाना शुरू किया. जब लोग पीएचसी आने लगे, तो यहां की सफाई व्यवस्था, नर्स की नि:स्वार्थ सेवा भावना और मरीजों के प्रति तत्परता, चिकित्सक का मिलनसार स्वभाव ने लोगों के आकर्षण को बढ़ा दिया. जब बारी अवार्ड की आयी, तो राज्य में नंबन वन बन गये.
…लेकिन चुनौती और भी मिलती गयी
दो बार कायाकल्प योजना मॉनीटरिंग टीम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कटघर पहुंची. हर बार कमी बता कर टीम लौट गयी. इसको पीएचसी के चिकित्सा प्रभारी और नर्स ने सकारात्मक रूप में लिया. धीरे-धीरे अपनी कमी को सुधारना शुरू कर दिया.
मरीजों की संतुष्टि भी काम आयी
पीएचसी में आनेवाले मरीज और इनके परिजन व्यवस्था का बखान करते नहीं थकते. यह इस बात को साबित करता है कि यहां के चिकित्सक व नर्स का उनके प्रति व्यवहार कैसा है.
आज स्थिति यह है कि दूर-दराज से लोग भी यहां इलाज कराने आते हैं. मरीज कहते हैं कि यहां नहीं लगता कि सरकारी अस्पताल में आये हैं. सरकारी अस्पताल के प्रति लोगों की मन में बैठ चुकी गलत धारणा को भी इस केंद्र ने बदलने का काम किया.
…और इस तरह बन गया सूबे का नंबर वन पीएचसी
कायाकल्प योजना के तहत सूबे में नंबर वन बनने के पीछे यहां के सभी लोगों की भागीदारी और समाज के प्रति कुछ करने की सोच है. इस साल पीएचसी की ओर से खास तौर पर स्लम इलाके में नौ कैंप का आयोजन किया गया है. इसमें गंभीर मरीज को दवा और बेहतर इलाज के लिए पीएचसी बुलाया जाता है.
कहते हैं चिकित्सा पदाधिकारी
चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अजय कुमार झा कहते हैं कि कई चीजों की निगरानी कायाकल्प योजना अंतर्गत की जाती है. इसमें छोटी-छोटी बातों पर भी गंभीरता से नजर रखी जाती है.
पानी की टंकी की सफाई कितने दिनों में, मरीज की शिकायत के लिए कमेटी गठित है या नहीं, गर्भवती की जांच होती है या नहीं, टीकाकरण के लिये जागरूकता कैसे फैला रहे, सफाई की स्थिति.
इन तमाम गतिविधियों को देखा जाता है. डॉ झा ने बताया कि यहां सूई, रूई, रैपर को वेस्ट मैनेजमेंट के तहत फेंका जाता है. पहली बार जब टीम आयी तो हमें 76 प्रतिशत स्कोर मिला.
कुछ कमी को गिना टीम वापस चली गयी. कुछ दिन बाद फिर टीम वापस आयी. हमे 82.5 प्रतिशत स्कोर मिला. टीम ने फिर हमें सुझाव दिया और कमी बतायी. इसके बाद सभी ने फिर से जोर लगाया और परिणामस्वरूप 94.4 प्रतिशत अंक के साथ हम लोग बिहार में नंबर वन सेंटर के रूप में आ गये.
एक चिकित्सक के नेतृत्व ने पहना दिया सरताज
पीएचसी सह हेल्थ वेलनेस सेंटर में नियमित एक चिकित्सक डॉ अजय कुमार झा हैं. वे प्रभारी भी हैं. इसके अलावा डॉ साहिन बानो का यहां से तबादला हो गया. प्रत्येक मंगलवार को डॉ मनीष कुमार यहां सेवा देने आते हैं.
यानी एक मात्र चिकित्सक हैं, जो रोजाना औसतन 70 मरीज को देखते हैं. डॉ अजय कहते हैं कि हमें गुणवत्ता से काम करना है. सुविधा देनी है और बेहतर व्यवहार करना है. यह सोच पीएचसी के हर कर्मी के दिमाग में सेट है. इससे तीन जीएनएम, एक फर्मास्टिट और सात आशा ने मिल कर काम करना आरंभ किया.
गर्भवती को वार्ड से लाने का काम आशा करती, तो इनकी समुचित देखभाल यहां तैनात जीएनएम नर्स करती रही हैं. महिलाओं को परिवार नियोजन के बारे में बताने के लिए अलग चैंबर बनाया गया है. छोटे बच्चों को बेहतर इलाज करने के लिए हर सुविधा उपलब्ध है. दवा की कोई कमी नहीं होने दी गयी.
इसके बाद हम लोगों ने पीएचसी को सजाने का काम किया. कुछ दिनों में हमारा भवन किसी से कम नहीं रहा. लोगों को हर्बल खेती की सीख देने के लिए हम लोगों ने औषधीय पौधे भी लगाये. प्रसव यहां नहीं होता है. महिलाओं को इसके लिए आशा के साथ भेजा जाता है. प्रसव पूर्व जो सुविधा मिलनी चाहिए, वह सारी दी जाती है.
डॉक्टर-नर्स मोहल्ले में जाकर कहते हैं, स्वास्थ्य
केंद्र क्यों नहीं आते, मुफ्त में होता है इलाज
मोहल्ले से गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाती रही हैं आशा, तो नर्स की नि:स्वार्थ भाव से सेवा ने जीता महिलाओं का दिल
कभी भी मोहल्ले के लोगों को नहीं लगी स्वास्थ्य केंद्र में दुर्गंध, कमरे-बरामदे को रखते हैं साफ-सुथरा, बायोमेडिकल व अन्य कचरे के अलग-अलग डब्बे का करते हैं नियमित उपयोग
तीन कर्म ने पहनाया राज्यस्तरीय ताज
कुछ कर गुजरने की तमन्ना
टीम के हर सदस्यों की सजगता
नियमित जागरूकता
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