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टपुआ में ध्वस्त हो रहा 11 करोड़ का तटबंध

By Prabhat Khabar Print Desk
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भागलपुर: कहलगांव के गंगा कछार में बसे तौफिल दियारा व टपुआ में शुरुआती बारिश में ही नवनिर्मित तटबंध की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लग गया है. तटबंध में लगाये गये करीब 80 हजार जीओ बैग में से 30 हजार चार दिनों में गंगा में समा चुके हैं. तटबंध ध्वस्त होने का सिलसिला लगातार जारी है. जीओ बैग से तैयार सुरक्षा कवच के जरिये तौफिल, टपुआ व बरोहिया गांव को बचाने के मंसूबे पर पानी फिर गया है. तटबंध निर्माण में खर्च की गयी 11 करोड़ राशि गंगा में बहने वाली है. खतरे को देख ग्रामीण भयभीत हैं.

11 करोड़ से हुआ है 850 मीटर कटाव निरोधी कार्य

कहलगांव-पीरपैती स्थित रानी दियारा गांव के गंगा में समाने का जब सिलसिला शुरू हुआ तो भगदड़ मच गयी. पूरा गांव विस्थापित हो गया था. उसके बाद यहां कटाव रोकने के लिए इसी वर्ष 13 मार्च से कटाव निरोधी कार्य पटना की बमबम एजेंसी द्वारा शुरू किया गया था जिसे 15 मई तक पूरा करा लिया गया. तैफिल दियारा के इलाके में करीब 350 मीटर व टपुआ गांव के पास पांच सौ मीटर तटबंध का निर्माण कराया गया है. इसमें करीब 80 हजार जीओ बैग जाल व रस्सी के सहारे लगाये गये हैं.

कहते हैं ग्रामीण

किशनदासपुर पंचायत के पूर्व मुखिया निशिकांत मंडल, रानी दियारा के पंसस कन्हाई लाल सिंह, उपमुखिया सच्चिदानंद कापड़ी, सुबोध मंडल आदि ने बताया कि गंगा की तेज धार टपुआ गांव के पश्चिमी छोर से नवनिर्मित तटबंध को ध्वस्त करना शुरू कर दिया है. पिछले गुरुवार से ही एक-एक कर जीओ बैग पानी में बह रहा है. यदि यह ध्वस्त हो गया तो सावन-भादो में टपुआ व बोरोहिया गांव कटाव की भेंट चढ़ सकते हैं. इसलिए समय रहते प्रशासन को इसपर ध्यान देने की जरूरत है, नहीं तो रानीदियारा की तरह ही गंगा की कछार से सटे ये दोनों गांव गंगा में समा जायेंगे.

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