प्रेम में मैं और तुम का कोई स्थान नहीं : मुरारी बापू
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 02 Jun 2024 10:25 PM
आरती श्री रामायण जी की. राम और सीता के नाम के महत्व की चर्चा स्वर्ग समान है. राम और राम कथा के साथ राम चरित्र की महिमा अपार है.
बादल श्रीवास्तव, वाल्मीकिनगर. महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली वाल्मीकिनगर में संत शिरोमणि मोरारी बापू ने 9 दिवसीय राम कथा वाचन के दूसरे दिन वाल्मीकि की धरती मां सीता की पाताल लोक स्थली को कोटि-कोटि नमन कहा. देश-विदेश से आये श्रद्धालुओं से भरे पंडाल में नियत समय पर मोरारी बापू ने राम कथा की शुरुआत की. मोरारी बापू ने कहा कि वाल्मीकि रामायण प्रधान है. राम और सीता के नाम के महत्व की चर्चा स्वर्ग समान है
आरती श्री रामायण जी की. राम और सीता के नाम के महत्व की चर्चा स्वर्ग समान है. राम और राम कथा के साथ राम चरित्र की महिमा अपार है. राम चरित्र मानस का एक-एक अक्षर पापों का नाश कर देता है. बापू ने कहा कि होशियारी छोड़कर निर्मल भाव से रामायण के पाठ करने से विश्व का कल्याण हो जाएगा. मंजिल तो स्वयं राम ही है. मार्ग की खोज जरूरी है. आज का उन्नत विज्ञान गति देता है, किंतु ज्ञान दिशा देता है.
तुलसीदास की मानें तो राम ही परम विष्णु हैंप्रभु राम के आदर्शों को देखें, तो खोज जरूरी है. चाहे वह मार्ग और निवास की हो. ऐसे निवास की खोज जहां किसी को हमसे उद्वेग न हो. जगत गुरु की मानें तो एकांत और मौन श्रेयस्कर है. तीसरी खोज प्रेम की हो. आदि कवि तुलसीदास की मानें तो राम ही परम विष्णु हैं. राम चरित्र मानस की मानें, तो अगर प्रेम प्राप्त हो जाए तो वैराग्य गौण हो जाता है. मानस से प्रेम करने से जीवन पूर्ण हो जाएगा. प्रेम की खोज जरूरी है. प्रेम में कोई शिकवा शिकायत नहीं होती. जैसी प्रेम दशरथ नंदन भरत से प्रभु श्रीराम ने किया. प्रेम केवल रामायण और मानस का दर्शन मात्र है. बीज सजीव है. उससे कई बीज जैसे प्रकट हो जाते हैं.
पर्यावरण सुरक्षा के लिए पौधारोपण जरूरीबापू ने कथा के क्रम में श्रद्धालुओं-भक्तों से पौधारोपण की अपील की. उन्होंने कहा कि पर्यावरण सुरक्षा के लिए पौधारोपण पहली प्राथमिकता मानकर करें. 1.40 करोड़ की आबादी में 100 करोड़ लोग अगर पौधारोपण करें, तो 100 करोड़ पौधों का रोपण होगा. बापू ने श्रद्धालु भक्तों को प्रवचन के दौरान कहा कि पौधारोपण का हमारे जीवन में बहुत बड़ा महत्व है.
तीन प्रवृत्तियों से बाहर निकलना हैदुष्ट प्रवृत्ति, रावण प्रवृत्ति और सर्प प्रवृत्ति. इन तीनों प्रवृत्तियों से बाहर निकलना है. तब राम हरि कथा समझ में आ जाएगी, क्योंकि राम नाम ही बीज मंत्र है. तुलसी कथा मंगल कथा है. कथा के दूसरे दिन भारी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्वक रामकथा को आत्मसात किया. पहले दिन की अपेक्षा दूसरे दिन भारी संख्या में भक्त श्रद्धालु पहुंचे. भक्तों और श्रद्धालुओं के लिए यथोचित प्रसाद की व्यवस्था समिति की ओर से की गयी है. श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो. पीने का पानी, साफ-सफाई, नाश्ता, खाना के अलावा शौचालय और पंडाल में कथा के दौरान गर्मी का एहसास न हो इसके लिए पानी का नयी तकनीक पर आधारित फुहार पंडाल में शीतलता प्रदान कर रहा है. भक्तों और श्रद्धालुओं के लिए कथा के दौरान बैठने की बेहतर व्यवस्था की गयी है.
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