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छापेमारी में दो नाबालिग नर्तकियां बरामद, आर्केस्ट्रा संचालक गिरफ्तार

Updated at : 25 Apr 2024 9:17 PM (IST)
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छापेमारी में दो नाबालिग नर्तकियां बरामद, आर्केस्ट्रा संचालक गिरफ्तार

स्थानीय थाना क्षेत्र के शिकारपुर गांव में एक आर्केस्ट्रा संचालक के ठिकाने पर छापेमारी कर दो नाबालिग नर्तकियों के साथ आर्केस्ट्रा संचालक को गिरफ्तार किया गया है.

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सिकटा. स्थानीय थाना क्षेत्र के शिकारपुर गांव में एक आर्केस्ट्रा संचालक के ठिकाने पर छापेमारी कर दो नाबालिग नर्तकियों के साथ आर्केस्ट्रा संचालक को गिरफ्तार किया गया है. मानव तस्करीरोधी इकाई क्षेत्रक मुख्यालय एसएसबी बेतिया, सिकटा थाना, मिशन मुक्ति फाउंडेशन(दिल्ली), बाल कल्याण समिति (बेतिया), रेस्क्यू एंड रिलीफ फाउंडेशन (प. बंगाल), प्रयास जुबेनाइल एड सेंटर(बेतिया), बाल चाइल्ड हेल्प लाइन (बेतिया) के सहयोग सयुंक्त छापेमारी की गई. पुलिस हिरासत में ली गई दोनों नर्तकियां दिल्ली और पश्चिम बंगाल की रहने वाली हैं. एसएसबी के निरीक्षक मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि कोई भी आर्केस्ट्रा संचालक जिलाधिकारी के पास आर्केस्ट्रा का पंजीकरण नहीं कराता है. जबकि इनका रजिस्ट्रेशन होना चाहिए. उधर थानाध्यक्ष राज रौशन ने बताया कि शिकारपुर गांव में संचालित पिंकी आर्केस्ट्रा म्यूजिकल ग्रुप से दो नाबालिग लड़कियों को आर्केस्ट्रा से मुक्त कराया गया. इसमें एक लड़की जलपाईगुड़ी रहने वाली थी और दूसरी दिल्ली की रहने वाली थी और एक आर्केस्ट्रा मालिक को गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तार आर्केस्ट्रा संचालक शिकारपुर गांव का ही राजकिशोर सिंह है. जिसके खिलाफ मामला दर्ज कर जेल भेज दिया गया है. टीम ने एसएसबी के इंस्पेक्टर मनोज कुमार शर्मा, अनिल कुमार शर्मा, अरविंद द्विवेदी, पम्मी मिश्रा, इंस्पेक्टर धर्मेद्र कुमार (साइबर थाना बेतिया), डाइरेक्टर वीरेंद्र कुमार सिंह मिशन मुक्ति फाउंडेशन(दिल्ली) व दिलीप कुमार, चितरंजन गिरी, अक्षय पांडेय, पवन कुमार, अमित कुमार, अनुप्रिया विलियम, आलोक कुमार शामिल रहे. आर्केस्ट्रा संचालकों का पंजीकरण जरूरी एसएसबी के निरीक्षक मनोज कुमार शर्मा ने खुलासा किया कि आर्केस्ट्रा संचालकों का पंजीकरण जरूरी होता है. लेकिन आर्केस्ट्रा का काला सच किसी से छिपा नहीं हैं. आर्केस्ट्रा में अधिकतर कम उम्र की लड़कियों की मांग रहती है. नाबालिग लड़कियों को आर्केस्ट्रा तक लाने के लिए बहुत सारे तरीके अपनाये जाते हैं. उन्हें और उनके परिवारों को एक रात डांस करने के पचास हजार से लेकर एक लाख रुपए कमाने का और फ़िल्मी एक्टर की तरह प्रसिद्ध होने का झांसा दिया जाता है. फिर जब नाबालिग लड़की आर्केस्ट्रा में आ जाती है तो उसके साथ ऐसा हो जाता है कि वो किसी से कह नहीं पाती और उसी नरक भरे आर्केस्ट्रा को अपना जीवन समझ लेती हैं. उन्होंने बताया कि आर्केस्ट्रा संचालकों को नियमानुसार जिलाधिकारी के पास पंजीकरण कराना होता है. जबकि ये रजिस्ट्रेशन नहीं कराते. जहां आर्केस्ट्रा में काम करने वालों की लिस्ट और उनके डोक्यूमेंटस भी देना होता है. वहीं आर्केस्ट्रा सिर्फ संगीत या गाने के लिए ही पंजीकरण होता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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