कक्षा चार के बच्चे हिंदी नहीं पढ़ पाते, आत्मग्लानि की बात है
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 25 Nov 2018 8:44 AM
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भागलपुर : बिहार शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से शनिवार को मोक्षदा इंटर स्कूल में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व शालाकोश विषय पर एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन हुआ. इसमें डीएम ने कड़े शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि यह हमारे लिए शर्म और आत्मग्लानि का विषय है कि कक्षा चार के बच्चे हिंदी की […]
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भागलपुर : बिहार शिक्षा परियोजना परिषद की ओर से शनिवार को मोक्षदा इंटर स्कूल में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व शालाकोश विषय पर एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन हुआ. इसमें डीएम ने कड़े शब्दों का प्रयोग करते हुए कहा कि यह हमारे लिए शर्म और आत्मग्लानि का विषय है कि कक्षा चार के बच्चे हिंदी की रीडिंग नहीं दे पा रहे हैं.
हाइ स्कूलों में 1500 नामांकन के मुकाबले 150 छात्र कक्षा में पहुंच रहे हैं. शिक्षक समय पर स्कूल नहीं आ रहे. स्कूलों में वास्तविक उपस्थिति के आधार पर शिक्षकों का रेशनालाइजेशन हो. कहीं पर शिक्षकों की भरमार है, तो कहीं पर शिक्षकों का टोटा. उन्होंने कहा कि जिले में स्कूली छात्रों की संख्या 5 लाख है. इनमें चार लाख बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं
. इन बच्चों का भविष्य शिक्षा विभाग के हाथ में है. ट्रेंड शिक्षकों की तैनाती की गयी है. बावजूद अबतक अभिभावकों का भरोसा सरकारी स्कूलों पर नहीं बन पाया है. उन्होंने कहा कि स्कूलों में नामांकन के बावजूद 50 फीसदी बच्चे कक्षा करने नहीं आते. गांव के प्राइवेट स्कूलों में बेहतर टीचर नहीं हैं. लेेकिन बेहतर प्रबंधन के कारण लोगों का विश्वास जीतने में सफल रहे हैं.
बावजूद 60-70 प्रतिशत बच्चों का अटेंडेंस बनाया जा रहा है. कार्यक्रम में डीइओ मधुसूदन पासवान, डीपीओ स्थापना जनार्दन विश्वास, डीपीओ एसएसए वीरेंद्र कुमार व जिलेभर से आये शिक्षक शामिल हुए. मौजूद कुछ सीआरसीसी ने डीएम से अपने कार्यक्षेत्र को लेकर सवाल पूछे व समस्या के समाधान की मांग की.
स्कूली व्यवस्था में सुधार के उपाय सुझाए
अभिभावकों में सरकारी स्कूल के प्रति भरोसा जगाने के लिये होमवर्क दिये जाएं इसकी रोजाना जांच हो स्कूलों में वास्तविक उपस्थिति के आधार पर शिक्षकों का रेशनालाइजेशन हो, कहीं पर शिक्षकों की भरमार है, तो कहीं शिक्षकों का है टोटासरकारी स्कूल से अभिभावकों का उठ गया है विश्वासस्कूलों के बेहतर संचालन के लिये जिले के दो सौ से अधिक सीआरसीसी को पहले सत्र में प्रशिक्षण दिया गया. वहीं दूसरे सत्र में सभी सीआरसीसी को संबोधित करने के लिये डीएम प्रणव कुमार आयोजन स्थल पर पहुंचे. डीएम ने अपने संबोधन में सरकारी स्कूली शिक्षा की कई खामियां गिनाईं. उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों से अभिभावकों का विश्वास उठ गया है.
तीन-तीन स्कूलों को करें विकसित, करेंगे निरीक्षण
डीएम प्रणव कुमार ने कहा कि हर सीआरसीसी को 10-15 सरकारी स्कूलों के संचालन की जिम्मेदारी दी गयी है. सभी सीआरसीसी अपने पंचायत के तीन-तीन स्कूलों की सूची उपलब्ध करायें. इन स्कूलों को दिसंबर तक विकसित करें. जनवरी में इन स्कूलों का निरीक्षण किया जायेगा. उन्होंने बताया कि रंगरोगन, एमडीएम खिलाने के लिये मैट, पौधरोपण, साफ-सफाई, छात्रों में स्वच्छता जैसे विषयों को तत्काल दुरुस्त किया जा सकता है.
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